अर्जुन से खुलेगा अखिल की हत्या का राज
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शार्प शूटर कार्तिक हलदार के पुलिस के शिकंजे में फंसने के बाद गवाहों की हत्या की कड़ियां जुड़ने लगी हैं। शाहजहांपुर में गवाह कृपाल सिंह की जुलाई 2015 में हुई हत्या के मामले में कोर्ट ने आसाराम के करीबी अहमदाबाद के अर्जुन मूलचंदानी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।
11 साल तक बापू का रसोइया रहे शहर के अखिल गुप्ता की हत्या से दो माह पहले अर्जुन मूलचंदानी मुजफ्फरनगर भी आया था।
उसका मकसद आसाराम के पक्ष में अखिल से शपथ पत्र न्यायालय में दिलवाना था। अहमदाबाद के आश्रम में दुष्कर्म किए जाने का एक दूसरा मुकदमा छह अक्तूबर 2013 को वहीं के चांदखेड़ा थाने में दर्ज कराया गया था। पीड़िता के बयान पर गुजरात पुलिस ने अखिल को सरकारी गवाह बना लिया था। कोर्ट में अखिल 164 के बयान को बापू के अनुयायी झूठा साबित करने के लिए उसकी और से शपथ पत्र दिलाना चाहते थे।
कार्तिक हलदार फिलहाल छह दिन की रिमांड पर राजकोट क्राइम ब्रांच के कब्जे में है। उससे पूछताछ में जिस प्रवीण भाई का जिक्र सामने आया है, उसी ने अर्जुन को अखिल गुप्ता के पास भेजा था। वर्ष 2008 में आश्रम छोड़ आए अखिल ने अपने बयानों से पलटने से इंकार कर दिया था। इस वाक्यें के दो माह बाद ही 11 जनवरी, 2015 को कार्तिक हलदार ने अपने चार साथियों के साथ मिलकर जानसठ रोड पर घर लौटते गुप्ता का गोलियों से भून दिया था।
छत्तीसगढ़ के रायपुर से कार्तिक के पकड़े जाने के बाद नई मंडी पुलिस ने अहमदाबाद में उससे अखिल मर्डर केस में पूछताछ की तो अर्जुन मूलचंदानी का नाम सामने आया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार अर्जुन ही गवाहों की हत्या से पहले कार्तिक को रकम मुहैया कराता था। बापू की अंधभक्ति में शार्प शूटर बने कार्तिक के नए खुलासों से आसाराम की मुश्किलें बढ सकती है।
कार्तिक ने दिल्ली में ली थी ट्रेनिंग
गवाहों को ठिकाने लगाने से पहले कार्तिक हलदार ने दिल्ली में हथियार चलाने की प्रक्टिस की थी। राजकोट क्राइम ब्रांच के निरीक्षक आरके राणा ने बताया कि संजय नाम के एक शख्स ने उसे दिल्ली में पिस्टल चलाने का प्रशिक्षण दिया था। संजय उत्तर प्रदेश में बापू के आश्रमों की देखरेख करता है। बताते चलें कि कार्तिक करीब 28 दिन मुजफ्फरनगर में रहा। पहले 20 दिन अखिल की रेकी की, फिर हथियार लेने रायपुर गया। लौटने के सात दिन बाद उसने अखिल की हत्या कर दी।