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अमजद एनकाउंटर
Updated Thu, 19 Apr 2018 12:33 AM IST
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रिटायर सीओ ने मृतक की मां समेत पांच
मुजफ्फरनगर।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा वर्ष 2007 में रतनपुरी क्षेत्र में हुए अमजद एनकाउंटर में शामिल दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों ने मृतक के परिजनों पर दबाव बनाना प्रारंभ कर दिया है। एनकाउंटर में शामिल रहे अब रिटायर हो चुके सीओ स्योहारा, बिजनौर निवासी इकबालुजमां ने यहां शहर कोतवाली में मृतक की मां समेत पांच लोगों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने और धोखा देने का मुकदमा दर्ज कराया है।
रिटायर सीओ इकबालुजमां ने शहर कोतवाली में दर्ज कराए गए मुकदमे में मृत अमजद की मां अख्तरी के अलावा मनव्वर खां, जिंदा हसन, अब्दुल मम्मान, वसी अहमद निवासीगण गांव बिजौली, मंगलौर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप लगाया कि इन्होंने कूटरचित दस्तावेजों के जरिए फर्जी साक्ष्य जुटा कर धोखाधड़ी की। पुलिस ने चुपचाप यह मुकदमा दर्ज कर लिया है।
यह था एनकाउंटर का मामला
मुजफ्फरनगर। रतनपुरी, भौराकलां पुलिस और एंटी एक्सटोर्शन सेल ने 3 फरवरी 2007 को रतनपुरी थाना क्षेत्र में रामपुर चौराहे पर हरिद्वार जिले के मंगलौर थाना क्षेत्र के गांव बिजौली निवासी युवक अमजद पुत्र खालिद पुलिस मुठभेड़ में मारा था। आरोप था कि वह भौराकलां क्षेत्र से बाइक लूट कर भाग रहा था।
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मानवाधिकार आयोग ने फर्जी पाया एनकाउंटर
इस मामले में अमजद की मां अख्तरी ने 2 फरवरी 2007 को ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को फैक्स किया गया था, जिसमें उसने रतनपुरी पुलिस द्वारा उसके पुत्र अमजद को एक फरवरी 2007 की रात्रि में घर से उठा कर ले जाना बताया था। मानवाधिकार आयोग द्वारा इस मामले की जांच की गई। आयोग ने 20 जून 2017 को जांच रिपोर्ट राज्यपाल को भेजी थी, जिसमें मानवाधिकारों के उल्लंघन का होना पाया गया था। जांच में एनकाउंटर को फर्जी करार दिया गया। मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर उत्तर प्रदेश शासन के अनु सचिव पदमाकर शुक्ला ने पुलिस हैड क्वार्टर के अपर पुलिस महानिदेशक को 6 फरवरी 2018 को पत्र लिखकर कहा कि इस प्रकरण में मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये की धनराशि अंतिरम सहायता के रूप में प्रदान की जाए। धनराशि की प्रतिपूर्ति के लिए प्रकरण में दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करके प्रकरण में दोषी पुलिसकर्मियों पर वसूली का दंड अधिरोपित करके नियमानुसार वसूली कर राजकोष में जमा कराई जाए। साथ ही कार्रवाई से शासन को भी अवगत कराया जाए। इस आदेश के पालन में डीएम की ओर से गत नौ अप्रैल को मृतक अमजद की मां अख्तरी को अंतिरम राहत का पांच लाख रुपये का ड्राफ्ट सौंप दिया गया था।
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मुजफ्फरनगर।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा वर्ष 2007 में रतनपुरी क्षेत्र में हुए अमजद एनकाउंटर में शामिल दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों ने मृतक के परिजनों पर दबाव बनाना प्रारंभ कर दिया है। एनकाउंटर में शामिल रहे अब रिटायर हो चुके सीओ स्योहारा, बिजनौर निवासी इकबालुजमां ने यहां शहर कोतवाली में मृतक की मां समेत पांच लोगों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने और धोखा देने का मुकदमा दर्ज कराया है।
रिटायर सीओ इकबालुजमां ने शहर कोतवाली में दर्ज कराए गए मुकदमे में मृत अमजद की मां अख्तरी के अलावा मनव्वर खां, जिंदा हसन, अब्दुल मम्मान, वसी अहमद निवासीगण गांव बिजौली, मंगलौर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप लगाया कि इन्होंने कूटरचित दस्तावेजों के जरिए फर्जी साक्ष्य जुटा कर धोखाधड़ी की। पुलिस ने चुपचाप यह मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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यह था एनकाउंटर का मामला
मुजफ्फरनगर। रतनपुरी, भौराकलां पुलिस और एंटी एक्सटोर्शन सेल ने 3 फरवरी 2007 को रतनपुरी थाना क्षेत्र में रामपुर चौराहे पर हरिद्वार जिले के मंगलौर थाना क्षेत्र के गांव बिजौली निवासी युवक अमजद पुत्र खालिद पुलिस मुठभेड़ में मारा था। आरोप था कि वह भौराकलां क्षेत्र से बाइक लूट कर भाग रहा था।
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मानवाधिकार आयोग ने फर्जी पाया एनकाउंटर
इस मामले में अमजद की मां अख्तरी ने 2 फरवरी 2007 को ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को फैक्स किया गया था, जिसमें उसने रतनपुरी पुलिस द्वारा उसके पुत्र अमजद को एक फरवरी 2007 की रात्रि में घर से उठा कर ले जाना बताया था। मानवाधिकार आयोग द्वारा इस मामले की जांच की गई। आयोग ने 20 जून 2017 को जांच रिपोर्ट राज्यपाल को भेजी थी, जिसमें मानवाधिकारों के उल्लंघन का होना पाया गया था। जांच में एनकाउंटर को फर्जी करार दिया गया। मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर उत्तर प्रदेश शासन के अनु सचिव पदमाकर शुक्ला ने पुलिस हैड क्वार्टर के अपर पुलिस महानिदेशक को 6 फरवरी 2018 को पत्र लिखकर कहा कि इस प्रकरण में मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये की धनराशि अंतिरम सहायता के रूप में प्रदान की जाए। धनराशि की प्रतिपूर्ति के लिए प्रकरण में दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करके प्रकरण में दोषी पुलिसकर्मियों पर वसूली का दंड अधिरोपित करके नियमानुसार वसूली कर राजकोष में जमा कराई जाए। साथ ही कार्रवाई से शासन को भी अवगत कराया जाए। इस आदेश के पालन में डीएम की ओर से गत नौ अप्रैल को मृतक अमजद की मां अख्तरी को अंतिरम राहत का पांच लाख रुपये का ड्राफ्ट सौंप दिया गया था।