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कोरोना आपदा ने कराया परिवार की कीमत का अहसास

Mon, 01 Jun 2020 11:12 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2020 11:12 PM IST
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Corona disaster made family realize its value
बीना शर्मा। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
कोरोना आपदा ने कराया परिवार की कीमत का अहसास
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मुजफ्फरनगर। कोरोना के संकट में लंबे वक्त तक घरों में रहने के दौरान जिंदगी को लेकर न केवल नया चिंतन उभरा है, बल्कि प्राकृतिक और सीमित साधनों पर निर्भरता की प्रतिबद्धता सामने आई है। लॉकडाउन के दौरान घरों में बिताए गए समय और अनुभव के बारे में समाज की प्रबुद्ध महिलाओं ने ‘अमर उजाला’ से अपनी बातें साझा की।
जैन कन्या इंटर कालेज नई मंडी की प्रधानाचार्या डॉ. कंचन प्रभा शुक्ला कहती हैं कि लॉकडाउन ने लोगों को आत्मनिर्भर बनना बखूबी सिखाया है। घरेलू दायित्वों और व्यक्तिगत जीवन को संभालने के अवसरों में नई ऊर्जा आई। भौतिकवाद से उपजे तमाम हानिकारक परिणाम हमारी आर्थिक स्थिति , असीमित इच्छाओं और उनको पूरा करने में स्वास्थ्य तथा नैतिकता का कितना नुकसान करते हैं यह समझ में आया। बीते दो माह में उन्हें स्वाध्याय, पठन-पाठन की नवीन शैलियों का विस्तार करना तथा अनेक रचनात्मक कार्यों को क्रियान्वित कर आत्म संतोष प्राप्त करना बड़ी उपलब्धि लगता है।
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-साउथ सिविल लाइन निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता मीरा सक्सेना कहती हैं कि पूरी दुनिया एक इकाई है, ये कोरोना आपदा ने सिखा दिया। हम सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं। पृथ्वी हमसे प्रदूषण कम करने, ट्रैफिक कम करने की गुजारिश कर रही थी, लेकिन हमने नहीं सुनी। भागदौड़ में जीवन ऐसा व्यस्त हो गया था कि अपनों के लिए समय नहीं था। कोरोना के खौफ ने हमें परिवार और प्रकृति के बारे में सोचने का भी वक्त दिया है। हमें धरा को प्रदूषण मुक्त बनाने का संकल्प लेना होगा।
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-आर्य कन्या इंटर कालेज चरथावल की पूर्व प्रधानाचार्य कुसुम त्यागी शहर के बंसत विहार में रहती हैं। उनका कहना है कि लॉकडाउन के खाली वक्त में मास्क बनाकर जरूरतमंदों को वितरित करने से जो सुख की अनुभूति हुई, उसे शब्दों में बयां नहीं कर पाएगी। गलियों में बिना मास्क के आए फल और सब्जी वालों को नि:शुल्क मास्क दिए। इस कठिन समय ने सिखाया कि मानवता मत भूलिए।
-चरथावल के चंद्रशेखर आजाद पीजी कालेज की प्राचार्या सत्यवती कहती हैं कि सबकी सलामती के लिए नित्य दो घंटे महामृत्युंजय का जाप किया। छात्राओं को प्रेरित कर ग्रामीण महिलाओं में मास्क, सैनिटाइजर और सामाजिक दूरी के लिए सजगता अभियान से जागरूकता बढ़ाई। घरों में सिमटे जीवन में सादगी, सरलता और सकारात्मक विचारों के साथ जीने में सुख व शांति का अनुभव किया।

घरेलू हिंसा और डिप्रेशन के मामलों के ढूंढे हल : बीना
मुजफ्फरनगर। नई मंडी निवासी बीना शर्मा कहती हैं कि समाज में ऐसे भी परिवार मिले, जो कठिन हालातों में भी मदद नहीं मांगते है। उनका हौसला बढ़ाया और राशन की मदद की। महिलाओं और बेटियों से तीन हजार से ज्यादा मास्क बनवाए, ताकि उनकी आर्थिक सहायता हो। तैयार मास्क गरीबों में वितरित किए। घरेलू हिंसा तथा अवसाद के मामलों में ऑनलाइन संवाद से लोगों को जीवन का महत्व समझाया।

प्राचार्या सत्यवती।

प्राचार्या सत्यवती।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

कुसुम त्यागी।

कुसुम त्यागी।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

वरिष्ठ अधिवक्ता मीरा सक्सेना।

वरिष्ठ अधिवक्ता मीरा सक्सेना।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

कंचन प्रभा शुक्ला।

कंचन प्रभा शुक्ला।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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