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निजी कंपनी की जांच में बंद मिले 3449 हैंडपंप
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 29 Mar 2017 12:14 AM IST
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हैंडपंप।
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जल निगम में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिले में 3449 हैंडपंप बंद पड़े मिले हैं। रिबोर के लिए आने वाला पैसा विभाग डकार गया है। निजी कंपनी की जांच में सामने आए इस सच के बाद जिला प्रशासन चौकन्ना हो गया है। प्रत्येक हैंडपंप को जीपीएस से जोड़ा जा रहा है। सीडीओ ने बंद पड़े हैंडपंप का रिकार्ड मांगा है कि ये कब लगे और कब से बंद हैं।
पेयजल की समस्या से निजात दिलाने के लिए केंद्र सरकार दिल खोलकर पैसा खर्च कर रही है। हैंडपंप बंद पड़े होने को लेकर जिला प्रशासन के पास प्रतिदिन शिकायतें आ रही थीं। जल निगम के अधिकारी शिकायतों को दरकिनार करते थे और दावा करते थे सभी हैंडपंप सही काम कर रहे हैं। इस सबके बीच सीडीओ अंकित अग्रवाल ने एडीसीसी इन्फोकेड लिमिटेड से पूरे जिले के हैंडपंप का सर्वे कराया। सर्वे में जिले में कुल 2,454 हैंडपंप सामने आए हैं।
समस्त 498 गांवों में विस्तार से किए गए सर्वे में 3449 हैंडपंप ऐसे पाए गए हैं, जो बंद पड़े हैं। सामने आई रिपोर्ट में बुढा़ना ब्लाक में सबसे ज्यादा 590 हैंडपंप बंद पड़े हैं। इसी के साथ मोरना ब्लाक में 265, पुरकाजी में 258, जानसठ में 385, बघरा में 440, शाहपुर में 377, चरथावल में 310, खतौली में 449 और सदर में 368 हैंडपंप खराब पाए गए। एडीसीसी कंपनी की जांच के बाद जिला प्रशासन भी भौचक्क रह गया है।
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जिला विकास अधिकारी मोतीलाल व्यास ने जिला पेयजल स्वच्छता मिशन से जुड़े सलाहकार, ब्लाक समन्वयक, जल निगम के ब्लाक स्तरीय जेई से उनके विकासखंडों की सत्यापन आख्या एक सप्ताह में देने के लिए कहा है। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में हैंडपंप का खराब मिलना गंभीर मामला है। जल निगम से बंद पड़े हैंडपंप का रिकार्ड देने के लिए कहा गया है। पूछा गया है कि ये हैंडपंप कब से लगे हैं और बंद कब से हैं। कुछ हैंडपंप तीन साल से ज्यादा से बंद है, जो बेहद गंभीर मामला है।
हमारे पास नहीं है रिकार्ड
मुजफ्फरनगर। जलनिगम के अधिशासी अभियंता रामसेठ सिंह इतनी बड़ी संख्या में हैंडपंप खराब होने की बात को ही नकार रहे हैं। उनका कहना है कि गांव में हैंडपंप ठीक कराने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की है। हमारे पास खराब हैंडपंप का कोई रिकार्ड नहीं है।
जीपीएस सिस्टम से जुड़ेंगे हैंडपंप
मुजफ्फरनगर। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने बताया कि पानी हमारे जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। पैसे को पानी के नाम पर बहाया नहीं जा सकता। अब हैंडपंप में कोई घोटाला नहीं कर पाएगा। प्रत्येक हैंडपंप को जीपीएस सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है।
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पेयजल की समस्या से निजात दिलाने के लिए केंद्र सरकार दिल खोलकर पैसा खर्च कर रही है। हैंडपंप बंद पड़े होने को लेकर जिला प्रशासन के पास प्रतिदिन शिकायतें आ रही थीं। जल निगम के अधिकारी शिकायतों को दरकिनार करते थे और दावा करते थे सभी हैंडपंप सही काम कर रहे हैं। इस सबके बीच सीडीओ अंकित अग्रवाल ने एडीसीसी इन्फोकेड लिमिटेड से पूरे जिले के हैंडपंप का सर्वे कराया। सर्वे में जिले में कुल 2,454 हैंडपंप सामने आए हैं।
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समस्त 498 गांवों में विस्तार से किए गए सर्वे में 3449 हैंडपंप ऐसे पाए गए हैं, जो बंद पड़े हैं। सामने आई रिपोर्ट में बुढा़ना ब्लाक में सबसे ज्यादा 590 हैंडपंप बंद पड़े हैं। इसी के साथ मोरना ब्लाक में 265, पुरकाजी में 258, जानसठ में 385, बघरा में 440, शाहपुर में 377, चरथावल में 310, खतौली में 449 और सदर में 368 हैंडपंप खराब पाए गए। एडीसीसी कंपनी की जांच के बाद जिला प्रशासन भी भौचक्क रह गया है।
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जिला विकास अधिकारी मोतीलाल व्यास ने जिला पेयजल स्वच्छता मिशन से जुड़े सलाहकार, ब्लाक समन्वयक, जल निगम के ब्लाक स्तरीय जेई से उनके विकासखंडों की सत्यापन आख्या एक सप्ताह में देने के लिए कहा है। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में हैंडपंप का खराब मिलना गंभीर मामला है। जल निगम से बंद पड़े हैंडपंप का रिकार्ड देने के लिए कहा गया है। पूछा गया है कि ये हैंडपंप कब से लगे हैं और बंद कब से हैं। कुछ हैंडपंप तीन साल से ज्यादा से बंद है, जो बेहद गंभीर मामला है।
हमारे पास नहीं है रिकार्ड
मुजफ्फरनगर। जलनिगम के अधिशासी अभियंता रामसेठ सिंह इतनी बड़ी संख्या में हैंडपंप खराब होने की बात को ही नकार रहे हैं। उनका कहना है कि गांव में हैंडपंप ठीक कराने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की है। हमारे पास खराब हैंडपंप का कोई रिकार्ड नहीं है।
जीपीएस सिस्टम से जुड़ेंगे हैंडपंप
मुजफ्फरनगर। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने बताया कि पानी हमारे जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। पैसे को पानी के नाम पर बहाया नहीं जा सकता। अब हैंडपंप में कोई घोटाला नहीं कर पाएगा। प्रत्येक हैंडपंप को जीपीएस सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है।