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नगर पालिका में लिपिकों को लेकर छिड़ी रार
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नगरपालिका में लिपिकों को लेकर छिड़ी रार
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका से सबकुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है। पालिका में लिपिकों के बीच भी रार छिड़ी हुई है। अफसरों और चेयरपर्सन के बीच भी विवाद होने की वजह से इसका विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है। इतना ही नहीं लिपिकों की तैनाती, पटल परिवर्तन आदि को लेकर भी मारामारी मची हुई है। अफसरों और पालिका चेयरपर्सन के प्रति लिपिकों की गुटबंदी कोई न कोई बखेड़ा खड़ा करा देती है। कुछ माह पहले चेयरपर्सन के स्टेनो को तहसील में अटैच करने को लेकर विवाद खड़ा हुआ, तो कुछ दिनों बाद ही लिपिक ओमवीर की तैनाती को लेकर हंगामा मचा रहा। अब एक अन्य लिपिक के सिटी मजिस्ट्रेट को जांच के लिए दस्तावेज न दिखाने पर विवाद चल रहा है। इसे लेकर रोजाना कोई न कोई हंगामा रहता है।
केस एक : डीएम सेल्वा कुमारी जे ने चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल के स्टेनो गोपाल त्यागी को करीब चार माह पूर्व तहसील में अटैच कर दिया था। कई दिन तक कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर उनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करा दी गई थी। बाद में गोपाल त्यागी को तहसील में योगदान करना पड़ा। स्टेनो के हटा दिए जाने से चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने अधिकारियों पर पालिका में अनावश्यक हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।
केस दो : नगर पालिका इंटर कॉलेज में तैनात लिपिक ओमवीर सिंह को करीब तीन माह पूर्व ईओ ने जनगणना कार्य में लगा दिया। इस पर चेयरपर्सन नाराज हो गईं। उन्होंने लिपिक को पालिका कार्यालय में बुलाने पर आपत्ति जताई। इस मामले को लेकर भी काफी विवाद रहा था। ईओ और चेयरपर्सन के बीच एक-दूसरे के अधिकार को लेकर कई दिन तक लिखापढ़ी चलती रही थी। ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी ने चेयरपर्सन के अधिकारों तक पर सवाल खड़े कर दिए थे। इसका नतीजा यह हुआ कि लिपिक ओमवीर सिंह को चेयरपर्सन ने निलंबित कर दिया। इसके बावजूद वह अभी भी जनगणना कार्य में लगे हुए हैं।
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केस तीन : बीते सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार नगर पालिका में निरीक्षण को पहुंचे, तो लिपिक मैनपाल ने उन्हें कैशबुक नहीं दिखाई। वह अपना केबिन बंद कर चले गए और बाद में चेयरपर्सन के साथ कार्यालय लौटे। पालिका कार्यालय में चेयरपर्सन और सिटी मजिस्ट्रेट में काफी नोकझोंक भी हुई। डीएम ने भी इस मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ईओ ने लिपिक को सस्पेंड करने के लिए चेयरपर्सन को पत्र भी लिख दिया है।
एक-दूसरे पर लगा रहे आरोप-प्रत्यारोप
पूरे घटनाक्रम को लेकर चेयरपर्सन और सिटी मजिस्ट्रेट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। पालिका चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल का कहना है कि अधिकारी अनावश्यक रूप से पालिका में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिस समय सिटी मजिस्ट्रेट निरीक्षण को आए थे उस समय 14वें वित्त के कार्यों का जोर था। उन्होंने कुछ फोटो स्टेट ले रखी हैं। उन्हें फाइलें देखनी चाहिए थी। उधर, सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार का कहना है कि वह प्रभारी अधिकारी नगर निकाय होने के नाते निरीक्षण को गए थे। लिपिक से कैशबुक मांगी, तो उसने दिखाई नहीं। पालिका के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप का आरोप गलत है।
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मुजफ्फरनगर। नगर पालिका से सबकुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है। पालिका में लिपिकों के बीच भी रार छिड़ी हुई है। अफसरों और चेयरपर्सन के बीच भी विवाद होने की वजह से इसका विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है। इतना ही नहीं लिपिकों की तैनाती, पटल परिवर्तन आदि को लेकर भी मारामारी मची हुई है। अफसरों और पालिका चेयरपर्सन के प्रति लिपिकों की गुटबंदी कोई न कोई बखेड़ा खड़ा करा देती है। कुछ माह पहले चेयरपर्सन के स्टेनो को तहसील में अटैच करने को लेकर विवाद खड़ा हुआ, तो कुछ दिनों बाद ही लिपिक ओमवीर की तैनाती को लेकर हंगामा मचा रहा। अब एक अन्य लिपिक के सिटी मजिस्ट्रेट को जांच के लिए दस्तावेज न दिखाने पर विवाद चल रहा है। इसे लेकर रोजाना कोई न कोई हंगामा रहता है।
केस एक : डीएम सेल्वा कुमारी जे ने चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल के स्टेनो गोपाल त्यागी को करीब चार माह पूर्व तहसील में अटैच कर दिया था। कई दिन तक कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर उनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करा दी गई थी। बाद में गोपाल त्यागी को तहसील में योगदान करना पड़ा। स्टेनो के हटा दिए जाने से चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने अधिकारियों पर पालिका में अनावश्यक हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।
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केस दो : नगर पालिका इंटर कॉलेज में तैनात लिपिक ओमवीर सिंह को करीब तीन माह पूर्व ईओ ने जनगणना कार्य में लगा दिया। इस पर चेयरपर्सन नाराज हो गईं। उन्होंने लिपिक को पालिका कार्यालय में बुलाने पर आपत्ति जताई। इस मामले को लेकर भी काफी विवाद रहा था। ईओ और चेयरपर्सन के बीच एक-दूसरे के अधिकार को लेकर कई दिन तक लिखापढ़ी चलती रही थी। ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी ने चेयरपर्सन के अधिकारों तक पर सवाल खड़े कर दिए थे। इसका नतीजा यह हुआ कि लिपिक ओमवीर सिंह को चेयरपर्सन ने निलंबित कर दिया। इसके बावजूद वह अभी भी जनगणना कार्य में लगे हुए हैं।
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केस तीन : बीते सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार नगर पालिका में निरीक्षण को पहुंचे, तो लिपिक मैनपाल ने उन्हें कैशबुक नहीं दिखाई। वह अपना केबिन बंद कर चले गए और बाद में चेयरपर्सन के साथ कार्यालय लौटे। पालिका कार्यालय में चेयरपर्सन और सिटी मजिस्ट्रेट में काफी नोकझोंक भी हुई। डीएम ने भी इस मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ईओ ने लिपिक को सस्पेंड करने के लिए चेयरपर्सन को पत्र भी लिख दिया है।
एक-दूसरे पर लगा रहे आरोप-प्रत्यारोप
पूरे घटनाक्रम को लेकर चेयरपर्सन और सिटी मजिस्ट्रेट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। पालिका चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल का कहना है कि अधिकारी अनावश्यक रूप से पालिका में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिस समय सिटी मजिस्ट्रेट निरीक्षण को आए थे उस समय 14वें वित्त के कार्यों का जोर था। उन्होंने कुछ फोटो स्टेट ले रखी हैं। उन्हें फाइलें देखनी चाहिए थी। उधर, सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार का कहना है कि वह प्रभारी अधिकारी नगर निकाय होने के नाते निरीक्षण को गए थे। लिपिक से कैशबुक मांगी, तो उसने दिखाई नहीं। पालिका के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप का आरोप गलत है।