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शहर काजी जहीर आलम का निधन
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मुजफ्फरनगर शहर काजी जहीर आलम। (फाइल फोटो)।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
शहर काजी जहीर आलम का इंतकाल
मुजफ्फरनगर। शहर काजी जहीर आलम (90) का लंबी बीमारी के बाद इंतकाल हो गया। करीब छह दशक से शहर काजी के पद पर थे। ईदगाह में जनाजे की नमाज के बाद उनके शव को सुपुर्द-ए खाक किया गया।
शहर के भगत सिंह रोड स्थित सब्जी मंडी निवासी शहर काजी जहीर आलम का शनिवार देर रात करीब दो बजे इंतकाल हो गया। वे काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। देर रात उनकी सेहत बिगड़ने पर उनको अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके इंतकाल की खबर से शोक की लहर छा गई। रविवार सुबह इंतकाल की खबर मिलने पर लोगउनके आवास पर पहुंचकर पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। ईदगाह पर शहर काजी जहीर आलम के जनाजे की नमाज के बाद शहर के शामली रोड स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए खाक किया गया। जनाजे में काफी लोगों ने शिरकत की। जहीर आलम ने नगरपालिका परिषद में भी नौकरी की थी। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने खुद को सामाजिक सरोकार से जोड़ लिया था। हिंदी और अंग्रेजी के साथ ही उर्दू, अरबी व फारसी भाषा का भी उन्हें अच्छा ज्ञान था। वर्ष 1956 में शहर काजी की उपाधि से नवाजे गए थे। उन्हें राज्यपाल ने बाकायदा शहर काजी का सर्टिफिकेट दिया था। वह अपने पिता काजी मोहम्मद यूसुफ के इंतकाल के बाद शहर काजी की इस उपाधि पर पहुंचे थे। मुजफ्फरनगर शहर काजी के रूप में वह अपने कुनबे की चौथी पीढ़ी में बताए जा रहे हैं। करीब छह दशक तक वह इस पद पर रहे। उन्हें लोगों में पोलियो के खिलाफ जागरूकता लाने और इस अभियान को सफल बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से अवार्ड मिला था। उन्होंने 1994 से ही पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान की सफलता के लिए जनपद में मुस्लिम समाज के बीच जागरूकता अभियान चलाए। नुमाइश के आयोजन सहित विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में वह हमेशा आगे रहे। जिले में सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जीवनपर्यंत लगे रहे। उनके जनाजे में मुख्य रूप से शाही इमाम मौलाना जाकिर, मुफ्ती खलीलुर्रहमान, मुफ्ती जुल्फिकार, सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी, गौरव स्वरूप, अलीम सिद्दीकी, पूर्व विधायक अनिल कुमार, जियाउर्रहमान, गौहर सिद्दीकी, कुल्लन देवी, अमीर आजम एडवोकेट सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे और शोक संवेदना व्यक्त की।
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मुजफ्फरनगर। शहर काजी जहीर आलम (90) का लंबी बीमारी के बाद इंतकाल हो गया। करीब छह दशक से शहर काजी के पद पर थे। ईदगाह में जनाजे की नमाज के बाद उनके शव को सुपुर्द-ए खाक किया गया।
शहर के भगत सिंह रोड स्थित सब्जी मंडी निवासी शहर काजी जहीर आलम का शनिवार देर रात करीब दो बजे इंतकाल हो गया। वे काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। देर रात उनकी सेहत बिगड़ने पर उनको अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके इंतकाल की खबर से शोक की लहर छा गई। रविवार सुबह इंतकाल की खबर मिलने पर लोगउनके आवास पर पहुंचकर पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। ईदगाह पर शहर काजी जहीर आलम के जनाजे की नमाज के बाद शहर के शामली रोड स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए खाक किया गया। जनाजे में काफी लोगों ने शिरकत की। जहीर आलम ने नगरपालिका परिषद में भी नौकरी की थी। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने खुद को सामाजिक सरोकार से जोड़ लिया था। हिंदी और अंग्रेजी के साथ ही उर्दू, अरबी व फारसी भाषा का भी उन्हें अच्छा ज्ञान था। वर्ष 1956 में शहर काजी की उपाधि से नवाजे गए थे। उन्हें राज्यपाल ने बाकायदा शहर काजी का सर्टिफिकेट दिया था। वह अपने पिता काजी मोहम्मद यूसुफ के इंतकाल के बाद शहर काजी की इस उपाधि पर पहुंचे थे। मुजफ्फरनगर शहर काजी के रूप में वह अपने कुनबे की चौथी पीढ़ी में बताए जा रहे हैं। करीब छह दशक तक वह इस पद पर रहे। उन्हें लोगों में पोलियो के खिलाफ जागरूकता लाने और इस अभियान को सफल बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से अवार्ड मिला था। उन्होंने 1994 से ही पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान की सफलता के लिए जनपद में मुस्लिम समाज के बीच जागरूकता अभियान चलाए। नुमाइश के आयोजन सहित विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में वह हमेशा आगे रहे। जिले में सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जीवनपर्यंत लगे रहे। उनके जनाजे में मुख्य रूप से शाही इमाम मौलाना जाकिर, मुफ्ती खलीलुर्रहमान, मुफ्ती जुल्फिकार, सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी, गौरव स्वरूप, अलीम सिद्दीकी, पूर्व विधायक अनिल कुमार, जियाउर्रहमान, गौहर सिद्दीकी, कुल्लन देवी, अमीर आजम एडवोकेट सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे और शोक संवेदना व्यक्त की।

नगर के ईदगाह पर शहर काजी जहीर आलम जनाजे में शामिल लोग।।- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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