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अच्छाई के लिए करबला में दी थी जान
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 04 Dec 2015 12:29 AM IST
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मोरना। जौली में चेहल्लुम पर हुई मजलिस में मौलाना अरशद हुसैन ने कहा कि इमाम हुसैन ने करबला में मजलूमों, इंसानियत और अच्छाई की हिमायत करने के लिए अपनी जान दी। इस मौके पर जुलूस के दौरान शिया सोगवारों ने सीनाजनी कर मातम किया।
अंजुमने काजमी सादात जौली की तरफ से मोहल्ला कोट बाजार के इमामबाडे़ में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना अरशद हुसैन ने कहा कि धर्म और इंसानियत के लिए जो अपनी जान की बाजी लगा देते हैं, उनको इमाम हुसैन की तरह याद करते हैं।
इमाम हुसैन की बहन दो साल बाद कैद से रिहा होकर अपने भाई की कबरे मिताहर की जियारत के लिए पहली बार करबला ए मोअल्ला गई। जहां पर अपनों को याद कर रंजोगम से डूबी बहन ने अपनों को याद किया। मजलिस के बाद शिया सोगवारों ने इमामबाड़े से अलम उठाकर जुलूस के दौरान सीनाजनी करते हुए मातम किया। जुलूस अली चौक, हुसैनी चौक, मेन बाजार से होते हुए करबला पहुंचा। पुलिस बल और पीएसी के साथ तैनात रहा।
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अंजुमने काजमी सादात जौली की तरफ से मोहल्ला कोट बाजार के इमामबाडे़ में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना अरशद हुसैन ने कहा कि धर्म और इंसानियत के लिए जो अपनी जान की बाजी लगा देते हैं, उनको इमाम हुसैन की तरह याद करते हैं।
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इमाम हुसैन की बहन दो साल बाद कैद से रिहा होकर अपने भाई की कबरे मिताहर की जियारत के लिए पहली बार करबला ए मोअल्ला गई। जहां पर अपनों को याद कर रंजोगम से डूबी बहन ने अपनों को याद किया। मजलिस के बाद शिया सोगवारों ने इमामबाड़े से अलम उठाकर जुलूस के दौरान सीनाजनी करते हुए मातम किया। जुलूस अली चौक, हुसैनी चौक, मेन बाजार से होते हुए करबला पहुंचा। पुलिस बल और पीएसी के साथ तैनात रहा।
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