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इंजेक्शन लगाते ही भैंस की मौत, हंगामा
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भोकरहेड़ी के पशु चिकित्सालय में भैंस मरने पर हंगामा करते लोग
- फोटो : KHATAULI
मोरना। नीम हकीम खतरा-ए-जान वाली कहावत उस समय चरितार्थ हुई जब भोकरहेड़ी पशु चिकित्सा अधीक्षक की गैर मौजूदगी में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने शुक्रवार को कृत्रिम गर्भाधान कर भैंस को इंजेक्शन लगाया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस पर ग्रामीणों ने मुआवजा, आरोपी कर्मचारी तथा पशु चिकित्सा अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा किया।
ग्रामीणों का आरोप है कि भोकरहेड़ी चिकित्सालय में पशु चिकित्सा अधीक्षक कभी-कभी आते हैं। उनकी गैरमौजूदगी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही पशुओं का उपचार व कृत्रिम गर्भाधान कराता है। भोकरहेड़ी निवासी सुरेंद्र पुत्र रामसिंह भैंस गर्भाधान के लिए लाया। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जयवीर ने कृत्रिम गर्भाधान किया तथा इंजेक्शन लगाया। जिससे चलते भैंस की मौके पर ही मौत हो गई।
इससे नाराज ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। इस पर चिकित्सक रविदीप अस्पताल पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। वहीं, ग्रामीण मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। भोपा थाना प्रभारी सूबे सिंह मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत किया। पुलिस ने भैंस के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। ग्रामीणों ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जयवीर सिंह पर सवाल उठाए वह झल्ला उठा। वह आवेश में आकर बोला कि उनकी जान पर गोशाला बवाल बनकर खड़ी हैं।
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नियमानुसार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को कृत्रिम गर्भाधान करने का अधिकार नहीं है। चिकित्साधिकारी उसकी मदद ले सकता है।-डॉ. वीडी सिंह, तहसील प्रभारी, पशु चिकित्सा, जानसठ
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ग्रामीणों का आरोप है कि भोकरहेड़ी चिकित्सालय में पशु चिकित्सा अधीक्षक कभी-कभी आते हैं। उनकी गैरमौजूदगी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही पशुओं का उपचार व कृत्रिम गर्भाधान कराता है। भोकरहेड़ी निवासी सुरेंद्र पुत्र रामसिंह भैंस गर्भाधान के लिए लाया। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जयवीर ने कृत्रिम गर्भाधान किया तथा इंजेक्शन लगाया। जिससे चलते भैंस की मौके पर ही मौत हो गई।
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इससे नाराज ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। इस पर चिकित्सक रविदीप अस्पताल पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। वहीं, ग्रामीण मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। भोपा थाना प्रभारी सूबे सिंह मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत किया। पुलिस ने भैंस के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। ग्रामीणों ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जयवीर सिंह पर सवाल उठाए वह झल्ला उठा। वह आवेश में आकर बोला कि उनकी जान पर गोशाला बवाल बनकर खड़ी हैं।
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नियमानुसार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को कृत्रिम गर्भाधान करने का अधिकार नहीं है। चिकित्साधिकारी उसकी मदद ले सकता है।-डॉ. वीडी सिंह, तहसील प्रभारी, पशु चिकित्सा, जानसठ