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बुद्ध पूर्णिमा पर गंगा में लगाई डुबकी
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 22 May 2016 01:01 AM IST
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शुक्रताल में प्राचीन वट वृक्ष की पूजा करतीं युवतियां।
- फोटो : अमर उजाला
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धर्मनगरी शुक्रताल में बुद्ध पूर्णिमा पर दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य कमाया। मंदिरों और धर्मशालाओं में शंख, घंटे घड़ियालों और मंत्रोच्चारण गूंजे।
श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे, हर-हर महादेव के जयघोष के साथ गंगा में स्नान किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने जरूरतमंदों को गरीबों को सत्तू और शीतल पेयजल पिलाकर अनाज आदि का दान किया। गुरूकुल संस्कृत महाविद्यालय शुक्रताल के प्रधानाचार्य प्रेम शंकर मिश्रा ने बताया कि आज के दिन यज्ञमान अपने कुल की वृद्धि को लेकर दान करने की प्रथा को निभा रहे हैं, क्योंकि बैसाख माह में दान को उत्तम माना जाता है।
बौद्ध धर्म संचालक महात्मा बुद्ध को आज के दिन सारनाथ में परमात्मा का बोध हुआ था और भगवान के पूर्वम अवतार के रूप में भी बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनायी जाती है। इसके बाद शुकदेव आश्रम में प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा कर श्रद्धालुओं ने अपने परिवार की खुशहाली की मन्नत मांगकर सप्त ऋषि श्रीकृष्ण भगवान के मंदिर के दर्शन किये।
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शिक्षा ऋषि ब्रहमलीन स्वामी कल्याण देव महाराज की समाधि मंदिर के दर्शन कर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रंदाजलि दी। वहीं गणेशधाम, हनुमानधाम, दण्डी आश्रम , शिवधाम, महेश्वरधाम, दुर्गाधाम, पीताम्बरधाम, शनिधाम, नीलकंट धाम, सिद्धपीठधाम, गोडिया मठ धाम, मानव निर्माण आश्रम, सच्चा प्रकाश आश्रम आदि मंदिरों में भगवान के दर्शन कर चल रहे संत्सगों को सुनकर धर्म लाभ कमाया।
इस मौके पर स्वामी ओमानंद सरस्वती महाराज, स्वामी गुस्दत्त महाराज, स्वामी कैश्वानंद महाराज, स्वामी महेश्वर दण्डी महाराज, स्वामी गीतानंद तीर्थ, स्वामी भक्ति भूषण दण्डी महाराज, माता योगनी राजनंदैश्वरी, स्वामी कुलभूषण महाराज, स्वामी गीतानंद गिरी महाराज, स्वामी कृपालदास महाराज, स्वामी महानंद महाराज आदि से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान नगर की गलियों व चौराहों और मुख्य बाजार में मेले जैसा माहौल बना रहा।
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श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे, हर-हर महादेव के जयघोष के साथ गंगा में स्नान किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने जरूरतमंदों को गरीबों को सत्तू और शीतल पेयजल पिलाकर अनाज आदि का दान किया। गुरूकुल संस्कृत महाविद्यालय शुक्रताल के प्रधानाचार्य प्रेम शंकर मिश्रा ने बताया कि आज के दिन यज्ञमान अपने कुल की वृद्धि को लेकर दान करने की प्रथा को निभा रहे हैं, क्योंकि बैसाख माह में दान को उत्तम माना जाता है।
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बौद्ध धर्म संचालक महात्मा बुद्ध को आज के दिन सारनाथ में परमात्मा का बोध हुआ था और भगवान के पूर्वम अवतार के रूप में भी बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनायी जाती है। इसके बाद शुकदेव आश्रम में प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा कर श्रद्धालुओं ने अपने परिवार की खुशहाली की मन्नत मांगकर सप्त ऋषि श्रीकृष्ण भगवान के मंदिर के दर्शन किये।
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शिक्षा ऋषि ब्रहमलीन स्वामी कल्याण देव महाराज की समाधि मंदिर के दर्शन कर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रंदाजलि दी। वहीं गणेशधाम, हनुमानधाम, दण्डी आश्रम , शिवधाम, महेश्वरधाम, दुर्गाधाम, पीताम्बरधाम, शनिधाम, नीलकंट धाम, सिद्धपीठधाम, गोडिया मठ धाम, मानव निर्माण आश्रम, सच्चा प्रकाश आश्रम आदि मंदिरों में भगवान के दर्शन कर चल रहे संत्सगों को सुनकर धर्म लाभ कमाया।
इस मौके पर स्वामी ओमानंद सरस्वती महाराज, स्वामी गुस्दत्त महाराज, स्वामी कैश्वानंद महाराज, स्वामी महेश्वर दण्डी महाराज, स्वामी गीतानंद तीर्थ, स्वामी भक्ति भूषण दण्डी महाराज, माता योगनी राजनंदैश्वरी, स्वामी कुलभूषण महाराज, स्वामी गीतानंद गिरी महाराज, स्वामी कृपालदास महाराज, स्वामी महानंद महाराज आदि से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान नगर की गलियों व चौराहों और मुख्य बाजार में मेले जैसा माहौल बना रहा।