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एक मुस्लिम परिवार ऐसा भी है, जिसकी रोजी-रोटी चलती है हिंदुओं के त्योहार से
ब्यूरो/अमर उजाला,मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 10 Oct 2016 04:17 PM IST
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वहलना गांव में रावण और मेघनाद के पुतले बनाते अली मियां और उनके परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर में अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी को रामलीला में अभिनय से रोकना भले ही बहस का मुद्दा बना हो, लेकिन इसी शहर में एक मुस्लिम परिवार ऐसा भी है जिसकी रोजी-रोटी हिंदुओं के त्योहार से चलती है। इस परिवार की चार पीढ़ियां बीते 72 साल से रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण के पुतले बनाती आ रही हैं।
शहर के अलावा जिले की अधिकांश रामलीलाओं में दशहरा पर्व पर इनके बताए हुए पुतलों का दहन होता है। तीन भाइयों में सबसे बड़े अली मियां का कहना है कि कला को धर्म में नहीं बांटना चाहिए।
बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी को रामलीला में अभिनय करने से रोकने का मामला जिलेभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। दूसरा पहलू यह भी है कि मुस्लिम समाज के कई ऐसे परिवार हैं, जिनकी रोजी-रोटी रामलीला से जुड़ी हुई है।
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ऐसा ही एक परिवार शहर के निकटवर्ती गांव वहलना में है। अली मियां, हसन मियां, हुसैन मियां दशहरा पर रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण के पुतले बनाते हैं। यह इनका पुस्तैनी काम है। परिवार की चार पीढ़ियां बीते 72 साल से पुतले बनाती आ रही हैं। अली मियां बताते हैं कि उनके दादा इतरत हुसैन उर्फ बुंदू ने दशहरा पर्व के लिए रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण के पुतले बनाने शुरू किए थे।
अपने उस्ताद कैय्या से उन्होंने इस हुनर को सीखा और इसे परिवार की रोजी-रोटी का जरिया बनाया। दादा के बाद उसके पिता स्व. फिरोज अली पुतले बनाने में लगे। पिता के साथ तीनों भाई भी बीते कई दशक से पुतले बनाते आ रहे हैं। अब उनकी चौथी पीढ़ी के तौसीफ, मासूम मियां, शुऐब हसन, राहत मियां आदि बच्चे इस हुनर को सीखकर परिवार की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
अली मियां बताते हैं कि वे पंजाब, हरियाणा आदि स्थानों पर भी पुतले बनाते हैं। दशहरा पर्व से करीब डेढ़ माह पहले ही सभी भाई अपना अन्य कार्य छोड़कर पुतले बनाने में जुट जाते हैं। अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी के मामले में उनका कहना है कि कला को धर्म में नहीं बांटना चाहिए। उन्होंने पुतले बनाते समय कभी ऐसा सोचा भी नहीं कि यह हिंदुओं के पर्व का हिस्सा है। बस जुनून के साथ इस काम में जुटे हुए हैं।
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शहर के अलावा जिले की अधिकांश रामलीलाओं में दशहरा पर्व पर इनके बताए हुए पुतलों का दहन होता है। तीन भाइयों में सबसे बड़े अली मियां का कहना है कि कला को धर्म में नहीं बांटना चाहिए।
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बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी को रामलीला में अभिनय करने से रोकने का मामला जिलेभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। दूसरा पहलू यह भी है कि मुस्लिम समाज के कई ऐसे परिवार हैं, जिनकी रोजी-रोटी रामलीला से जुड़ी हुई है।
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ऐसा ही एक परिवार शहर के निकटवर्ती गांव वहलना में है। अली मियां, हसन मियां, हुसैन मियां दशहरा पर रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण के पुतले बनाते हैं। यह इनका पुस्तैनी काम है। परिवार की चार पीढ़ियां बीते 72 साल से पुतले बनाती आ रही हैं। अली मियां बताते हैं कि उनके दादा इतरत हुसैन उर्फ बुंदू ने दशहरा पर्व के लिए रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण के पुतले बनाने शुरू किए थे।
अपने उस्ताद कैय्या से उन्होंने इस हुनर को सीखा और इसे परिवार की रोजी-रोटी का जरिया बनाया। दादा के बाद उसके पिता स्व. फिरोज अली पुतले बनाने में लगे। पिता के साथ तीनों भाई भी बीते कई दशक से पुतले बनाते आ रहे हैं। अब उनकी चौथी पीढ़ी के तौसीफ, मासूम मियां, शुऐब हसन, राहत मियां आदि बच्चे इस हुनर को सीखकर परिवार की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
अली मियां बताते हैं कि वे पंजाब, हरियाणा आदि स्थानों पर भी पुतले बनाते हैं। दशहरा पर्व से करीब डेढ़ माह पहले ही सभी भाई अपना अन्य कार्य छोड़कर पुतले बनाने में जुट जाते हैं। अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी के मामले में उनका कहना है कि कला को धर्म में नहीं बांटना चाहिए। उन्होंने पुतले बनाते समय कभी ऐसा सोचा भी नहीं कि यह हिंदुओं के पर्व का हिस्सा है। बस जुनून के साथ इस काम में जुटे हुए हैं।