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Muzaffarnagar News: तनावग्रस्त बच्चों व लोगों से दोस्ताना व्यवहार करें, अकेला ना छोड़े
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मंसूरपुर। मेरा वजूद फाउंडेशन के तत्वावधान में ‘आत्महत्या रोकथाम दिवस पर छात्र-छात्राओं को सशक्त और जागरूक करने के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि तनावग्रस्त बच्चों और लोगों से दोस्ताना व्यवहार करें।
होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज जड़ौदा में शुभारंभ मनोचिकित्सक डॉक्टर ममता अग्रवाल, डॉक्टर राजीव कुमार सदस्य बाल कल्याण समिति, संजय आहूजा सफलता प्रशिक्षक, योगेश त्यागी एवं प्रवेन्द्र दहिया चैयरमेन, प्रबंधक संजीव राठी, मेरा वजूद फाउंडेशन द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
मुख्य वक्ता डॉक्टर ममता अग्रवाल ने विद्यार्थियों को बताया कि हमेशा सकारात्मक सोच रखें, नकारात्मक विचार अपने मन में आने ना दें। प्रत्येक वर्ष 25 से 29 वर्ष के लगभग 60 लाख आदमी सुसाइड करते हैं। जो कि बहुत बडा आंकड़ा है और 280 मिलियन लोग तनाव में हैं और हर साल यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।
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जब हमें या बच्चों को नकारात्मक सोच घेर लेती है और हम हताशा में आत्महत्या करने की सोचने लगते हैं, अगर उस वक्त उस हताश व्यक्ति को सही सकारात्मक मार्गदर्शन मिल जाए, तो एक जिंदगी को बचाया जा सकता है। जो प्रत्येक सभ्य नागरिक का कर्तव्य है, हमें अपने चारों ओर एक सकारात्मक सोच-विचारों का सकारात्मक वातावरण तैयार करना होगा और अपने आसपास के सगे-सम्बन्धियों व बच्चों का भी ध्यान रखना होगा, कहीं वे तनाव में तो नहीं है, अगर ऐसी स्थिति है तो उनके साथ दोस्ताना व्यवहार करना चाहिए व उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। उनसे प्रेम से बात करते हुए उनके साथ सकारात्मक व उत्साहवर्धक बातें करनी चाहिए।
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होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज जड़ौदा में शुभारंभ मनोचिकित्सक डॉक्टर ममता अग्रवाल, डॉक्टर राजीव कुमार सदस्य बाल कल्याण समिति, संजय आहूजा सफलता प्रशिक्षक, योगेश त्यागी एवं प्रवेन्द्र दहिया चैयरमेन, प्रबंधक संजीव राठी, मेरा वजूद फाउंडेशन द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
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मुख्य वक्ता डॉक्टर ममता अग्रवाल ने विद्यार्थियों को बताया कि हमेशा सकारात्मक सोच रखें, नकारात्मक विचार अपने मन में आने ना दें। प्रत्येक वर्ष 25 से 29 वर्ष के लगभग 60 लाख आदमी सुसाइड करते हैं। जो कि बहुत बडा आंकड़ा है और 280 मिलियन लोग तनाव में हैं और हर साल यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।
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जब हमें या बच्चों को नकारात्मक सोच घेर लेती है और हम हताशा में आत्महत्या करने की सोचने लगते हैं, अगर उस वक्त उस हताश व्यक्ति को सही सकारात्मक मार्गदर्शन मिल जाए, तो एक जिंदगी को बचाया जा सकता है। जो प्रत्येक सभ्य नागरिक का कर्तव्य है, हमें अपने चारों ओर एक सकारात्मक सोच-विचारों का सकारात्मक वातावरण तैयार करना होगा और अपने आसपास के सगे-सम्बन्धियों व बच्चों का भी ध्यान रखना होगा, कहीं वे तनाव में तो नहीं है, अगर ऐसी स्थिति है तो उनके साथ दोस्ताना व्यवहार करना चाहिए व उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। उनसे प्रेम से बात करते हुए उनके साथ सकारात्मक व उत्साहवर्धक बातें करनी चाहिए।