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Muzaffarnagar News: 32 साल पुराने धौलड़ी कांड में आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
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पुलिस को बदमाश समझकर ग्रामीणों ने लाइसेंसी हथियारों से की थी फायरिंग
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। तितावी थाना क्षेत्र के 32 साल पुराने चर्चित धौलड़ी कांड में हाईकोर्ट से स्टे हटते ही सुनवाई शुरू हो गई है। पुलिसकर्मी की हत्या, जानलेवा हमले और बलवे के 75 वर्षीय आरोपी ने जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया। अपर सत्र न्यायालय संख्या सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परविंद्र सिंह ने बताया कि धौलड़ी कांड पर हाईकोर्ट से चल रहा स्टे हटा गया है। सीबीसीआईडी की जांच में आरोपी बनाए गए जसोई गांव निवासी जगलेश कुमार (75) ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया था, जिसे खारिज कर आरोपी को जेल भेज दिया गया था। मंगलवार को बचाव पक्ष ने अपर सत्र न्यायालय संख्या में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया, जिससे खारिज कर दिया गया है।
ये था धौलड़ी कांड
करीब 32 साल पहले 16 जुलाई 1991 को पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव धौलड़ी के सुदेश कुम्हार दूधिया के घर रात के समय बदमाश डकैती डालने आएंगे। गोपनीय सूचना के आधार पर सिविल वर्दी में पुलिस गांव पहुंच गई। उधर, ग्रामीणों ने रात के समय पुलिस को बदमाश समझकर लाइसेंसी हथियारों से फायरिंग कर दी थी। गोली लगने से हेड कांस्टेबल हरेंद्र की मौत हो गई थी, जबकि कांस्टेबल रामभूल सिंह और जवाहर सिंह घायल हो गए थे। वादी कुंवरपाल वर्मा ने धौलड़ी के आरोपी नेपाल, जसबीर, हरबीर और तेजपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। सीबीसीआईडी की जांच में जसोई के जगलेश कुमार का नाम भी सामने आया था। इस प्रकरण में हाईकोर्ट से सुनवाई पर स्टे चल रहा था।
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भाकियू ने दिया था धरना, सरकार को करना पड़ा था हस्तक्षेप
चर्चित धौलड़ी कांड़ में तत्कालीन भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की अगुवाई में कई दिन तक धरना चला था। भाकियू का कहना था कि ग्रामीणों की गलती नहीं है, सादी वर्दी में सिपाही आए थे। ग्रामीणों ने कोई गोली नहीं चलाई। अदालत में बचाव पक्ष ने कहा कि टिकैत के धरने के दौरान ही प्रशासन ने कहा था कि ग्रामीणों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। तितावी थाना क्षेत्र के 32 साल पुराने चर्चित धौलड़ी कांड में हाईकोर्ट से स्टे हटते ही सुनवाई शुरू हो गई है। पुलिसकर्मी की हत्या, जानलेवा हमले और बलवे के 75 वर्षीय आरोपी ने जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया। अपर सत्र न्यायालय संख्या सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परविंद्र सिंह ने बताया कि धौलड़ी कांड पर हाईकोर्ट से चल रहा स्टे हटा गया है। सीबीसीआईडी की जांच में आरोपी बनाए गए जसोई गांव निवासी जगलेश कुमार (75) ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया था, जिसे खारिज कर आरोपी को जेल भेज दिया गया था। मंगलवार को बचाव पक्ष ने अपर सत्र न्यायालय संख्या में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया, जिससे खारिज कर दिया गया है।
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ये था धौलड़ी कांड
करीब 32 साल पहले 16 जुलाई 1991 को पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव धौलड़ी के सुदेश कुम्हार दूधिया के घर रात के समय बदमाश डकैती डालने आएंगे। गोपनीय सूचना के आधार पर सिविल वर्दी में पुलिस गांव पहुंच गई। उधर, ग्रामीणों ने रात के समय पुलिस को बदमाश समझकर लाइसेंसी हथियारों से फायरिंग कर दी थी। गोली लगने से हेड कांस्टेबल हरेंद्र की मौत हो गई थी, जबकि कांस्टेबल रामभूल सिंह और जवाहर सिंह घायल हो गए थे। वादी कुंवरपाल वर्मा ने धौलड़ी के आरोपी नेपाल, जसबीर, हरबीर और तेजपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। सीबीसीआईडी की जांच में जसोई के जगलेश कुमार का नाम भी सामने आया था। इस प्रकरण में हाईकोर्ट से सुनवाई पर स्टे चल रहा था।
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भाकियू ने दिया था धरना, सरकार को करना पड़ा था हस्तक्षेप
चर्चित धौलड़ी कांड़ में तत्कालीन भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की अगुवाई में कई दिन तक धरना चला था। भाकियू का कहना था कि ग्रामीणों की गलती नहीं है, सादी वर्दी में सिपाही आए थे। ग्रामीणों ने कोई गोली नहीं चलाई। अदालत में बचाव पक्ष ने कहा कि टिकैत के धरने के दौरान ही प्रशासन ने कहा था कि ग्रामीणों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।