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फफक पड़े बाबा, बिलख उठी मां, महिमा को याद कर भर आईं लोगों की आंखें
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 19 Feb 2017 11:50 PM IST
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महिमा को श्रद्धांजलि देते भाई, मां और बाबा।
- फोटो : अमर उजाला
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महिमा की मौत से परिवार के सदस्यों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा है। उसकी मां बिटिया की मौत से उबर नहीं पाई है। बिटिया की मां संजू देवी मनहूस घड़ी को याद कर बिलख पड़ी। शोकसभा में सर्वसमाज के बीच पीड़ित परिवार ने दुख की घड़ी में संघर्ष का सहारा बनने के लिए कृतज्ञता जताई। बिटिया महिमा के बाबा रामस्वरूप फफक पड़े तो अक्षय ने उन्हें संभाला।
परिवार ने अपनी लाडली बेटी को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। शहर आर्य समाज में हुई शोकसभा में पीड़ित परिवार भी शामिल हुआ। शामली निवासी रामस्वरूप अपनी पौत्री महिमा की याद में फफक पड़े। पौत्र अक्षय ने उन्हें सहारा दिया। पुष्पांजलि के क्षण उस वक्त मार्मिक हो गए, जब महिमा की मां संजू देवी और अन्य महिलाओं की आंखों में आंसू छलक आए। एक दूसरे को सभी ने ढांढस बंधाया।
छोटे भाई अमित को नहीं मालूम की बहन महिमा अब कभी नहीं लौटेगी। नन्हे हाथों से भाई ने बहन के चित्र पर फूल चढ़ाए। बिटिया के मामा ऋषिपाल ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम था कि लूट की यह घटना उनकी भांजी की जान की जिम्मेदार बनेगी। इससे पूर्व, सुबह नई मंडी श्मशान घाट पर महिमा के अस्थियां चुनी गई। पुलिस सुरक्षा में उसके बाबा और अन्य रिश्तेदार शुक्रताल में अस्थियां विसर्जित की।
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बेटी की अस्थियां चुनने भी नहीं पहुंचा पिता
मुजफ्फरनगर। आरोपियों से भयभीत पिता देव प्रकाश पुत्री की शोकसभा में भी शामिल नहीं हो पाया। दुर्भाग्य की बात है कि अंतिम संस्कार के बाद परिवार ने अस्थियां चुनने में उसके फर्ज का निर्वाह खुद ही किया। बाबा रामस्वरूप और भाई अक्षय ने सभी रस्में पूरी की। पिता क्यों नहीं आया, इसको लेकर शोकसभा में कई सवाल उठे।
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परिवार ने अपनी लाडली बेटी को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। शहर आर्य समाज में हुई शोकसभा में पीड़ित परिवार भी शामिल हुआ। शामली निवासी रामस्वरूप अपनी पौत्री महिमा की याद में फफक पड़े। पौत्र अक्षय ने उन्हें सहारा दिया। पुष्पांजलि के क्षण उस वक्त मार्मिक हो गए, जब महिमा की मां संजू देवी और अन्य महिलाओं की आंखों में आंसू छलक आए। एक दूसरे को सभी ने ढांढस बंधाया।
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छोटे भाई अमित को नहीं मालूम की बहन महिमा अब कभी नहीं लौटेगी। नन्हे हाथों से भाई ने बहन के चित्र पर फूल चढ़ाए। बिटिया के मामा ऋषिपाल ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम था कि लूट की यह घटना उनकी भांजी की जान की जिम्मेदार बनेगी। इससे पूर्व, सुबह नई मंडी श्मशान घाट पर महिमा के अस्थियां चुनी गई। पुलिस सुरक्षा में उसके बाबा और अन्य रिश्तेदार शुक्रताल में अस्थियां विसर्जित की।
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बेटी की अस्थियां चुनने भी नहीं पहुंचा पिता
मुजफ्फरनगर। आरोपियों से भयभीत पिता देव प्रकाश पुत्री की शोकसभा में भी शामिल नहीं हो पाया। दुर्भाग्य की बात है कि अंतिम संस्कार के बाद परिवार ने अस्थियां चुनने में उसके फर्ज का निर्वाह खुद ही किया। बाबा रामस्वरूप और भाई अक्षय ने सभी रस्में पूरी की। पिता क्यों नहीं आया, इसको लेकर शोकसभा में कई सवाल उठे।