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धर्म विरुद्ध आचरण से बचें : गुरुदत्त
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- दतियाना गांव में आर्य समाज के वार्षिकोत्सव का शुभारंभ
- ऋषि दयानंद के सिद्धांतों और आदर्शों को अपनाएं युवा पीढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि धर्म विरुद्ध आचरण से बचिये, तभी जीवन सुखमय होगा। जो अधर्म करेगा, उसका पत्तन निश्चित है।
गांव दतियाना में आर्य समाज के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव का शुभारंभ यज्ञ से हुआ। आमंत्रित विद्वान आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि धर्म विरुद्ध आचरण करने वाला दुर्गति को प्राप्त होता है। दुष्कर्मों का पाप जिस दिन फूटेगा, सब नाश हो जाएगा। सत्य और पवित्र आचरण से जीवन श्रेष्ठ बनेगा। आचरणहीन को वेद भी पवित्र नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद के सिद्धांतों, आदर्शों और उपदेशों से देश की युवा पीढ़ी जोड़िए, तभी राष्ट्र सशक्त बनेगा। असहाय, गरीब, निर्बल को जो सतायेगा, वो भी पाप का भागी बनेगा। दया, सेवा, परोपकार, त्याग और ईमानदारी ही सनातन संस्कृति है।
भजनोपदेशक सहदेव सिंह बेधड़क ने भजनों के माध्यम से समाज सुधार के लिए ऋषि दयानंद की महत्ता बताई। भजनोपदेशक ब्रह्मनन्द आर्य और सुकीर्ति आर्य ने भी प्रेरक भजन सुनाए। वार्षिकोत्सव में ढोलक वादक हरीश पाल को अंग वस्त्र और सम्मान राशि भेंट कर सम्मानित किया गया। संयोजक राजकुमार आर्य, भोपाल सिंह आर्य, गंगा राम आर्य ने अतिथियों का आभार जताया। यज्ञमान सत्यवीर आर्य सपत्निक रहे। आनंद पाल सिंह आर्य, सोमपाल सिंह, राजेंद्र सिंह आर्य, डॉ. मोहर सिंह आर्य, डॉ. सहेंद्र सिंह, शांता प्रकाश आर्य, धर्म मुनि, दीपचंद आर्य आदि मौजूद रहे।
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- ऋषि दयानंद के सिद्धांतों और आदर्शों को अपनाएं युवा पीढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि धर्म विरुद्ध आचरण से बचिये, तभी जीवन सुखमय होगा। जो अधर्म करेगा, उसका पत्तन निश्चित है।
गांव दतियाना में आर्य समाज के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव का शुभारंभ यज्ञ से हुआ। आमंत्रित विद्वान आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि धर्म विरुद्ध आचरण करने वाला दुर्गति को प्राप्त होता है। दुष्कर्मों का पाप जिस दिन फूटेगा, सब नाश हो जाएगा। सत्य और पवित्र आचरण से जीवन श्रेष्ठ बनेगा। आचरणहीन को वेद भी पवित्र नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद के सिद्धांतों, आदर्शों और उपदेशों से देश की युवा पीढ़ी जोड़िए, तभी राष्ट्र सशक्त बनेगा। असहाय, गरीब, निर्बल को जो सतायेगा, वो भी पाप का भागी बनेगा। दया, सेवा, परोपकार, त्याग और ईमानदारी ही सनातन संस्कृति है।
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भजनोपदेशक सहदेव सिंह बेधड़क ने भजनों के माध्यम से समाज सुधार के लिए ऋषि दयानंद की महत्ता बताई। भजनोपदेशक ब्रह्मनन्द आर्य और सुकीर्ति आर्य ने भी प्रेरक भजन सुनाए। वार्षिकोत्सव में ढोलक वादक हरीश पाल को अंग वस्त्र और सम्मान राशि भेंट कर सम्मानित किया गया। संयोजक राजकुमार आर्य, भोपाल सिंह आर्य, गंगा राम आर्य ने अतिथियों का आभार जताया। यज्ञमान सत्यवीर आर्य सपत्निक रहे। आनंद पाल सिंह आर्य, सोमपाल सिंह, राजेंद्र सिंह आर्य, डॉ. मोहर सिंह आर्य, डॉ. सहेंद्र सिंह, शांता प्रकाश आर्य, धर्म मुनि, दीपचंद आर्य आदि मौजूद रहे।
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