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Muzaffarnagar News: एक्यूआई 267 पहुंचा, सेहत बिगाड़ रही हवा
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मुजफ्फरनगर। सर्दी की दस्तक के साथ हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी है। भले ही पराली जलाए जाने का एक भी मामला नहीं पकड़ा गया हो, लेकिन इस वक्त जिले में हवा की सेहत सही नहीं है। चार दिन में एयर क्वालिटी इंडेक्स 170 से 267 पर पहुंच गया है। रविवार को अक्तूबर माह में हवा की गुणवत्ता सबसे ज्यादा खराब रिकॉर्ड की गई। पिछले चार दिन के आंकड़े चौंकने वाले हैं। रोजाना हवा की सेहत खराब होने से सांस की बीमारियां बढ़ने का खतरा है। साथ ही आंखों में जलन की स्थिति पैदा हो सकती है।
मानकों को ताक पर रखकर चल रहे निर्माण कार्य बड़ी वजह है। सामग्री को खुले में डाला जा रहा है। हाईवे से लेकर शहर में जितने कार्य चल रहे हैं, अधिकतर पर नियमों का पाल नहीं है। इसके अलावा उद्योगों के संचालन में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। धूल के कण हवा में तैरते रहते हैं, जिससे हवा सांस लेने लायक नहीं रहती।
सांस के रोगियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। अस्थमा और टीबी के मरीजों के लिए ऐसी हवा बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार कहते हैं कि खराब हवा के समय अगर जरूरी है, तभी घर से निकलें। मॉस्क का प्रयोग करें। सांस के रोगी सुबह और शाम की हवा में बाहर घूमने से बचाव करें। आंखों को बचाने के लिए चश्मे का प्रयोग जरूरी है।
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मानकों को ताक पर रखकर चल रहे निर्माण कार्य बड़ी वजह है। सामग्री को खुले में डाला जा रहा है। हाईवे से लेकर शहर में जितने कार्य चल रहे हैं, अधिकतर पर नियमों का पाल नहीं है। इसके अलावा उद्योगों के संचालन में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। धूल के कण हवा में तैरते रहते हैं, जिससे हवा सांस लेने लायक नहीं रहती।
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सांस के रोगियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। अस्थमा और टीबी के मरीजों के लिए ऐसी हवा बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार कहते हैं कि खराब हवा के समय अगर जरूरी है, तभी घर से निकलें। मॉस्क का प्रयोग करें। सांस के रोगी सुबह और शाम की हवा में बाहर घूमने से बचाव करें। आंखों को बचाने के लिए चश्मे का प्रयोग जरूरी है।
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