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अपराजिता : पुलिस की पाठशाला में पुलिसिंग के साथ दिए कामयाबी के सूत्र

Wed, 24 Apr 2019 11:52 PM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Published by: Deepak Kausik Updated Wed, 24 Apr 2019 11:52 PM IST
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Aparajita: Police ki pathashala  in Muzaffarnagar
पुलिस की पाठशाला को संबोधित करते सीओ सिटी। - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला के अभियान अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत कूकड़ा स्थित जीसी पब्लिक स्कूल में पुलिस की पाठशाला का आयोजन किया गया। एसपी देहात आलोक शर्मा ने छात्र-छात्राओं को अपनी जिज्ञासु प्रवृत्ति को बनाए रखने की प्रेरणा दी। अनेक उदाहरण के जरिये बेहतर जीवन जीने का तरीका समझाया। वहीं, सीओ सिटी हरीश सिंह भदौरिया ने पुलिस के कार्यों और यातायात के नियम बताए। छात्र-छात्राओं से इन नियमों का पालन करने और अपने अभिभावकों को प्रेरित करने के लिए कहा।
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बुधवार को जीसी पब्लिक स्कूल सीनियर विंग में आयोजित पुलिस की पाठशाला में संस्था प्रबंधक विनोद कुमार संगल, महेशचंद गर्ग तथा नवीन कुमार ने एसपी देहात आलोक शर्मा एवं सीओ सिटी हरीश सिंह भदौरिया का बुकें देकर स्वागत किया गया। एसपी देहात ने कहा कि कोई भी काम बिना विचारे न करें। पुरानी परिपाटी को त्यागकर अपने विवेक से परिभाषाएं तैयार करें।
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उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर कहा कि इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर में महिलाओं की प्रतिभागिता बढ़ाने की आवश्यकता है। पुलिस सहित अन्य आर्म्स फोर्स में महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण के अनेक उदाहरण दिए। पुलिसिंग की जानकारी देते हुए कहा कि नियमों को सब जानते हैं, लेकिन जरूरत उनका पालन कराने की है। इसलिए खुद के साथ अपने परिजनों को भी नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करें।
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पुलिस सहायक है और परेशानियों से बचाती है
मुजफ्फरनगर। सीओ सिटी हरीश सिंह भदौरिया ने कहा कि केवल वर्दी पहनना ही पुलिसिंग नहीं है। जो गलत काम करने से रोके वही पुलिस है। जिम्मेदार नागरिक समाज को सही दिशा में ले जाते हैं। पुलिस इसमें सहायता करती है। उन्होंने यातायात नियमों की जानकारी देते हुए कहा कि जानते हुए भी लोग इनका पालन नहीं करते। यदि नियमों का पालन हो तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या को कम किया जा सकता है। उन्होंने डायल-100, महिला हेल्पलाइन 1090 की जानकारी देते हुए बताया कि जब भी जरूरत हो तो तुरंत पुलिस की सहायता लें।

शिक्षिकाओं ने भरे संकल्प पत्र
मुजफ्फरनगर। अमर उजाला के अभियान अपराजिता के तहत जीसी पब्लिक स्कूल में आयोजित पुलिस पाठशाला में शिक्षिकाओं और छात्राओं ने संकल्पपत्र भरे। उन्होंने नारी गरिमा को अक्षुण्ण रखने की शपथ ली। शिक्षिका एसके भीम, ऋतु जैन, आकांक्षा शर्मा, प्रतिभा गुप्ता, रुचि गुप्ता, रश्मि पालिवाल, हिमांशी गुप्ता, प्रिया धीमान, हर्षिता गुप्ता, वैदिका रावत, दीप्ति शर्मा, प्रज्ञा शर्मा, लता गुप्ता, अंजू गुप्ता, हरदीप कौर आदि ने महिलाओं के सम्मान की रक्षा का संकल्प लिया।

पुलिस को लेकर समाज में नकारात्मक छवि है, लेकिन पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम से मेरी यह सोच बदली है। समझ में आया है कि पुलिस से डरने के बजाय खुलकर अपनी समस्या बतानी चाहिए - तुषार, छात्र।

दसवीं के बाद छात्र-छात्राएं बेहतर करियर को लेकर उधेड़बुन में रहते हैं। मेरा मानना है कि उस क्षेत्र को चुने जिसमें आपकी रुचि है। क्योंकि रुचि के अनुसार करियर चुनने से बेहतर परिणाम आते हैं - प्रणव, छात्र।

पुलिस की पाठशाला से उन्हें पुलिस को जानने का तो अवसर मिला ही। साथ ही करियर और महिला सशक्तिकरण की भी जानकारी मिली। आज का अनुभव प्रेरणाप्रद रहा है - राज, छात्र।

छात्राओं ने किए सवाल...

छेड़छाड़ की घटनाओं के संबंध में शिकायत कैसे करें?
- निहारिका, छात्रा।
एसपी: महिलाओं की सहायता के लिए महिला हेल्पलाइन संचालित है। 1090 हेल्पलाइन पर शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा डायल-100 पर शिकायत करें तो तुरंत पुलिस मौके पर पहुंचती है।

पुलिस एवं अन्य सुरक्षा बलों में महिलाओं की स्थिति क्या है?
- विभू त्यागी, छात्रा।
एसपी: बड़ी संख्या में महिलाओं की पुलिस में भर्ती हुई है। अन्य आर्म्स फोर्स में भी महिलाएं अपनी सेवाएं दे रही हैं। देश सेवा का जज्बा रखने वाली लड़कियों को इस क्षेत्र में आना चाहिए।

यातायात व्यवस्था को कैसे सुदृढ़ किया जा सकता है?
- मंशा शर्मा, छात्रा।
एसपी: सब यातायात नियमों से वाकिफ हैं। जब तक समाज में जागरूकता नहीं आएगी तब तक यातायात व्यवस्था को सही नहीं किया जा सकता। केवल पुलिस के डर से इस दिशा में सुधार संभव नहीं।


समाज से अपराध को कैसे कम किया जा सकता है?
- उर्वशी, छात्रा।
एसपी:-जहां सद्बुद्धि है वहां सुख, शांति है और जहां कुबुद्धि होती है वहां अनेक विपत्तियां होती हैं। समाज की सोच बदलेगी, तभी अपराध कम होंगे।

छात्र-छात्राओं के लिए पुलिस की पाठशाला मार्गदर्शन का बेहतर मंच है। उन्हें पुलिस को समझने का मौका मिलता है। साथ ही विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का भी समाधान होता है।
- आजादवीर, प्रधानाचार्य।
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