{"_id":"61a9085afba5fa05fe6f8799","slug":"anger-among-farmers-due-to-house-arrest-of-farmer-leaders-devband-news-mrt5673171180","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसान नेताओं को घरों में नजरबंद करने से किसानों में आक्रोश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसान नेताओं को घरों में नजरबंद करने से किसानों में आक्रोश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवबंद (सहारनपुर)। पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि सरकार के निर्देश पर देवबंद पुलिस ने बृहस्पतिवार को किसान नेताओं को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया। पुलिस प्रशासन का उक्त कृत्य बेहद निंदनीय है।
गंगदासपुर जट्ट में घर में नजरबंद किसान नेता भगत सिंह वर्मा ने कहा कि क्षेत्र के किसान पुवांरका में आयोजित केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैली में जाकर उन्हें बकाया गन्ना मूल्य भुगतान समेत अपनी मांगों से अवगत कराना चाहते थे, लेकिन शासन के निर्देश पर प्रशासन ने उन्हें घरों में ही नजरबंद कर वहां जाने से रोक दिया। वर्मा ने कहा सरकार ने प्रदेश की चीनी मिलों से विगत वर्षों का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान और उस पर लगा ब्याज दिलाने देरी की। किसानों की 600 रुपये क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग भी पूरी नहीं की। बिजली और डीजल, पेट्रोल व गैस के दाम करने की बजाए और बढ़ा दिए। इस प्रकार की समस्याओं से किसान गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को अवगत कराना चाहते थे। सरकार ने पुलिस का इस्तेमाल कर अन्नदाता किसानों की आवाज दबाने का काम किया। उन्होंने कहा सरकार किसानों, मजदूरों व गरीबों जनता का जितना शोषण करेगी भाजपा को 2022 के विधानसभा चुनाव में उतना ही नुकसान उठाना पडे़गा। वर्मा ने बताया कि उनके अलावा पुलिस ने पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री आसिम मलिक को भी उनके घर नजरबंद कर दिया।
विज्ञापन
गंगदासपुर जट्ट में घर में नजरबंद किसान नेता भगत सिंह वर्मा ने कहा कि क्षेत्र के किसान पुवांरका में आयोजित केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैली में जाकर उन्हें बकाया गन्ना मूल्य भुगतान समेत अपनी मांगों से अवगत कराना चाहते थे, लेकिन शासन के निर्देश पर प्रशासन ने उन्हें घरों में ही नजरबंद कर वहां जाने से रोक दिया। वर्मा ने कहा सरकार ने प्रदेश की चीनी मिलों से विगत वर्षों का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान और उस पर लगा ब्याज दिलाने देरी की। किसानों की 600 रुपये क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग भी पूरी नहीं की। बिजली और डीजल, पेट्रोल व गैस के दाम करने की बजाए और बढ़ा दिए। इस प्रकार की समस्याओं से किसान गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को अवगत कराना चाहते थे। सरकार ने पुलिस का इस्तेमाल कर अन्नदाता किसानों की आवाज दबाने का काम किया। उन्होंने कहा सरकार किसानों, मजदूरों व गरीबों जनता का जितना शोषण करेगी भाजपा को 2022 के विधानसभा चुनाव में उतना ही नुकसान उठाना पडे़गा। वर्मा ने बताया कि उनके अलावा पुलिस ने पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री आसिम मलिक को भी उनके घर नजरबंद कर दिया।
विज्ञापन