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चार घंटे एंबुलेंस का इंतजार करते रहे जच्चा-बच्चा
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 03 Nov 2016 12:07 AM IST
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महिला अस्पताल में सड़क पर लेटे जच्चा और बच्चा।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश सरकार की तमाम एंबुलेंस सेवा के बावजूद डिलीवरी के बाद एक महिला को चार घंटे तक नवजात शिशु के साथ अस्पताल के बाहर इंतजार करना पड़ा। महिला सीएमएस से शिकायत करने के बाद भी किसी ने पीड़ा नहीं सुनी। आखिरकार गरीब परिवार को टेंपो में महिला और नवजात शिशु को घर ले जाना पड़ा।
प्रदेश सरकार का यह प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाओं की डिलीवरी अस्पताल में हो, जिससे उन्हें डिलीवरी के दौरान जोखिम से बचाया जा सके। सरकार बच्चे को जन्म देने वाली महिला को प्रोत्साहन स्वरूप 1500 रुपये भी देती है। गर्भवती महिला को अस्पताल तक लाने और डिलीवरी के बाद घर छोड़ने की जिम्मेदारी 102 एंबुलेंस की है। मंगलवार रात जानसठ क्षेत्र के जंधेड़ी गांव की उमा कश्यप को जिला महिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था।
रात में 11 बजकर 40 मिनट पर उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। दिन में 12 बजे अस्पताल से उसकी छुट्टी कर दी गई। छुट्टी का पर्चा उमा के पति राजकुमार कश्यप ने 102 एंबुलेंस को जमा कर दिया। उसे कहा गया कि दो बजे तक उनका नंबर आ जाएगा। महिला अस्पताल के बाहर ही लेट गई। दो बजे जब एंबुलेंस के लिए गए तो कहा कि अभी इंतजार करो। इस तरह चार बजे तक ये लोग नवजात शिशु के साथ अस्पताल के बाहर ही पड़े रहे।
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इसी बीच सीएमएस अमिता गर्ग से भी मिले। उन्होंने एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने की बात कही। परेशान होकर गरीब परिवार ने जंधेड़ी गांव तक टेंपों किया। किसी तरह वह अपने गांव पहुंचे। जबकि नियम यह है कि डिलीवरी के बाद महिला और बच्चे को घर पहुंचाने की जिम्मेदारी विभाग की है। इतना जरुर होता है कि किसी क्षेत्र के दो बच्चे हैं तो दोनों बच्चों को एंबुलेंस एक साथ ले जाती है। मुख्यमंत्री एक तरफ गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ देने के लिए योजनाएं चला रहे हैं, दूसरी तरफ गरीब आदमी सरकारी सिस्टम का शिकार हो रहा है।
अधिक डिलीवरी के कारण आई परेशानी
सीएमएस डॉ अमिता गर्ग का कहना है कि बुधवार को डिलीवरी के बाद 40 महिलाओं की छुट्टी हुई। इस कारण थोड़ी परेशानी आई। दूसरे साथ आने वाले लोगों को जल्दी रहती है। बिना एंबुलेंस मिले छुट्टी के बाद भी बेड नहीं छोड़ना चाहिए था।
लिखित में शिकायत मिली तो कार्रवाई होगी
सीएमओ डॉ सुबोध कुमार का कहना है कि हमारे पास 102 एंबुलेंस की कोई कमी नहीं है। सूचना के बाद भी यदि मरीज को घर तक नहीं छोड़ा गया तो यह गंभीर मामला है। डिलीवरी के बाद जच्चा और बच्चा दोनों को उनके घर छोड़ने की जिम्मेदारी 102 एंबुलेंस की है। पीड़ित परिवार लिखित में शिकायत करे तो कार्रवाई होगी।
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प्रदेश सरकार का यह प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाओं की डिलीवरी अस्पताल में हो, जिससे उन्हें डिलीवरी के दौरान जोखिम से बचाया जा सके। सरकार बच्चे को जन्म देने वाली महिला को प्रोत्साहन स्वरूप 1500 रुपये भी देती है। गर्भवती महिला को अस्पताल तक लाने और डिलीवरी के बाद घर छोड़ने की जिम्मेदारी 102 एंबुलेंस की है। मंगलवार रात जानसठ क्षेत्र के जंधेड़ी गांव की उमा कश्यप को जिला महिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था।
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रात में 11 बजकर 40 मिनट पर उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। दिन में 12 बजे अस्पताल से उसकी छुट्टी कर दी गई। छुट्टी का पर्चा उमा के पति राजकुमार कश्यप ने 102 एंबुलेंस को जमा कर दिया। उसे कहा गया कि दो बजे तक उनका नंबर आ जाएगा। महिला अस्पताल के बाहर ही लेट गई। दो बजे जब एंबुलेंस के लिए गए तो कहा कि अभी इंतजार करो। इस तरह चार बजे तक ये लोग नवजात शिशु के साथ अस्पताल के बाहर ही पड़े रहे।
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इसी बीच सीएमएस अमिता गर्ग से भी मिले। उन्होंने एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने की बात कही। परेशान होकर गरीब परिवार ने जंधेड़ी गांव तक टेंपों किया। किसी तरह वह अपने गांव पहुंचे। जबकि नियम यह है कि डिलीवरी के बाद महिला और बच्चे को घर पहुंचाने की जिम्मेदारी विभाग की है। इतना जरुर होता है कि किसी क्षेत्र के दो बच्चे हैं तो दोनों बच्चों को एंबुलेंस एक साथ ले जाती है। मुख्यमंत्री एक तरफ गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ देने के लिए योजनाएं चला रहे हैं, दूसरी तरफ गरीब आदमी सरकारी सिस्टम का शिकार हो रहा है।
अधिक डिलीवरी के कारण आई परेशानी
सीएमएस डॉ अमिता गर्ग का कहना है कि बुधवार को डिलीवरी के बाद 40 महिलाओं की छुट्टी हुई। इस कारण थोड़ी परेशानी आई। दूसरे साथ आने वाले लोगों को जल्दी रहती है। बिना एंबुलेंस मिले छुट्टी के बाद भी बेड नहीं छोड़ना चाहिए था।
लिखित में शिकायत मिली तो कार्रवाई होगी
सीएमओ डॉ सुबोध कुमार का कहना है कि हमारे पास 102 एंबुलेंस की कोई कमी नहीं है। सूचना के बाद भी यदि मरीज को घर तक नहीं छोड़ा गया तो यह गंभीर मामला है। डिलीवरी के बाद जच्चा और बच्चा दोनों को उनके घर छोड़ने की जिम्मेदारी 102 एंबुलेंस की है। पीड़ित परिवार लिखित में शिकायत करे तो कार्रवाई होगी।