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मेरा एक हाथ नहीं रहा : आजम
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 21 Aug 2015 01:05 AM IST
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मुजफ्फरनगर। नगर विकास राज्यमंत्री आजम खां ने कहा कि चितरंजन स्वरूप उनके भाई की तरह थे। उनके रहते विभाग में उन्हें कोई चिंता नहीं रहती थी। चितरंजन के जाने से उनका एक हाथ चला गया। यह एक ऐसी कमी है, जिसे पूरी नहीं किया जा सकेगा।
चितरंजन स्वरूप की अंतिम यात्रा में शामिल होने आए गमजदा आजम खां का कहना था कि उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि चितरंजन स्वरूप ऐसे बीच में छोड़कर चले जाएंगे। लंबे समय तक उनके साथ काम किया, उन्हें भुलाया नहीं जा सकेगा। वह हमेशा गरीबों को लेकर चिंतित रहते थे। उनके निधन से ऐसा लगता है कि उनका एक हाथ नहीं रहा। वह एक नेक दिल इंसान थे।
उनका आचरण ऐसा था कि हर किसी को अपना बना लेते थे। मैने जब उनकी मृत्यु के बारे में सुना तो मुझे झटका लगा। आजम खां ने बताया कि वह हमेशा उनके सामने गरीबों की समस्याओं को लेकर आते थे। मुजफ्फरनगर जिले की समस्याओं को लेकर चिंतित रहते थे। शहर के विकास के लिए हमेशा उनके मन में कुछ न कुछ योजनाएं चलती रहती थीं।
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उनका व्यवहार ऐसा था कि उनके आग्रह को कभी टाल नहीं सकता था। चितरंजन जैसे राजनीतिज्ञ इस समय बहुत कम हैं। वह ऐसे नेता थे जिनके यहां किसी जाति और धर्म का कोई भेदभाव नहीं था। उनके पास सभी धर्मों और सभी जाति के लोग आते थे और उन पर विश्वास करते थे। ऐसे व्यवहार कुशल, नेकदिल और भाईचारे के लिए काम करने वाले व्यक्ति की कमी को हम पूरा नहीं कर पाएंगे।
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चितरंजन स्वरूप की अंतिम यात्रा में शामिल होने आए गमजदा आजम खां का कहना था कि उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि चितरंजन स्वरूप ऐसे बीच में छोड़कर चले जाएंगे। लंबे समय तक उनके साथ काम किया, उन्हें भुलाया नहीं जा सकेगा। वह हमेशा गरीबों को लेकर चिंतित रहते थे। उनके निधन से ऐसा लगता है कि उनका एक हाथ नहीं रहा। वह एक नेक दिल इंसान थे।
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उनका आचरण ऐसा था कि हर किसी को अपना बना लेते थे। मैने जब उनकी मृत्यु के बारे में सुना तो मुझे झटका लगा। आजम खां ने बताया कि वह हमेशा उनके सामने गरीबों की समस्याओं को लेकर आते थे। मुजफ्फरनगर जिले की समस्याओं को लेकर चिंतित रहते थे। शहर के विकास के लिए हमेशा उनके मन में कुछ न कुछ योजनाएं चलती रहती थीं।
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उनका व्यवहार ऐसा था कि उनके आग्रह को कभी टाल नहीं सकता था। चितरंजन जैसे राजनीतिज्ञ इस समय बहुत कम हैं। वह ऐसे नेता थे जिनके यहां किसी जाति और धर्म का कोई भेदभाव नहीं था। उनके पास सभी धर्मों और सभी जाति के लोग आते थे और उन पर विश्वास करते थे। ऐसे व्यवहार कुशल, नेकदिल और भाईचारे के लिए काम करने वाले व्यक्ति की कमी को हम पूरा नहीं कर पाएंगे।