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दंगा पीड़ितों के घरों में बनेंगे शौचालय
Muzaffar nagar
Updated Thu, 23 Oct 2014 05:31 AM IST
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मुजफ्फरनगर। दंगे के बाद अपना गांव छोड़कर अन्य स्थानों पर बसे पीड़ितों को शौचालय बनाकर दिया जाएगा। सामाजिक संस्था ‘अभिनव’ ने इसका बीड़ा उठाया है। जिला प्रशासन ऐसे परिवारों का सर्वे कराकर संस्था को दे रहा है, जिनके पास शौचालय नहीं है।
पिछले वर्ष हुए दंगे के बाद जिले में पचास हजार से अधिक लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। इनमें से अधिकतम लोग ऐसे हैं, जो अपने घर नहीं लौटे, जहां आसरा मिला वहीं रहने लगे। कुछ दंगा पीड़ितों के लिए कई संगठनों ने कॉलोनियां बनवाकर दी। दंगा पीड़ितों को लगातार समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। सामाजिक संस्था अभिनव ने यह बीड़ा उठाया है कि उन परिवारों में शौचालय बनाकर दिए जाएं, जिनके यहां शौचालय नहीं है। इसके लिए संस्था ने जिला प्रशासन से भी सहयोग लिया है। जिला प्रशासन ने कई स्थानों का सर्वे कराकर संस्था को दे दिया है। कुछ का सर्वे कराया जा रहा है। एडीएम प्रशासन डॉ इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि सर्वे का काम तेजी से कराया जा रहा है।
पीड़ितों से नहीं लिया जाएगा पैसा
मुजफ्फरनगर। संस्था अभिनव के डायरेक्टर हरेंद्र सिंह का कहना है कि जिन लोगों को शौचालय बनाकर दिया जा रहा है, उनसे कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। पैसे की व्यवस्था संस्था स्वयं करेगी। 2200 दंगा पीड़ित परिवार के नाम उनके पास आ गए हैं, जिनके घरों में शौचालय बनने हैं।
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पिछले वर्ष हुए दंगे के बाद जिले में पचास हजार से अधिक लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। इनमें से अधिकतम लोग ऐसे हैं, जो अपने घर नहीं लौटे, जहां आसरा मिला वहीं रहने लगे। कुछ दंगा पीड़ितों के लिए कई संगठनों ने कॉलोनियां बनवाकर दी। दंगा पीड़ितों को लगातार समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। सामाजिक संस्था अभिनव ने यह बीड़ा उठाया है कि उन परिवारों में शौचालय बनाकर दिए जाएं, जिनके यहां शौचालय नहीं है। इसके लिए संस्था ने जिला प्रशासन से भी सहयोग लिया है। जिला प्रशासन ने कई स्थानों का सर्वे कराकर संस्था को दे दिया है। कुछ का सर्वे कराया जा रहा है। एडीएम प्रशासन डॉ इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि सर्वे का काम तेजी से कराया जा रहा है।
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पीड़ितों से नहीं लिया जाएगा पैसा
मुजफ्फरनगर। संस्था अभिनव के डायरेक्टर हरेंद्र सिंह का कहना है कि जिन लोगों को शौचालय बनाकर दिया जा रहा है, उनसे कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। पैसे की व्यवस्था संस्था स्वयं करेगी। 2200 दंगा पीड़ित परिवार के नाम उनके पास आ गए हैं, जिनके घरों में शौचालय बनने हैं।
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