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कहीं मंदे में न चली जाए चीनी

Mon, 20 Oct 2014 05:31 AM IST
Muzaffar nagar
Muzaffar nagar Updated Mon, 20 Oct 2014 05:31 AM IST
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शामली। किसानों का बकाया गन्ना भुगतान देनेे के लिए प्रशासन ने मिलों की चीनी कुर्क करने के बाद उसे नीलाम करने की तिथि घोषित कर दी है। इससे चीनी मिलों की बेचैनी बढ़ गई है। उन्हें चिंता है कि कहीं मंदे में उनकी चीनी न चली जाए। इसलिए शुगर मिलों ने भी अपने शेष चीनी का स्टॉक बेचने के लिए खरीदारों की तलाश शुरू कर दी है।
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कोर्ट के आदेशानुसार जिलाधिकारियों को चीनी मिलों से बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान 31 अक्तूबर तक किसानों को कराना है, लेकिन मिलों की भुगतान की प्रक्रिया देख ऐसा संभव नहीं लग रहा था। इसलिए डीएम ने एक अक्तूबर को शामली और थानाभवन मिल के अफसरों की बैठक कर चार सप्ताह में बकाया भुगतान की चार किश्तें तय की थी। लेकिन, निर्धारित की गई पहली ही किश्त का भुगतान मिलें नहीं सकी। लिहाजा डीएम ने 14 अक्तूबर को शामली शुगर मिल की एक लाख 17 हजार 650 कुंतल और थानाभवन मिल की 75 हजार कुंतल चीनी कुर्क करा दी। कुर्क की गई चीनी की 20 अक्तूबर को नीलामी की डेट भी निकाल दी गई। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद चीनी मिलों में खलबली मच गई।
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मिलों को चिंता है कि कहीं उनकी चीनी कम रेट में न चली जाए, लिहाजा उन्होंने गोदाम में बची अपनी शेष चीनी को बेचने के लिए खरीदारों की तलाश कर दी है। वह इस प्रयास में हैं कि स्टॉक में जमा चीनी को जल्द से जल्द सही कीमत पर बेचकर 20 अक्तूबर को होने वाली नीलामी रुकवाई जा सके।
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शामली शुगर मिल के यूनिट हेड एस सेन शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपनी करीब एक लाख क्विंटल चीनी का सौदा किया है, जिसकी कीमत करीब साढ़े 29 करोड़ के आसपास बैठती है। यह डील लगभग फाइनल हो चुकी है। उधर, थानाभवन शुगर मिल के वेस्ट यूपी के मीडिया प्रभारी राजीव धीरज ने बताया कि उनकी कंपनी ने थानाभवन शुगर मिल की 75 हजार क्विंटल चीनी बेचने के लिए खरीदारों से निविदाएं मांगी है। ।
जिला गन्नाधिकारी ने बताया कि प्रशासन ने चीनी की नीलामी के लिए एसडीएम शामली के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है। उसकी देखरेख में ही नीलामी कार्रवाई होगी।

हमें तो किसानों के भुगतान से मतलब है
शामली। नीलामी कमेटी के प्रभारी एसडीएम शामली रामौतार गुप्ता ने बताया कि प्रशासन को 31 अक्तूबर तक किसानों का बकाया भुगतान कराना है। बुधवार तक शामली मिल पर करीब 49 करोड़ और थानाभवन पर 26 करोड़ बकाया था। इसलिए प्रशासन को तो भुगतान से मतलब है। मिल चाहे अपना शेष चीनी स्टॉक बेचे या अन्य संसाधनों से किसानों का भुगतान करे।
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