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डायरिया से नवजात शिशुओं समेत तीन की मौत
Muzaffar nagar
Updated Fri, 23 May 2014 05:31 AM IST
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कांधला(शामली)। जिले में संक्रामक बीमारियों के पांव पसार लेने के कारण लोगों में दहशत का माहौल है। डायरिया की चपेट में आकर गंगेरू में दो जुड़वा नवजात शिशुओं और मलकपुर में भी एक बच्चे की मौत हो गई। मासूमों की मौत से परिवार के सदस्यों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा है। गमगीन माहौल में तीनों के शव को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
थाना क्षेत्र के गांव गंगेरू निवासी चौधरी उर्फ काला के यहां बीते सप्ताह दो जुड़वा बच्चों ने जन्म लिया था। पैदा होने के बाद से ही बच्चों की तबियत खराब चल रही थी। परिजनों के मुताबिक दोनों बुखार और डायरिया की चपेट में थे। बुधवार की रात एक बच्चे की मौत हो गई। दूसरे बच्चे की भी बृहस्पतिवार को मौत हो गई। घर में एक साथ दोनों जुड़वा बच्चों की मौत से कोहराम मच गया। परिजनों ने बताया कि वह निजी चिकित्सकों से इलाज करा रहे थे, लेकिन बच्चों की जान नहीं बच सकी। दूसरी ओर, क्षेत्र के गांव मलकपुर निवासी नौशाद की तीन वर्षीय पुत्री शबाना पिछले कई दिनों से बुखार और उल्टी दस्त से पीड़ित चल रही थी। परिजन बच्चे का गांव के ही एक निजी डॉक्टर के यहां इलाज करा रहे थे। गुरुवार को बच्ची की हालत बिगड़ गई। परिजनों ने बताया कि बच्ची को कस्बे के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। गमगीन माहौल में परिवार के सदस्यों ने तीनाें बच्चों के शव को सुपुर्द- ए -खाक कर दिया। उधर, चिकित्सा अधीक्षक डाक्टर रमेश चंद्रा का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया है। गांवाें में टीमें भेजकर कैंप भी कराए जा रहे हैं। डायरिया से बचने के लिए ग्रामीणों को सुझाव भी दिए जा रहे हैं।
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थाना क्षेत्र के गांव गंगेरू निवासी चौधरी उर्फ काला के यहां बीते सप्ताह दो जुड़वा बच्चों ने जन्म लिया था। पैदा होने के बाद से ही बच्चों की तबियत खराब चल रही थी। परिजनों के मुताबिक दोनों बुखार और डायरिया की चपेट में थे। बुधवार की रात एक बच्चे की मौत हो गई। दूसरे बच्चे की भी बृहस्पतिवार को मौत हो गई। घर में एक साथ दोनों जुड़वा बच्चों की मौत से कोहराम मच गया। परिजनों ने बताया कि वह निजी चिकित्सकों से इलाज करा रहे थे, लेकिन बच्चों की जान नहीं बच सकी। दूसरी ओर, क्षेत्र के गांव मलकपुर निवासी नौशाद की तीन वर्षीय पुत्री शबाना पिछले कई दिनों से बुखार और उल्टी दस्त से पीड़ित चल रही थी। परिजन बच्चे का गांव के ही एक निजी डॉक्टर के यहां इलाज करा रहे थे। गुरुवार को बच्ची की हालत बिगड़ गई। परिजनों ने बताया कि बच्ची को कस्बे के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। गमगीन माहौल में परिवार के सदस्यों ने तीनाें बच्चों के शव को सुपुर्द- ए -खाक कर दिया। उधर, चिकित्सा अधीक्षक डाक्टर रमेश चंद्रा का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया है। गांवाें में टीमें भेजकर कैंप भी कराए जा रहे हैं। डायरिया से बचने के लिए ग्रामीणों को सुझाव भी दिए जा रहे हैं।
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