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यहां तो थाने के सामने भी ढाबों पर काम करते हैं मासूम

Thu, 29 Aug 2013 05:35 AM IST
Muzaffar nagar
Muzaffar nagar Updated Thu, 29 Aug 2013 05:35 AM IST
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शामली। जंग लगी व्यवस्था के कारण पढ़ाई लिखाई के उम्र में बच्चे अपना बचपन बर्बाद करने को विवश हैं। गरीबी से तंग बच्चों को पेट पालने के सिवा कुछ नहीं दिखता। काफी तादाद में बच्चे स्कूल तक का मुंह तक नहीं देख पाते। ढाबे पर बच्चे की हत्या केवल एक बानगी है। हजारों बच्चे गरीबी की मार से त्रस्त होकर रोजी-रोटी की जुगाड़ में कहीं न कहीं काम करते ही हैं। श्रम विभाग कभी कदार अभियान चलाकर अपने कर्तव्यों का इतिश्री कर लेते हैं।
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शहर के ढाबे पर काम करने वाले मासूम बच्चे नीरज की हत्या के बाद श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। देश में 14 साल से कम उम्र के बच्चों के काम करने पर कानूनन पाबंदी है। हालांकि घर की माली हालत ठीक नहीं होने के कारण न जाने कितने परिवारों के बच्चों का जीवन किसी फैक्ट्री. ईट भट्ठों और ढाबों पर व्यतीत होता है। थानों के सामने ही चलने वाले ढाबों पर मासूम काम करते हैं। अमर उजाला ने कई ढाबे और होटलों में काम करने वाले बच्चों को अपने कैमरे में कैद किया। शामली कोतवाली के निकट एक ढाबे पर काम करने वाले दो बच्चे एक टंकी पर बैठे झूठे बर्तन साफ कर रहे थे। दोनों बर्तन साफ करने के साथ एक दूसरे से बात करने लगे, तभी सामने ढाबे से आवाज आई अबे जल्दी करो, बर्तन लाओ। बच्चे सहम गए और बस हो गया।
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दिल्ली बस स्टैंड के निकट एक चाय की दुकान पर मुश्किल से दस साल का बच्चा चाय के बर्तन धो रहा था। कैमरे में फ ोटो खिंचते ही वह कुछ मुस्कुराते हुए बोला मेरे फोटो का क्या करोगे? टीम आगे चली और बुढ़ाना रोड पहुुंची। यहां चाय की ठेली पर 14 साल का बच्चा बैठा बर्तन धो रहा था, तभी एक ग्राहक आया और बोला चल बई एक कड़क सी चाय पिलाओ, बच्चा उठा और काम में लग गया। अजंता चौक पर एक ढाबे पर 10-11 साल का बच्चा ग्राहकों को खाना खिलाने में व्यस्त था।
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क्या कर रहा शिक्षा विभाग
शामली। बेसिक शिक्षा विभाग सर्वशिक्षा अभियान के तहत जिलेभर में सर्वे कराकर होटल, ढाबों या भट्ठों पर काम करने वालों को चिह्नित कर उन्हें स्कूल भेजने की व्यवस्था करता है। बच्चों का स्कूलों में नामांकन किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद भी बच्चे काम करने को मजबूर हैं। इससे विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।

अभी जिले में नया हूं
शामली। श्रम प्रवर्तन अधिकारी परमानंद ने कहा कि वह जिले में नए आए हैं। उनसे पहले भी यहां इस पर काम नहीं हुआ है। उन्होंने इस संबंध में सहायक श्रमायुक्त से अनुरोध कि या है कि वह भी जनपद में आकर इस संबंध में निरीक्षण करें। जिलाधिकारी ने सहायक श्रमायुक्त सहारनपुर मंडल को सप्ताह में एक दिन शामली में बैठने के लिए कहा है, जिसके बाद प्रत्येक मंगलवार को वह जिले में बैठेंगी। दुकानों की चेकिंग भी होगी।
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