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जिले को ओडीएफ में शामिल करना चुनौती
Updated Sat, 08 Jul 2017 01:11 AM IST
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जिले को ओडीएफ में शामिल करना चुनौती
मुजफ्फरनगर। प्रदेश सरकार ने यूपी के सभी जिलों को 31 दिसंबर तक खुले में शौच से मुक्त करने की घोषणा की है। जिले में निर्धारित समय में समस्त 498 गांवों को ओडीएफ में शामिल करना प्रशासन के लिए एक चुनौती बना हुआ है। अब तक तमाम प्रयासों के बाद भी केवल 131 ग्राम प्रधान ही यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने अपने गांवों को खुले में शौच से मुक्त कर दिया है।
भारत सरकार ने देश के सभी गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने का अभियान चलाया है। इसी कड़ी में जिले में भी अभियान को गति दी जा रही है। इससे पहले कांग्रेस सरकार में निर्मल गांव योजना चलाई हुई थी। इस योजना में भी जिले के कई ग्राम प्रधान सम्मानित हुए। केंद्र में भाजपा सरकार को तीन साल हो चुके हैं। जिले के समस्त 498 ग्रामों में अभी तक योजना का प्रचार भी नहीं हो पाया है। केवल 417 गांवों में ही ट्रिंगरिंग का कार्य हो पाया है। तीन माह पहले गंगा किनारे के गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के अभियान में जिला प्रशासन ने 14 गांवों को ओडीएफ में शामिल करने का दावा किया था।
जिले में अब तक 131 ग्राम प्रधान यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने अपने गांव को खुले में शौच से मुक्त कर दिया है। इनमें पुरकाजी ब्लाक के 14 गांव, सदर के 14, बघरा ब्लाक के 12, चरथावल के आठ, बुढ़ाना के पांच, शाहपुर के 11, खतौली के 31, जानसठ के 19 और मोरना ब्लाक के 17 गांव हैं।
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केंद्र की है सीधी नजर
अभियान की सफलता को केंद्र सरकार ने टाटा ट्रस्ट की आयुषी भारद्वाज को स्वच्छ भारत अभियान का जिला प्रेरक बनाया है। वह टीम के साथ लोगों को गांव-गांव जाकर जागरूक करने का अभियान चलाएगी। प्रत्येक ब्लाक पर दो ब्लाक मोटीवेटर, नौ कंप्यूटर ऑपरेटर, तीन डीपीसी और एक लेखाकार को अभियान में अलग से नियुक्त किया गया है।
3.30 बजे छोड़ना होगा बिस्तर
गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए जब तक अफसर गांवों में डेरा नहीं डालेंगे तब तक सफलता नहीं मिल सकती। जिला स्तर के अफसरों को सुबह साढे़ तीन बजे अपना बिस्तर छोड़कर गांवों की ओर कूच करना होगा, जो लोग अभी भी जंगल जा रहे हैं उन्हें समझाना होगा। गांवों में सुबह चार से पांच बजे के बीच ही लोग शौच के लिए जाते हैं। शामली जिले को जो सफलता मिली, उसका राज यही था कि अफसर चार बजे गांवों में पहुंच जाते थे। ग्रामीणों को एकत्र कर उन्हें समझाते थे।
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मुजफ्फरनगर। प्रदेश सरकार ने यूपी के सभी जिलों को 31 दिसंबर तक खुले में शौच से मुक्त करने की घोषणा की है। जिले में निर्धारित समय में समस्त 498 गांवों को ओडीएफ में शामिल करना प्रशासन के लिए एक चुनौती बना हुआ है। अब तक तमाम प्रयासों के बाद भी केवल 131 ग्राम प्रधान ही यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने अपने गांवों को खुले में शौच से मुक्त कर दिया है।
भारत सरकार ने देश के सभी गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने का अभियान चलाया है। इसी कड़ी में जिले में भी अभियान को गति दी जा रही है। इससे पहले कांग्रेस सरकार में निर्मल गांव योजना चलाई हुई थी। इस योजना में भी जिले के कई ग्राम प्रधान सम्मानित हुए। केंद्र में भाजपा सरकार को तीन साल हो चुके हैं। जिले के समस्त 498 ग्रामों में अभी तक योजना का प्रचार भी नहीं हो पाया है। केवल 417 गांवों में ही ट्रिंगरिंग का कार्य हो पाया है। तीन माह पहले गंगा किनारे के गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के अभियान में जिला प्रशासन ने 14 गांवों को ओडीएफ में शामिल करने का दावा किया था।
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जिले में अब तक 131 ग्राम प्रधान यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने अपने गांव को खुले में शौच से मुक्त कर दिया है। इनमें पुरकाजी ब्लाक के 14 गांव, सदर के 14, बघरा ब्लाक के 12, चरथावल के आठ, बुढ़ाना के पांच, शाहपुर के 11, खतौली के 31, जानसठ के 19 और मोरना ब्लाक के 17 गांव हैं।
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केंद्र की है सीधी नजर
अभियान की सफलता को केंद्र सरकार ने टाटा ट्रस्ट की आयुषी भारद्वाज को स्वच्छ भारत अभियान का जिला प्रेरक बनाया है। वह टीम के साथ लोगों को गांव-गांव जाकर जागरूक करने का अभियान चलाएगी। प्रत्येक ब्लाक पर दो ब्लाक मोटीवेटर, नौ कंप्यूटर ऑपरेटर, तीन डीपीसी और एक लेखाकार को अभियान में अलग से नियुक्त किया गया है।
3.30 बजे छोड़ना होगा बिस्तर
गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए जब तक अफसर गांवों में डेरा नहीं डालेंगे तब तक सफलता नहीं मिल सकती। जिला स्तर के अफसरों को सुबह साढे़ तीन बजे अपना बिस्तर छोड़कर गांवों की ओर कूच करना होगा, जो लोग अभी भी जंगल जा रहे हैं उन्हें समझाना होगा। गांवों में सुबह चार से पांच बजे के बीच ही लोग शौच के लिए जाते हैं। शामली जिले को जो सफलता मिली, उसका राज यही था कि अफसर चार बजे गांवों में पहुंच जाते थे। ग्रामीणों को एकत्र कर उन्हें समझाते थे।