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तालीम का दामन छोडने वाली कौम अंधकार में पहुंची: कश्मीरी
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तालीम का दामन छोड़ने वाली कौम अंधकार में पहुंची: कश्मीरी
देवबंद (सहारनपुर)। मदरसा दारुल उलूम फारुकिया में वार्षिक समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें छात्रों की दस्तारबंदी की गई, साथ ही उन्हें पुरस्कारों का वितरण भी किया गया। इस दौरान संस्था की वार्षिक रिपोर्ट भी पेश की गई।
रविवार को ईदगाह मार्ग पर स्थित दारुल उलूम फारुकिया में आयोजित हुए कार्यक्रम की शुरुआत छात्र मो. शाबान की नात-ए-पाक से हुई। इस अवसर पर दारुल उलूम के उस्ताद मौलाना मो. खिजर अहमद कश्मीरी ने कहा कि कुरआन-ए-करीम मानव जाति के लिए मार्गदर्शक है। आज मुसलमानों ने कुरआन की शिक्षाओं पर अमल करना छोड़ दिया, इसलिए तरह तरह की परेशानियों ने उन्हें घेरा हुआ है। बेहद अफसोस की बात है कि जिस कौम की शुरुआत तालीम से हुई, आज वो कौम तालीमी क्षेत्र में पिछड़ी हुई है। उन्होंने सभी से अपने बच्चों को शिक्षित करने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना हकीम सैय्यद मुर्करम हुसैन संसारपुरी ने कहा कि जिसमें कुरआन की शिक्षाओं के मुताबिक जीवन गुजारा अल्लाह उस पर रहमत बरसाता है और वो दुनिया व आखिरत में कामयाबी हासिल करता है। संस्था के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी ने कहा कि मजहब के बारे में जानकारी न होने के चलते हम पाप के भागीदार बन जाते हैं। जिसका हमें अहसास तक नहीं होता। इसलिए सभी को चाहिए कि वह मजहब की जानकारी हासिल कर और सही राह पर चलते हुए दूसरों को भी इसके बारे में बताए ताकि वह गलत कामों से बच सकें। उन्होंने छात्रों से ईमानदारी, मेहनत और लगन के साथ तालीम हासिल करने का आह्वान किया। इस दौरान शिक्षा प्रभारी की ओर से संस्था की वार्षिक रिपोर्ट पेश की गई। कार्यक्रम में अतिथियों ने छात्र तौफीक अररिया, मो. इमरोज मधीपुरा, गाजी नवाज, साकिब संत कबीर नगरी, मो. अफरोज बिहार, तारिक अनवर बिहार, मो. तैय्यब मुजफ्फरनगरी, नफीस आलम किशनगंजी, मो. शुमाइल दरभंगा बिहार, शान आलम इमलिया की दस्तारबंदी की गई। इस दौरान छात्रों को पुरस्कारों का वितरण भी किया गया। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी, जमालुद्दीन, मौलाना असलम काजमी, अब्दुल मन्नान, मुफ्ती आदिल, मौलाना वलीउल्लाह, फजलुर्रहमान नूर, इमदादुल्लाह नूर, मौलाना वलीउल्लाह, मुफ्ती इफ्तेखार, मो. मोहसिन आदि मौजूद रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। मदरसा दारुल उलूम फारुकिया में वार्षिक समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें छात्रों की दस्तारबंदी की गई, साथ ही उन्हें पुरस्कारों का वितरण भी किया गया। इस दौरान संस्था की वार्षिक रिपोर्ट भी पेश की गई।
रविवार को ईदगाह मार्ग पर स्थित दारुल उलूम फारुकिया में आयोजित हुए कार्यक्रम की शुरुआत छात्र मो. शाबान की नात-ए-पाक से हुई। इस अवसर पर दारुल उलूम के उस्ताद मौलाना मो. खिजर अहमद कश्मीरी ने कहा कि कुरआन-ए-करीम मानव जाति के लिए मार्गदर्शक है। आज मुसलमानों ने कुरआन की शिक्षाओं पर अमल करना छोड़ दिया, इसलिए तरह तरह की परेशानियों ने उन्हें घेरा हुआ है। बेहद अफसोस की बात है कि जिस कौम की शुरुआत तालीम से हुई, आज वो कौम तालीमी क्षेत्र में पिछड़ी हुई है। उन्होंने सभी से अपने बच्चों को शिक्षित करने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना हकीम सैय्यद मुर्करम हुसैन संसारपुरी ने कहा कि जिसमें कुरआन की शिक्षाओं के मुताबिक जीवन गुजारा अल्लाह उस पर रहमत बरसाता है और वो दुनिया व आखिरत में कामयाबी हासिल करता है। संस्था के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी ने कहा कि मजहब के बारे में जानकारी न होने के चलते हम पाप के भागीदार बन जाते हैं। जिसका हमें अहसास तक नहीं होता। इसलिए सभी को चाहिए कि वह मजहब की जानकारी हासिल कर और सही राह पर चलते हुए दूसरों को भी इसके बारे में बताए ताकि वह गलत कामों से बच सकें। उन्होंने छात्रों से ईमानदारी, मेहनत और लगन के साथ तालीम हासिल करने का आह्वान किया। इस दौरान शिक्षा प्रभारी की ओर से संस्था की वार्षिक रिपोर्ट पेश की गई। कार्यक्रम में अतिथियों ने छात्र तौफीक अररिया, मो. इमरोज मधीपुरा, गाजी नवाज, साकिब संत कबीर नगरी, मो. अफरोज बिहार, तारिक अनवर बिहार, मो. तैय्यब मुजफ्फरनगरी, नफीस आलम किशनगंजी, मो. शुमाइल दरभंगा बिहार, शान आलम इमलिया की दस्तारबंदी की गई। इस दौरान छात्रों को पुरस्कारों का वितरण भी किया गया। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी, जमालुद्दीन, मौलाना असलम काजमी, अब्दुल मन्नान, मुफ्ती आदिल, मौलाना वलीउल्लाह, फजलुर्रहमान नूर, इमदादुल्लाह नूर, मौलाना वलीउल्लाह, मुफ्ती इफ्तेखार, मो. मोहसिन आदि मौजूद रहे।
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