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स्टाफ की कमी से जूझ रहा स्वास्थ्य विभाग, 31 लाख की आबादी पर 59 डॉक्टर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 10 Apr 2017 11:37 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बड़े पैमाने पर चिकित्सकीय फैकल्टी की कमी जाहिर की है। जनपद में भी मेडिकल स्टाफ का बुरा हाल है। यहां 31 लाख की आबादी पर 59 चिकित्सक तैनात हैं। इनमें से 12 चिकित्सक जिला मुख्यालय पर तैनात है। जिनमें सीएमओ, एसीएमओ समेत अन्य चिकित्सकीय अधिकारी शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कुल पद 867 के सापेक्ष केवल 404 लोगों का स्टाफ है।
जनपद में मेडिकल स्टाफ के मामले में स्वास्थ्य विभाग की हालत पतली है। बात चिकित्सकों की करें तो उपलब्धता में आधे भी तैनात नहीं हैं। जनपद में करीब 142 चिकित्सक चाहिए, जबकि मात्र 72 मौजूद हैं। इनमें भी छह चिकित्सक अवकाश पर हैं, जबकि पांच चिकित्सक पीजी (पोस्ट ग्रेजुएशन) कोर्स करने के लिए बाहर हैं। जनपद में कुल 59 चिकित्सकों की तैनाती है। विडंबना यह है कि जिला मुख्यालय पर सीएमओ, एसीएमओ के साथ 12 लोगों का चिकित्सकीय स्टाफ मौजूद है।
10 सीएचसी और चार पीएचसी के लिए 47 चिकित्सक उपलब्ध हैं। पैरा मेडिकल समेत अन्य स्टाफ के जनपद में 867 पद हैं, जिनके सापेक्ष केवल 404 लोगों के भरोसे कार्य चल रहा है। जनपद की आबादी 3109731 है। जिसमें 1641803 पुरुष हैं, जबकि 1467928 महिलाएं हैं। इनती बड़ी आबादी पर स्वास्थ्य महकमे की गर्मी में मरीजों की बढ़ने वाली संख्या और उसके इलाज को लेकर चिंता सता रही है। सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा ने बताया कि जनपद ही नहीं प्रदेश भर में चिकित्सकों की कमी है। शासन स्तर पर इन्हें पूरा करने के लिए पहल हो रही है।
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डेढ़ लाख पर सीएचसी, 50 हजार पर पीएचसी
सरकार ने लोगों को सस्ता और बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए मानक रखे हैं। इसमें हर क्षेत्र में डेढ़ लाख की आबादी पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और 50 हजार की आबादी पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) रखी गई है। सीएचसी पर जनरल सर्जन, फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट, स्त्री रोग चिकित्सक, लैब टेक्नीशियन, एक्सरे चिकित्सक, डेंटल, फार्मेसिस्ट में एक-एक चिकित्सक की तैनाती होती है। साथ ही एक स्टॉफ नर्स, वार्ड ब्वाय, वार्ड आया भी एक-एक तैनात रहते हैं। पीएचसी पर दो चिकित्सक तैनात रखे जाते हैं।
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जनपद में मेडिकल स्टाफ के मामले में स्वास्थ्य विभाग की हालत पतली है। बात चिकित्सकों की करें तो उपलब्धता में आधे भी तैनात नहीं हैं। जनपद में करीब 142 चिकित्सक चाहिए, जबकि मात्र 72 मौजूद हैं। इनमें भी छह चिकित्सक अवकाश पर हैं, जबकि पांच चिकित्सक पीजी (पोस्ट ग्रेजुएशन) कोर्स करने के लिए बाहर हैं। जनपद में कुल 59 चिकित्सकों की तैनाती है। विडंबना यह है कि जिला मुख्यालय पर सीएमओ, एसीएमओ के साथ 12 लोगों का चिकित्सकीय स्टाफ मौजूद है।
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10 सीएचसी और चार पीएचसी के लिए 47 चिकित्सक उपलब्ध हैं। पैरा मेडिकल समेत अन्य स्टाफ के जनपद में 867 पद हैं, जिनके सापेक्ष केवल 404 लोगों के भरोसे कार्य चल रहा है। जनपद की आबादी 3109731 है। जिसमें 1641803 पुरुष हैं, जबकि 1467928 महिलाएं हैं। इनती बड़ी आबादी पर स्वास्थ्य महकमे की गर्मी में मरीजों की बढ़ने वाली संख्या और उसके इलाज को लेकर चिंता सता रही है। सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा ने बताया कि जनपद ही नहीं प्रदेश भर में चिकित्सकों की कमी है। शासन स्तर पर इन्हें पूरा करने के लिए पहल हो रही है।
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डेढ़ लाख पर सीएचसी, 50 हजार पर पीएचसी
सरकार ने लोगों को सस्ता और बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए मानक रखे हैं। इसमें हर क्षेत्र में डेढ़ लाख की आबादी पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और 50 हजार की आबादी पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) रखी गई है। सीएचसी पर जनरल सर्जन, फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट, स्त्री रोग चिकित्सक, लैब टेक्नीशियन, एक्सरे चिकित्सक, डेंटल, फार्मेसिस्ट में एक-एक चिकित्सक की तैनाती होती है। साथ ही एक स्टॉफ नर्स, वार्ड ब्वाय, वार्ड आया भी एक-एक तैनात रहते हैं। पीएचसी पर दो चिकित्सक तैनात रखे जाते हैं।