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वेदानुकूल जीवन पथ से व्यक्तित्व निर्माण: कर्मवीर
Updated Sun, 09 Sep 2018 12:14 AM IST
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कम्हेड़ा में आर्य समाज का दो दिवसीय वार्षिकोत्सव
पुरकाजी। पतंजलि अंतरराष्ट्रीय योग विद्या पीठ के संचालक आचार्य कर्मवीर ने कहा कि वेदानुकूल जीवन पथ से व्यक्तित्व निर्माण संभव है। भारतीय वैदिक संस्कृति से ही विश्व में शांति, सद्भाव, एकता और मानवता स्थापित होगी। निरोगी काया जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
क्षेत्र के गांव कम्हेड़ा में आर्य समाज के दो दिवसीय श्रावणी पर्व उत्सव में मुख्य अतिथि प्रसिद्ध योगाचार्य स्वामी कर्मवीर ने कहा कि वैदिक संस्कृति में प्राणी मात्र के कल्याण का ज्ञान निहित है। वेदानुकूल जीवन पथ बनाने से ही समाज और राष्ट्र में सदाचरण, ईमानदारी, अनुशासन और एकता कायम होगी। स्वस्थ जीवन के लिए योग, ध्यान, प्राणायाम, आसन को दिनचर्या में शामिल करें। निरोगी काया ही सबसे बड़ा उपहार है। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि आचरण ही धर्म की कसौटी है। युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़े। शुक्रताल के स्वामी सत्यवेश ने कहा कि सामाजिक बुराईयों के उन्मूलन के लिए ऋषि दयानंद के कार्य अमूल्य है। यज्ञ में ग्रामीणों ने आहुतियां दी। ब्रह्मा देवपाल शास्त्री एवं यज्ञमान प्रवीण शर्मा, अंकित आर्य रहे। भजनोपदेशक ब्रजपाल कर्मठ एवं देवबंद के सुरेंद्र आर्य ने ईश्वर भक्ति और देश प्रेम के भजन सुनाए। संयोजक मास्टर महक सिंह आर्य, राजपाल आर्य, जयप्रकाश शर्मा, डॉ वेदपाल सैनी ने विचार रखे। अध्यक्षता राजपाल आर्य भैंसी ने की। यशवीर सिंह, जगपाल आर्य, मानपाल आर्य, गोविंद शर्मा, मगन सिंह प्रधान, सुखपाल, सुशील सैनी, राजेंद्र शर्मा, तेजपाल आर्य आदि मौजूद रहे।
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पुरकाजी। पतंजलि अंतरराष्ट्रीय योग विद्या पीठ के संचालक आचार्य कर्मवीर ने कहा कि वेदानुकूल जीवन पथ से व्यक्तित्व निर्माण संभव है। भारतीय वैदिक संस्कृति से ही विश्व में शांति, सद्भाव, एकता और मानवता स्थापित होगी। निरोगी काया जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
क्षेत्र के गांव कम्हेड़ा में आर्य समाज के दो दिवसीय श्रावणी पर्व उत्सव में मुख्य अतिथि प्रसिद्ध योगाचार्य स्वामी कर्मवीर ने कहा कि वैदिक संस्कृति में प्राणी मात्र के कल्याण का ज्ञान निहित है। वेदानुकूल जीवन पथ बनाने से ही समाज और राष्ट्र में सदाचरण, ईमानदारी, अनुशासन और एकता कायम होगी। स्वस्थ जीवन के लिए योग, ध्यान, प्राणायाम, आसन को दिनचर्या में शामिल करें। निरोगी काया ही सबसे बड़ा उपहार है। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि आचरण ही धर्म की कसौटी है। युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़े। शुक्रताल के स्वामी सत्यवेश ने कहा कि सामाजिक बुराईयों के उन्मूलन के लिए ऋषि दयानंद के कार्य अमूल्य है। यज्ञ में ग्रामीणों ने आहुतियां दी। ब्रह्मा देवपाल शास्त्री एवं यज्ञमान प्रवीण शर्मा, अंकित आर्य रहे। भजनोपदेशक ब्रजपाल कर्मठ एवं देवबंद के सुरेंद्र आर्य ने ईश्वर भक्ति और देश प्रेम के भजन सुनाए। संयोजक मास्टर महक सिंह आर्य, राजपाल आर्य, जयप्रकाश शर्मा, डॉ वेदपाल सैनी ने विचार रखे। अध्यक्षता राजपाल आर्य भैंसी ने की। यशवीर सिंह, जगपाल आर्य, मानपाल आर्य, गोविंद शर्मा, मगन सिंह प्रधान, सुखपाल, सुशील सैनी, राजेंद्र शर्मा, तेजपाल आर्य आदि मौजूद रहे।
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