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खास खबर- हिंदी-गुजराती में अनुवाद होगी ‘इस्लाम का तारुफ’
Updated Sun, 04 Mar 2018 12:24 AM IST
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मुजफ्फरनगर। जार्डन के प्रिंस गाजी बिन मोहम्मद की लिखी ‘थिंकिंग पर्सन्स गाइड टू इस्लाम’ पुस्तक का दुनियाभर में नाम होने के बाद भारत में भी उदय हुआ है। हालांकि प्रथम चरण में पुस्तक को उर्दू में तब्दील किया गया है। इस्लाम धर्म को समझने और जानने के मकसद से आम लोगों तक इस पुस्तक की पहुंच बनाने के लिए पहल शुरू की गई है। जमियत उलमा-ए-हिंद इसे हिंदी और गुजराती में ट्रांसलेट करेगी, ताकि कोई भी पुस्तक को पढ़ सके।
इस्लाम के विश्व प्रसिद्ध विद्वान जार्डन के प्रिंस गाजी बिन मोहम्मद की लिखी पुस्तक का जार्डन के नरेश अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल हुसैन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विमोचन किया है। भारत में यह पुस्तक जमियत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने उर्दू में ट्रांसलेट की है। जार्डन के प्रिंस ने इसे दुनियाभर के लोगों के पढ़ने-समझाने का इरादा जाहिर किया है। इस पर जमियत उलमा-ए-हिंद ने पुस्तक को पहल शुरू कर दी है। पुस्तक को भारत में आम नागरिकों और हर मजहब के लोगों तक पहुंचाने के लिए हिंदी और गुजराती में अनुवाद किया जाएगा। जमियत ने पुस्तक को इस्लाम का तारुफ, नाम दिया है। संगठन के जिला महासचिव कारी जाकिर हुसैन ने बताया कि पुस्तक को लेकर दिल्ली में विस्तार चर्चा हुई है। संगठन इसे आम लोगों तक पहुंचाएगा, ताकि इस्लाम धर्म को करीब से जानने और समझने का मौका मिल सके। इसको लेकर जमियत उलमा-ए-हिंद के पदाधिकारियों ने मंथन किया है। जिसमें देश-प्रदेश के कई बड़े इस्मालिक विद्वानों से भी राय ली गई है। उधर, जार्डन के प्रिंस गाजी की यह पुस्तक इंग्लैंड में इंग्लिश वर्जन में जारी हो चुकी है। वहां इसे काफी सराहा गया है।
मदरसों को पढ़ाने की छूट
उर्दू में बदली गई थिंकिंग पर्सन्स गाइड टू इस्लाम को मदरसों में पढ़ाने और लाइब्रेरी में रखने की आजादी दी गई है। इसको लेकर जमियत उलमा के पदाधिकारियों ने जनपद भर के मदरसों में इसे पढ़ाने के लिए जरूरत का आंकलन किया है। मदरसों में पुस्तक को पढ़ाए जाने से छात्रों, युवाओं में धर्म के बारे में जानने और उस पर अमल करने में काफी मदद मिलेगी। जल्द ही इसे नगर-देहात के मदरसों में रखा जाएगा।
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पैगंबर और इस्लाम का संदेश
कारी जाकिर हुसैन ने बताया कि पुस्तक में साफ किया गया है कि इस्लाम धर्म कैसे बना और इसका प्रचार-प्रसार किस स्तर पर हुआ है। पैगंबर मोहम्मद साहब ने कितनी दुश्वारियां सहीं और रब का संदेश आगे बढ़ाया। इस्लाम धर्म में कहीं भी कट्टरता, भेदभाव और फिरकापरस्ती, शिर्क ए बिद्दत का हुकम नहीं है। इस किताब में वह सब कुछ दिया गया है, जो आम से लेकर खास वर्ग में इस्लाम को जानने की जिज्ञासा है।
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इस्लाम के विश्व प्रसिद्ध विद्वान जार्डन के प्रिंस गाजी बिन मोहम्मद की लिखी पुस्तक का जार्डन के नरेश अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल हुसैन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विमोचन किया है। भारत में यह पुस्तक जमियत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने उर्दू में ट्रांसलेट की है। जार्डन के प्रिंस ने इसे दुनियाभर के लोगों के पढ़ने-समझाने का इरादा जाहिर किया है। इस पर जमियत उलमा-ए-हिंद ने पुस्तक को पहल शुरू कर दी है। पुस्तक को भारत में आम नागरिकों और हर मजहब के लोगों तक पहुंचाने के लिए हिंदी और गुजराती में अनुवाद किया जाएगा। जमियत ने पुस्तक को इस्लाम का तारुफ, नाम दिया है। संगठन के जिला महासचिव कारी जाकिर हुसैन ने बताया कि पुस्तक को लेकर दिल्ली में विस्तार चर्चा हुई है। संगठन इसे आम लोगों तक पहुंचाएगा, ताकि इस्लाम धर्म को करीब से जानने और समझने का मौका मिल सके। इसको लेकर जमियत उलमा-ए-हिंद के पदाधिकारियों ने मंथन किया है। जिसमें देश-प्रदेश के कई बड़े इस्मालिक विद्वानों से भी राय ली गई है। उधर, जार्डन के प्रिंस गाजी की यह पुस्तक इंग्लैंड में इंग्लिश वर्जन में जारी हो चुकी है। वहां इसे काफी सराहा गया है।
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मदरसों को पढ़ाने की छूट
उर्दू में बदली गई थिंकिंग पर्सन्स गाइड टू इस्लाम को मदरसों में पढ़ाने और लाइब्रेरी में रखने की आजादी दी गई है। इसको लेकर जमियत उलमा के पदाधिकारियों ने जनपद भर के मदरसों में इसे पढ़ाने के लिए जरूरत का आंकलन किया है। मदरसों में पुस्तक को पढ़ाए जाने से छात्रों, युवाओं में धर्म के बारे में जानने और उस पर अमल करने में काफी मदद मिलेगी। जल्द ही इसे नगर-देहात के मदरसों में रखा जाएगा।
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पैगंबर और इस्लाम का संदेश
कारी जाकिर हुसैन ने बताया कि पुस्तक में साफ किया गया है कि इस्लाम धर्म कैसे बना और इसका प्रचार-प्रसार किस स्तर पर हुआ है। पैगंबर मोहम्मद साहब ने कितनी दुश्वारियां सहीं और रब का संदेश आगे बढ़ाया। इस्लाम धर्म में कहीं भी कट्टरता, भेदभाव और फिरकापरस्ती, शिर्क ए बिद्दत का हुकम नहीं है। इस किताब में वह सब कुछ दिया गया है, जो आम से लेकर खास वर्ग में इस्लाम को जानने की जिज्ञासा है।