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भागवत आध्यात्मिक ज्ञान का प्रकाश पुंज
Updated Wed, 03 Jan 2018 12:01 AM IST
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भागवत आध्यात्मिक ज्ञान का प्रकाश पुंज
मोरना (मुजफ्फरनगर)।
शुक्रताल स्थित शुकदेव आश्रम में चल रही साप्ताहिक भागवत कथाओं के समापन पर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भागवत आध्यात्मिक ज्ञान का प्रकाश पुंज है, जो मानव जाति के कल्याण के लिए सर्वोपरि साधन है। भागवत कथा श्रवण करने मात्र से जन्म जन्मांत्रों के पाप का क्षय होकर हृदय में भक्ति का प्रादुर्भाव हो जाता है। भक्ति द्वारा परमात्मा को सहजता से प्राप्त किया जा सकता है।
शुकदेव आश्रम में भागवत कथा का मंगलवार को भक्तिभाव के बीच समापन हो गया। श्रीजी भक्त मंडल इंदौर के तत्वावधान में नागर परिवार द्वारा भागवत कथा में कथा व्यास अनुराग शर्मा व सहारनपुर के वन संरक्षक अनिल दुबे द्वारा आयोजित कथा में गुजरात के चिंतल से पधारे कथा व्यास स्वामी विश्वनाथ दास महाराज को स्वामी ओमानंद महाराज ने तिलक व ग्रंथ भेंटकर और पटका पहनाकर सम्मानित किया। इस मौके पर कथा में अन्य प्रांतों से भाग लेने आए श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। कथाओं के आयोजनों में आचार्य उप्रेती, आचार्य ज्ञानदास, आचार्य कृष्ण, श्याम शास्त्री, आशीष शास्त्री, देवराज शास्त्री, हर्षमणी, राजू आदि ने मुख्य भूमिका निभाई।
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मोरना (मुजफ्फरनगर)।
शुक्रताल स्थित शुकदेव आश्रम में चल रही साप्ताहिक भागवत कथाओं के समापन पर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भागवत आध्यात्मिक ज्ञान का प्रकाश पुंज है, जो मानव जाति के कल्याण के लिए सर्वोपरि साधन है। भागवत कथा श्रवण करने मात्र से जन्म जन्मांत्रों के पाप का क्षय होकर हृदय में भक्ति का प्रादुर्भाव हो जाता है। भक्ति द्वारा परमात्मा को सहजता से प्राप्त किया जा सकता है।
शुकदेव आश्रम में भागवत कथा का मंगलवार को भक्तिभाव के बीच समापन हो गया। श्रीजी भक्त मंडल इंदौर के तत्वावधान में नागर परिवार द्वारा भागवत कथा में कथा व्यास अनुराग शर्मा व सहारनपुर के वन संरक्षक अनिल दुबे द्वारा आयोजित कथा में गुजरात के चिंतल से पधारे कथा व्यास स्वामी विश्वनाथ दास महाराज को स्वामी ओमानंद महाराज ने तिलक व ग्रंथ भेंटकर और पटका पहनाकर सम्मानित किया। इस मौके पर कथा में अन्य प्रांतों से भाग लेने आए श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। कथाओं के आयोजनों में आचार्य उप्रेती, आचार्य ज्ञानदास, आचार्य कृष्ण, श्याम शास्त्री, आशीष शास्त्री, देवराज शास्त्री, हर्षमणी, राजू आदि ने मुख्य भूमिका निभाई।
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