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ट्रेन का हॉर्न उड़ा रहा बच्चों की नींद
Updated Wed, 23 Aug 2017 01:07 AM IST
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ट्रेन का हॉर्न सुनते ही उड़ जाती है बच्चों की नींद
खतौली (मुजफ्फरनगर)। उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे का भय अभी भी डरा रहा है। घटनास्थल के आसपास के रिहायशी इलाके में ट्रेन की दो बोगियां एक मकान और इंटर कॉलेज में घुस गई थी। डर ऐसा बैठा है कि हॉर्न सुनकर बच्चे नींद से अचानक जाग जाते हैं। हादसे का खौफजदा मंजर अभी उनके जेहन से नहीं निकल पा रहा है।
तहसील के सामने शनिवार को रेलवे ट्रैक पर पुरी-हरिद्वार कलिंग उत्कल एक्सप्रेस बेपटरी होकर डिरेल हो गई थी। एक कोच जगत कॉलोनी के चौधरी जगत सिंह के मकान में घुस गया था, जबकि दो कोच पलट कर चौधरी तिलकराम इंटर कॉलेज की दीवार से जा टकराए थे। गनीमत रही कि पलटी बोगियों की चपेट में कोई परिजन नहीं आया। हादसा इतना भयावह था कि सोच कर आज भी रूह कांप जाती है। रेलवे लाइन से बस्ती की दूरी मात्र 35 मीटर ही है। पिंटू चौधरी कहते हैं कि भीषण हादसे के बाद से पूरा परिवार भयभीत है। महिला पूनम, सुभद्रा, दीपा चौधरी बताती हैं कि रेलवे ट्रैक पर फिर से ट्रेन दौड़ने लगी है। हालांकि हम यहां वर्षों से रह रहे हैं, मगर उत्कल की दुर्घटना के बाद ट्रेन की धड़ाधड़ाहट मन को दहलाती है। ट्रेन का हॉर्न सुनकर बच्चे रात में अचानक भय से जाग जाते हैं। महिला पूनम ने कहा कि बच्चे बोलते हैं मम्मी-पापा जल्दी उठो, कभी फिर से ट्रेन घर में न घुस जाए। हादसे के साक्षी मनोज, अनंत, पंकज, प्रीति बताते हैं कि ओएचई लाइन के खंभों की वजह से बस्ती में आई तीन बोगियों की स्पीड घट गई थी, नहीं तो परिवारों पर भी कहर टूट सकता था। पटरी के करीब आवास होने से अभी भी रात को ट्रेनों के आवाजाही के वक्त आंखें झटके से खुल जाती है। राजीव, रेखा, बिट्टो, अनीता, अतरकली कहती हैं कि जीवन में ऐसा हादसा पहले नहीं देखा, अभी तक दिल में दहशत छाई है। मकानों में दरारें आ गई हैं। ट्रैक के इर्द-गिर्द की कालोनियों में दहशत व्याप्त है।
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे का भय अभी भी डरा रहा है। घटनास्थल के आसपास के रिहायशी इलाके में ट्रेन की दो बोगियां एक मकान और इंटर कॉलेज में घुस गई थी। डर ऐसा बैठा है कि हॉर्न सुनकर बच्चे नींद से अचानक जाग जाते हैं। हादसे का खौफजदा मंजर अभी उनके जेहन से नहीं निकल पा रहा है।
तहसील के सामने शनिवार को रेलवे ट्रैक पर पुरी-हरिद्वार कलिंग उत्कल एक्सप्रेस बेपटरी होकर डिरेल हो गई थी। एक कोच जगत कॉलोनी के चौधरी जगत सिंह के मकान में घुस गया था, जबकि दो कोच पलट कर चौधरी तिलकराम इंटर कॉलेज की दीवार से जा टकराए थे। गनीमत रही कि पलटी बोगियों की चपेट में कोई परिजन नहीं आया। हादसा इतना भयावह था कि सोच कर आज भी रूह कांप जाती है। रेलवे लाइन से बस्ती की दूरी मात्र 35 मीटर ही है। पिंटू चौधरी कहते हैं कि भीषण हादसे के बाद से पूरा परिवार भयभीत है। महिला पूनम, सुभद्रा, दीपा चौधरी बताती हैं कि रेलवे ट्रैक पर फिर से ट्रेन दौड़ने लगी है। हालांकि हम यहां वर्षों से रह रहे हैं, मगर उत्कल की दुर्घटना के बाद ट्रेन की धड़ाधड़ाहट मन को दहलाती है। ट्रेन का हॉर्न सुनकर बच्चे रात में अचानक भय से जाग जाते हैं। महिला पूनम ने कहा कि बच्चे बोलते हैं मम्मी-पापा जल्दी उठो, कभी फिर से ट्रेन घर में न घुस जाए। हादसे के साक्षी मनोज, अनंत, पंकज, प्रीति बताते हैं कि ओएचई लाइन के खंभों की वजह से बस्ती में आई तीन बोगियों की स्पीड घट गई थी, नहीं तो परिवारों पर भी कहर टूट सकता था। पटरी के करीब आवास होने से अभी भी रात को ट्रेनों के आवाजाही के वक्त आंखें झटके से खुल जाती है। राजीव, रेखा, बिट्टो, अनीता, अतरकली कहती हैं कि जीवन में ऐसा हादसा पहले नहीं देखा, अभी तक दिल में दहशत छाई है। मकानों में दरारें आ गई हैं। ट्रैक के इर्द-गिर्द की कालोनियों में दहशत व्याप्त है।
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