{"_id":"5a68d5014f1c1b91268b6326","slug":"201516819713-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शुक्रताल में कलश यात्रा निकाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शुक्रताल में कलश यात्रा निकाली
Updated Thu, 25 Jan 2018 12:25 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शुक्रताल में कलश यात्रा निकाली
मोरना। शुक्रताल स्थित गायत्री धाम परिवार की ओर से यज्ञ प्राण कथा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अनुयायियों ने नगर में कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा में बैंड बाजों की मधुर धुनों के बीच धार्मिक भजनों की प्रस्तुति पर वतावरण भक्तिमय हो गया।
भागवत कथा के शुभारंभ पर अलीगढ़ से पधारी कथा व्यास सुमन बाला शर्मा ने कहा कि कथा का आयोजन सामूहिक चेतना के लिए किया जाता है। रामायण और भागवत गीता के प्रवचनों के द्वारा यही समझाने का प्रयत्न किया जाता है कि मानव अपने व्यवहार का अवलोकन करते हुए आने वाले जीवन को सद्गति कैसे दी जाए। भक्ति के भाव को अपने हृदय में कैसे जगाए। भक्ति, ज्ञान और मुक्ति का आधार है। कथा, सत्संग आदि में भाग लेकर उसे अपनाया जा सकता है। जहां चाह है, वहां स्वत: ही राह बन जाती है। आस्था होगी तो भक्ति तो अपने आप जागृत हो जाती है और मानव का कल्याण होने लगता है। इससे पूर्व, अनुयायियों ने बैंडबाजों के बीच भक्ति धार्मिक भजनों पर कलश यात्रा विभिन्न मार्गो से गुजरते हुए गंगाघाट पर पहुंची। जहां वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां गंगा की आरती कर पूजा अर्चना की गई। इस मौके पर शिवनंदन, ओमपाल चौहान, नकली सिंह, महेंद्र, संतोष, विजेंद्र, हरवीर, गीता, राजबाला, मुन्नी देवी, प्रभुता, आशा, कमलेश, शशि, अर्णिका, शिमला, कमलेश आदि अनुयायियों ने भाग लिया। कथा का आयोजन गायत्री परिवार के तत्वावधान में किया गया है।
विज्ञापन
मोरना। शुक्रताल स्थित गायत्री धाम परिवार की ओर से यज्ञ प्राण कथा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अनुयायियों ने नगर में कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा में बैंड बाजों की मधुर धुनों के बीच धार्मिक भजनों की प्रस्तुति पर वतावरण भक्तिमय हो गया।
भागवत कथा के शुभारंभ पर अलीगढ़ से पधारी कथा व्यास सुमन बाला शर्मा ने कहा कि कथा का आयोजन सामूहिक चेतना के लिए किया जाता है। रामायण और भागवत गीता के प्रवचनों के द्वारा यही समझाने का प्रयत्न किया जाता है कि मानव अपने व्यवहार का अवलोकन करते हुए आने वाले जीवन को सद्गति कैसे दी जाए। भक्ति के भाव को अपने हृदय में कैसे जगाए। भक्ति, ज्ञान और मुक्ति का आधार है। कथा, सत्संग आदि में भाग लेकर उसे अपनाया जा सकता है। जहां चाह है, वहां स्वत: ही राह बन जाती है। आस्था होगी तो भक्ति तो अपने आप जागृत हो जाती है और मानव का कल्याण होने लगता है। इससे पूर्व, अनुयायियों ने बैंडबाजों के बीच भक्ति धार्मिक भजनों पर कलश यात्रा विभिन्न मार्गो से गुजरते हुए गंगाघाट पर पहुंची। जहां वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां गंगा की आरती कर पूजा अर्चना की गई। इस मौके पर शिवनंदन, ओमपाल चौहान, नकली सिंह, महेंद्र, संतोष, विजेंद्र, हरवीर, गीता, राजबाला, मुन्नी देवी, प्रभुता, आशा, कमलेश, शशि, अर्णिका, शिमला, कमलेश आदि अनुयायियों ने भाग लिया। कथा का आयोजन गायत्री परिवार के तत्वावधान में किया गया है।
विज्ञापन