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साप्ताहिक बंदी के दिन बाजार बंद कराने की मांग
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साप्ताहिक बंदी के दिन बाजार बंद कराने की मांग
पुरकाजी। कस्बे में दुकानों पर काम करने वाले कामगारों ने डीएम को शिकायती पत्र भेजकर साप्ताहिक बंदी के दिन कस्बे का बाजार बंद कराने की मांग की है।
शिकायती पत्र में अवगत कराया गया कि कस्बे में बृहस्पतिवार का दिन साप्ताहिक बंदी का दिन निर्धारित है। बावजूद कुछ व्यापारियों द्वारा अपनी दुकानें बंद न रखकर बंदी के दिन भी रोजाना की भांति खोली जाती हैं। ऐसे में दुकानों पर काम करने वाले कामगारों को अवकाश नहीं मिल पाता है। इसके अलावा अगर कोई कामगार बंदी के दिन अवकाश रखता है तो व्यापारी उसका वेतन काटने के साथ ही उसका उत्पीड़न भी करता है। कामगारों का यह भी आरोप है कि अगर कभी कोई अधिकारी बंदी के दिन कस्बे में आकर जांच करता है तो व्यापारी उससे सांठ गांठ कर वापस भेज देते हैं। कामगार आसिफ,रोहित, जावेद, रफी, सैफअली, शादाब, दिलशाद, मोनू, नदीम, अमन, अरमान, दानिश, सुहैल, तालिब, वसीम खान, अंकित, संजय, राजू आदि ने डीएम से कस्बे में साप्ताहिक बंदी को सख्ती के साथ लागू कराने की मांग की है।
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पुरकाजी। कस्बे में दुकानों पर काम करने वाले कामगारों ने डीएम को शिकायती पत्र भेजकर साप्ताहिक बंदी के दिन कस्बे का बाजार बंद कराने की मांग की है।
शिकायती पत्र में अवगत कराया गया कि कस्बे में बृहस्पतिवार का दिन साप्ताहिक बंदी का दिन निर्धारित है। बावजूद कुछ व्यापारियों द्वारा अपनी दुकानें बंद न रखकर बंदी के दिन भी रोजाना की भांति खोली जाती हैं। ऐसे में दुकानों पर काम करने वाले कामगारों को अवकाश नहीं मिल पाता है। इसके अलावा अगर कोई कामगार बंदी के दिन अवकाश रखता है तो व्यापारी उसका वेतन काटने के साथ ही उसका उत्पीड़न भी करता है। कामगारों का यह भी आरोप है कि अगर कभी कोई अधिकारी बंदी के दिन कस्बे में आकर जांच करता है तो व्यापारी उससे सांठ गांठ कर वापस भेज देते हैं। कामगार आसिफ,रोहित, जावेद, रफी, सैफअली, शादाब, दिलशाद, मोनू, नदीम, अमन, अरमान, दानिश, सुहैल, तालिब, वसीम खान, अंकित, संजय, राजू आदि ने डीएम से कस्बे में साप्ताहिक बंदी को सख्ती के साथ लागू कराने की मांग की है।
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