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राजा परीक्षित पर हुआ था कलियुग का प्रभाव
Updated Tue, 30 Jan 2018 12:33 AM IST
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भागवत कथा में बही भक्ति की धारा
मुजफ्फरनगर। कथा व्यास मनीष भाई ओझा ने कहा कि राजा परीक्षित पर कलियुग का असर हो गया था। इसी के चलते ऋषि के गले में सर्प डाल दिया और श्राप का भागी होना पड़ा।
सनातन धर्म सभा भवन में चल रही भागवत कथा में ओझा ने कहा कि राजा परीक्षित ने जरासंध से युद्ध के बाद जो मुकुट प्राप्त किया, उसके स्वर्ण में कलियुग का प्रभाव था, इसी कारण राजा में भी यह प्रभाव आ गया था। उन्होंने मृत सर्प ऋषि के गले में डाल दिया, जिसे देखकर ऋषि के पुत्र ने उन्हें सातवें दिन तक्षक के काटने से मृत्यु होने का श्राप दे दिया। इस कर्म के पश्चाताप में राजा परीक्षित ने अपने ज्येष्ठ पुत्र जन्मेजय को राज्य सौंप दिया। तब राजा ने शुकदेव जी महाराज से भागवत कथा सुनी। यज्ञमान नरेंद्र अग्रवाल, अनुराग अग्रवाल, सचिन अग्रवाल रहे। सुशील शर्मा, सुशील गोयल, अजय गर्ग, अंजुल भूषण, संजय शर्मा, संजय कुमार, ब्रजमोहन सिंघल आदि रहे।
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मुजफ्फरनगर। कथा व्यास मनीष भाई ओझा ने कहा कि राजा परीक्षित पर कलियुग का असर हो गया था। इसी के चलते ऋषि के गले में सर्प डाल दिया और श्राप का भागी होना पड़ा।
सनातन धर्म सभा भवन में चल रही भागवत कथा में ओझा ने कहा कि राजा परीक्षित ने जरासंध से युद्ध के बाद जो मुकुट प्राप्त किया, उसके स्वर्ण में कलियुग का प्रभाव था, इसी कारण राजा में भी यह प्रभाव आ गया था। उन्होंने मृत सर्प ऋषि के गले में डाल दिया, जिसे देखकर ऋषि के पुत्र ने उन्हें सातवें दिन तक्षक के काटने से मृत्यु होने का श्राप दे दिया। इस कर्म के पश्चाताप में राजा परीक्षित ने अपने ज्येष्ठ पुत्र जन्मेजय को राज्य सौंप दिया। तब राजा ने शुकदेव जी महाराज से भागवत कथा सुनी। यज्ञमान नरेंद्र अग्रवाल, अनुराग अग्रवाल, सचिन अग्रवाल रहे। सुशील शर्मा, सुशील गोयल, अजय गर्ग, अंजुल भूषण, संजय शर्मा, संजय कुमार, ब्रजमोहन सिंघल आदि रहे।
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