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ब्रेकर से बिजली उत्पादन का मॉडल बनाया
Updated Mon, 05 Feb 2018 12:37 AM IST
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ब्रेकर से बिजली उत्पादन का मॉडल बनाया
मुजफ्फरनगर। सदर विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय सीमली के छात्र-छात्राओं ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसके माध्यम से सड़क के स्पीड ब्रेकर से बिजली पैदा की जाती है। वाहनों के घर्षण से बनने वाली बिजली विभिन्न प्रयोगों में लाई जा सकेगी।
विद्यालय के इंचार्ज अध्यापक एवं विज्ञान अध्यापक रविंद्र सिंह के दिशा निर्देशन में बच्चों ने कई वर्षों की मेहनत के बाद एक ऐसा विज्ञान का मॉडल तैयार किया है, जो देश के विकास में क्रांतिकारी कदम हो सकता है। रविवार को उन्होंने नगर में एक रेस्टोरेट में पत्रकारों से वार्ता करते हुए इस उपलब्धि के बारे में बताया। उनके इस विज्ञान मॉडल में बताया गया कि स्पीड ब्रेकर के घर्षण के माध्यम से बिजली पैदा की जा सकती है। उन्होंने अपने इस आविष्कार में प्रतिदिन बढ़ रही वाहनों की संख्या और उनके सड़क पर बढ़ रहे दबाव से बनने वाली ऊर्जा को संग्रह कर यांत्रिकी ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने वाले संयंत्र की खोज की है। उनका कहना है कि इस संयंत्र के माध्यम से प्रतिदिन स्कूलों में बच्चों द्वारा पीटी कराकर विद्युत ऊर्जा का उत्पादन कर स्कूलों की बिजली समस्या को हल किया जा सकता है, इससे सरकारी धन की बचत होगी। शामली के गांव खेडी पट्टी निवासी अध्यापक रविन्द्र सिंह ने बताया कि वो अपने आविष्कार के माध्यम से सड़कों पर बनने वाले स्पीड ब्रेकरों के नीचे टरबाइन लगाकर डाइनमों से जोड़कर यान्त्रिकी ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदल सकते हैं। वार्ता में शिक्षक नीरज, संजय गर्ग, अरविंद मलिक, रवि कुमार, संजीव गोल्डी मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। सदर विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय सीमली के छात्र-छात्राओं ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसके माध्यम से सड़क के स्पीड ब्रेकर से बिजली पैदा की जाती है। वाहनों के घर्षण से बनने वाली बिजली विभिन्न प्रयोगों में लाई जा सकेगी।
विद्यालय के इंचार्ज अध्यापक एवं विज्ञान अध्यापक रविंद्र सिंह के दिशा निर्देशन में बच्चों ने कई वर्षों की मेहनत के बाद एक ऐसा विज्ञान का मॉडल तैयार किया है, जो देश के विकास में क्रांतिकारी कदम हो सकता है। रविवार को उन्होंने नगर में एक रेस्टोरेट में पत्रकारों से वार्ता करते हुए इस उपलब्धि के बारे में बताया। उनके इस विज्ञान मॉडल में बताया गया कि स्पीड ब्रेकर के घर्षण के माध्यम से बिजली पैदा की जा सकती है। उन्होंने अपने इस आविष्कार में प्रतिदिन बढ़ रही वाहनों की संख्या और उनके सड़क पर बढ़ रहे दबाव से बनने वाली ऊर्जा को संग्रह कर यांत्रिकी ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने वाले संयंत्र की खोज की है। उनका कहना है कि इस संयंत्र के माध्यम से प्रतिदिन स्कूलों में बच्चों द्वारा पीटी कराकर विद्युत ऊर्जा का उत्पादन कर स्कूलों की बिजली समस्या को हल किया जा सकता है, इससे सरकारी धन की बचत होगी। शामली के गांव खेडी पट्टी निवासी अध्यापक रविन्द्र सिंह ने बताया कि वो अपने आविष्कार के माध्यम से सड़कों पर बनने वाले स्पीड ब्रेकरों के नीचे टरबाइन लगाकर डाइनमों से जोड़कर यान्त्रिकी ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदल सकते हैं। वार्ता में शिक्षक नीरज, संजय गर्ग, अरविंद मलिक, रवि कुमार, संजीव गोल्डी मौजूद रहे।
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