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जान बूझकर रोजा छोड़ने वाला अल्लाह से करता है बगावत

Fri, 17 May 2019 11:52 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 17 May 2019 11:52 PM IST
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जान बूझकर रोजा छोड़ने वाला अल्लाह से करता है बगावत
देवबंद (सहारनपुर)। मुकद्दस रमजान माह तमाम महीनों का सरदार तो है ही साथ ही इस महीने में अल्लाह अपने बंदों की हर नेकी के बदले में इजाफा कर देता है। रमजान की इन्हीं विशेषताओं पर रोशनी डालते हुए दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि इस महीने में अल्लाह अपने बंदों को खास नेअमतों से नवाजता है।
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शुक्रवार को रमजान की फजीलतों का बखान करते हुए मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा की रमजान में हर इबादत और नेक अमल का सवाब बढ़ा दिया जाता है और बंदा-ए-मोमिन की हर नेकी के बदले में इजाफा हो जाता है इसलिए रमजान को महीनों का सरदार कहा गया है। उन्होंने कहा कि रमजान माह में तीन हिस्से हैं और हर हिस्से को नाम दिया गया है। पहले हिस्सा जो 10 दिन का है उसे रहमत कहा जाता है, दूसरा हिस्सा जो रमजान की 11 तारीख से 20 रमजान तक होता है उसे मगफिरत कहा जाता है और तीसरा हिस्सा जो 21 रमजान से शुरू होकर 30 रमजान को खत्म होता है उसे जहन्नुम से आजादी का हिस्सा कहा जाता है। यानि रमजान माह में अल्लाह अपने बंदों पर रहमत, मगफिरत और जहन्नुम से आजादी के दरवाजे खोल देता है। मौलाना नसीम ने कहा कि यह सब चीजें रोजा रखने वाले को मिलती हैं जो अल्लाह की नजदीकी पाने के लिए और उसे खुश रखने के लिए रोजा रखता है। यदि कोई रोजा नहीं रखता और जान बूझकर ऐसा करता है तो वो खुदा से बगावत का एलान करता है और अल्लाह ऐसे बागियों को सजा देता है। उन्होंने कहा कि जो लोग चाहते हैं कि वो आराम की जिंदगी गुजारें वो सिर्फ रमजान ही नहीं बल्कि आम दिनों में भी अल्लाह के हुक्म की तामील करें।
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गरीबों के मोहल्लों में किया जाना चाहिए रोजा इफ्तार कार्यक्रम: पंडित सतेंद्र
देवबंद। श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने कहा कि रमजान हो या फिर आम दिन उनमें अपने पड़ोसियों का खास ख्याल रखना चाहिए। इसके साथ ही आर्थिक रुप से संपन्न लोगों को चाहिए कि वह गरीबों के मोहल्लों में जाकर रोजा इफ्तार पार्टी करें। ताकि रमजान की रहमत और बरकतों से गरीब भी मालामाल हो जाए। पंडित सतेंद्र शर्मा ने कहा कि रोजेदार की सेवा करना बहुत बड़ी इबादत का हिस्सा है। जो कोई भी सच्चे मन से रोजेदारों की सेवा करता है उसे उसकी सेवा का फल ईश्वर जरूर देता है।
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