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आपकी वजह से धर्म को नुकसान नहीं होना चाहिए-महाराज
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आपकी वजह से धर्म को नुकसान नहीं होना चाहिए : महाराज
मोरना। कथा व्यास देवकी नंदन ठाकुर जी ने कहा कि कलियुग में जीव को समय पर आराम चाहिए, चाहे जो भी हो। शुकदेव तीर्थ मेें आए हो, तो कथा तो मिल ही जाएगी। इस बात की गारंटी है। जो गंगा दशहरे पर गंगा में स्नान नहीं किया, समझो उनकी आत्मा की गर्मी मर गई है। शुकदेव महामुनि हम सब के बीच कथा को किसी ना किसी रूप में आशीर्वाद दे रहे हैं। कभी-कभी भक्तों की श्रद्धा के भाव को प्रणाम करने को मन करता है।
विश्व शांति ट्रस्ट वृंदावन के बैनरतले शुकतीर्थ शुकदेव आश्रम के सभा स्थल पर साप्ताहिक भागवत कथा के छठे दिन अमृत वर्षा करते हुए कथा व्यास ठाकुर महाराज ने कहा कि आपकी वजह से धर्म को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। धर्मात्मा व्यक्ति कभी धर्म को नुकसान नहीं पहुंचाता। बुराई करना और सुनना दोनों अपराध हैं। भगवान के प्रसाद के अन्न को फेंककर अपराध मत करो, पेट भरो, थाली मत भरो। कण-कण खत्म करो और संत का क्षण कभी व्यर्थ मत करो। मन के अंदर संदेह हो तो संत से पूछ लो। जहां भगवान और भक्त नृत्य करें वही रासलीला है। भक्त की आत्मा का परमात्मा के साथ नृत्य का आनंद ही असली रसपान है, जो आंखों, मन, सांसों, कानों आत्मा से भगवान गोविंद को पुकार तो समझो आपकी भक्ति सफल हो गई। ब्रज की भूमि में तपस्या कूट-कूट कर भरी हुई है। सच्चे भक्त की भगवान हमेशा परीक्षा लेते रहते हैं, जो समस्याओं के समय भक्ति से डिगा नहीं उसको भगवान गले से लगा लेते हैं। परिस्थितियों से हमें भागना नहीं चाहिए, बल्कि उसका डटकर मुकाबला करें, जिससे भक्ति को मजबूती मिलती है। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने भजनों पर जमकर नृत्य कर गोविंद की रासलीला में भाग लिया। कथा का संचालन विजय कुमार शर्मा ने किया। वहीं, मास्टर सत्यपाल सिंह दिल्ली, डा. प्रदीप शर्मा, संजीव शंकर अध्यक्ष महामृंत्युजय सेवा मिशन, मुख्य यज्ञमान मुकेश पांडेय, एसपी अग्रवाल, सुरेश गोयल, सतीश गर्ग, श्याम सुंदर आचार्य आदि कथा के आयोजन में सहयोग करने में लगे हुए हैं।
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मोरना। कथा व्यास देवकी नंदन ठाकुर जी ने कहा कि कलियुग में जीव को समय पर आराम चाहिए, चाहे जो भी हो। शुकदेव तीर्थ मेें आए हो, तो कथा तो मिल ही जाएगी। इस बात की गारंटी है। जो गंगा दशहरे पर गंगा में स्नान नहीं किया, समझो उनकी आत्मा की गर्मी मर गई है। शुकदेव महामुनि हम सब के बीच कथा को किसी ना किसी रूप में आशीर्वाद दे रहे हैं। कभी-कभी भक्तों की श्रद्धा के भाव को प्रणाम करने को मन करता है।
विश्व शांति ट्रस्ट वृंदावन के बैनरतले शुकतीर्थ शुकदेव आश्रम के सभा स्थल पर साप्ताहिक भागवत कथा के छठे दिन अमृत वर्षा करते हुए कथा व्यास ठाकुर महाराज ने कहा कि आपकी वजह से धर्म को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। धर्मात्मा व्यक्ति कभी धर्म को नुकसान नहीं पहुंचाता। बुराई करना और सुनना दोनों अपराध हैं। भगवान के प्रसाद के अन्न को फेंककर अपराध मत करो, पेट भरो, थाली मत भरो। कण-कण खत्म करो और संत का क्षण कभी व्यर्थ मत करो। मन के अंदर संदेह हो तो संत से पूछ लो। जहां भगवान और भक्त नृत्य करें वही रासलीला है। भक्त की आत्मा का परमात्मा के साथ नृत्य का आनंद ही असली रसपान है, जो आंखों, मन, सांसों, कानों आत्मा से भगवान गोविंद को पुकार तो समझो आपकी भक्ति सफल हो गई। ब्रज की भूमि में तपस्या कूट-कूट कर भरी हुई है। सच्चे भक्त की भगवान हमेशा परीक्षा लेते रहते हैं, जो समस्याओं के समय भक्ति से डिगा नहीं उसको भगवान गले से लगा लेते हैं। परिस्थितियों से हमें भागना नहीं चाहिए, बल्कि उसका डटकर मुकाबला करें, जिससे भक्ति को मजबूती मिलती है। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने भजनों पर जमकर नृत्य कर गोविंद की रासलीला में भाग लिया। कथा का संचालन विजय कुमार शर्मा ने किया। वहीं, मास्टर सत्यपाल सिंह दिल्ली, डा. प्रदीप शर्मा, संजीव शंकर अध्यक्ष महामृंत्युजय सेवा मिशन, मुख्य यज्ञमान मुकेश पांडेय, एसपी अग्रवाल, सुरेश गोयल, सतीश गर्ग, श्याम सुंदर आचार्य आदि कथा के आयोजन में सहयोग करने में लगे हुए हैं।
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