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सहजयोग से जीवन हो जाता है सुखमय: किरण
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सहजयोग से जीवन हो जाता है सुखमय: किरण
मुजफ्फरनगर। सहजयोग के माध्यम से हम अपने जीवन के कष्टों का निवारण कर सकते हैं। यह ऐसी प्रक्रिया है जो जीवन को तो सुखमय बनाती ही है साथ ही असाध्य रोगों का उपचार भी इससे हो जाता है। सहजयोग को आम जनता के लिए सुलभ बनाने को 20 जनवरी को एक शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें पश्चिम के विभिन्न जिलों के श्रद्धालु शामिल होंगे।
जिले की कोआर्डिनेटर किरण त्रिपाठी ने नई मंडी के माता वाले मंदिर में पत्रकारों से वार्ता में बताया कि सहजयोग संस्था देश में 1970 से काम कर रही है। सहज योग सुबह-शाम की पांच-पांच मिनट की प्रक्रिया है। इसमें कोई शुल्क नहीं है। पूज्य माता निर्मला देवी प्रणित यह आत्मज्ञान के लिए सहजयोग की एक अत्यंत सरल, सुलभ, सहज ध्यान पद्धति है। मानव की कुंडलनी को सुसुप्तावस्था में होती है, उसे जागृत किया जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के 180 देशों में सहजयोग के केंद्र चल रहे हैं। इससे मानसिक एवं शारीरिक तनाव से मुक्ति मिलती है। शरीर की बीमारियों को जड़ से खत्म किया जा सकता है। विद्यार्थियों के लिए अधिक फायदेमंद है। एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है। बुरी आदतों से छुटकारा मिलता है। उन्होंने बताया कि स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में शहर में पहली बार विशाल शोभायात्रा का आयोजन हो रहा है। 20 जनवरी को पाल धर्मशाला से शुरू होकर नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए चरथावल रोड सहयोग मंदिर तक जाएगी। पश्चिम के जिलों के संस्था से जुड़े श्रद्धालु शामिल होंगे। वार्ता में धर्मेश खन्ना, प्रदीप, कुलवंत सिंह, दीपा अग्रवाल, रजनी, चेतना, आदेश गर्ग आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। सहजयोग के माध्यम से हम अपने जीवन के कष्टों का निवारण कर सकते हैं। यह ऐसी प्रक्रिया है जो जीवन को तो सुखमय बनाती ही है साथ ही असाध्य रोगों का उपचार भी इससे हो जाता है। सहजयोग को आम जनता के लिए सुलभ बनाने को 20 जनवरी को एक शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें पश्चिम के विभिन्न जिलों के श्रद्धालु शामिल होंगे।
जिले की कोआर्डिनेटर किरण त्रिपाठी ने नई मंडी के माता वाले मंदिर में पत्रकारों से वार्ता में बताया कि सहजयोग संस्था देश में 1970 से काम कर रही है। सहज योग सुबह-शाम की पांच-पांच मिनट की प्रक्रिया है। इसमें कोई शुल्क नहीं है। पूज्य माता निर्मला देवी प्रणित यह आत्मज्ञान के लिए सहजयोग की एक अत्यंत सरल, सुलभ, सहज ध्यान पद्धति है। मानव की कुंडलनी को सुसुप्तावस्था में होती है, उसे जागृत किया जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के 180 देशों में सहजयोग के केंद्र चल रहे हैं। इससे मानसिक एवं शारीरिक तनाव से मुक्ति मिलती है। शरीर की बीमारियों को जड़ से खत्म किया जा सकता है। विद्यार्थियों के लिए अधिक फायदेमंद है। एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है। बुरी आदतों से छुटकारा मिलता है। उन्होंने बताया कि स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में शहर में पहली बार विशाल शोभायात्रा का आयोजन हो रहा है। 20 जनवरी को पाल धर्मशाला से शुरू होकर नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए चरथावल रोड सहयोग मंदिर तक जाएगी। पश्चिम के जिलों के संस्था से जुड़े श्रद्धालु शामिल होंगे। वार्ता में धर्मेश खन्ना, प्रदीप, कुलवंत सिंह, दीपा अग्रवाल, रजनी, चेतना, आदेश गर्ग आदि मौजूद रहे।
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