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मरने के बाद भी देख सकेंगे दुनिया
Updated Thu, 08 Feb 2018 12:09 AM IST
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मरने के बाद भी देख सकेंगे दुनिया
मुजफ्फरनगर। आंखों के बिना दुनिया क्या है, इसका जवाब कोई नेत्रहीन व्यक्ति दे सकता है। जिले में छह लोग ऐसे खुशनसीब होंगे, जो मरने के बाद भी दुनिया के तमाम रंग देख सकेंगे। इन लोगों ने मृत्यु के बाद आंखें दान करने की इच्छा जताई है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने इन फार्म (शपथ पत्र) भरवाया है। यहां से इन फार्म को मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजा है। मेडिकल कॉलेज की टीम ही आंखों की पुतलियां निकाल कर ले जाएंगी।
अंगदान सबसे बड़ा दान है, इससे प्रेरित होकर जिले के छह लोगों ने अपनी आंखें दुनिया के लिए छोड़ने का निर्णय लिया है। इन लोगों ने स्वास्थ्य विभाग ने आंखें दान करने का फार्म भरा है, जिसकी प्रक्रिया पूरी करने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने फार्मों को लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज भेजा है। मेडिकल कॉलेज का आई बैंक यहां इन लोगों का अपने पास रजिस्ट्रेशन करेगा। उसके बाद यह आंख दानदाता माने जाएंगे। दिलचस्प है कि आंखें दान करने वालों की संख्या में जिले में इसी वर्ष दर्ज की गई है। यह सभी खुश नसीब अगल-अलग धर्म-जाति से ताल्लुक रखते हैं, जिनका मकसद भेदभाव की खाई को मिटाकर आंखों से मोहब्बत और दुनिया की तमाम रंगतों को देखना है। साथ ही मरने के बाद दृष्टिहीन लोगों के जीवन को हमेशा के लिए अंधेरे के अभिशाप से बाहर निकालेंगे। विभागीय अधिकारियों ने शपथ पत्र भरवाकर उन्हें अन्य लोगों को भी प्रेरित करने का संकल्प दिलाया है।
आई बैंक से बनेगा पंजीकृत कार्ड
मुजफ्फरनगर। मेरठ मेडिकल कालेज के आई बैंक में इनका फार्म पहुंचने के बाद जांच होगी। इसके बाद इन सभी लोगों को अलग से आईडेंटी (पंजीकरण) कार्ड बनाया जाएगा। इस कार्ड पर दानदात की मृत्यु के बाद तत्काल सूचना देनी होगी। इस कार्ड को दानदान अपने पास रखेगा, ताकि मेडिकल की टीम समय पर पहुंचकर आंखों का ऑप्रेशन कर उसे ले जा सके।
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आंखों की पुतली ले जाती है टीम
मुजफ्फरनगर। आंख दान करने वाले व्यक्ति के अलावा उसके परिवार में भ्रम होता है कि चिकित्सक मृतक की पूरी आंख ले जाते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। चिकित्सकों की टीम मृत्यु के दो घंटे के भीतर आकर केवल कार्निया (आंखों की पुतली) ले जाती है। यही ट्रांस्पलेट करने में काम आती है।
बोले अधिकारी...
जिन लोगों को एड्स, उच्च रक्तचाप, अस्थमा के साथ अन्य गंभीर बीमारी है। वह व्यक्ति नेत्रदान योग्य नहीं माने जाते हैं। नेत्रदान के लिए लोगों को प्रेरित करने की जरूरत है। इसके लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे।
-डॉ मनोज सैन, नेत्र सर्जन, जिला चिकित्सालय मुजफ्फरनगर।
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जनपद में छह लोगों ने नेत्रदान करने की इच्छा प्रकट की है, जिनके फार्म और शपथ भरवाकर मेडिकल कॉलेज भेजे गए हैं। जिले का आई बैंक वही है। यह एक अच्छी पहल है। देश में दृष्टिहीन लोगों की संख्या भी काफी है। ऐसा करने से वह भी दुनिया देख सकते हैं।
-डॉ पीएस मिश्रा, सीएमओ मुजफ्फरनगर।
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मुजफ्फरनगर। आंखों के बिना दुनिया क्या है, इसका जवाब कोई नेत्रहीन व्यक्ति दे सकता है। जिले में छह लोग ऐसे खुशनसीब होंगे, जो मरने के बाद भी दुनिया के तमाम रंग देख सकेंगे। इन लोगों ने मृत्यु के बाद आंखें दान करने की इच्छा जताई है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने इन फार्म (शपथ पत्र) भरवाया है। यहां से इन फार्म को मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजा है। मेडिकल कॉलेज की टीम ही आंखों की पुतलियां निकाल कर ले जाएंगी।
अंगदान सबसे बड़ा दान है, इससे प्रेरित होकर जिले के छह लोगों ने अपनी आंखें दुनिया के लिए छोड़ने का निर्णय लिया है। इन लोगों ने स्वास्थ्य विभाग ने आंखें दान करने का फार्म भरा है, जिसकी प्रक्रिया पूरी करने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने फार्मों को लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज भेजा है। मेडिकल कॉलेज का आई बैंक यहां इन लोगों का अपने पास रजिस्ट्रेशन करेगा। उसके बाद यह आंख दानदाता माने जाएंगे। दिलचस्प है कि आंखें दान करने वालों की संख्या में जिले में इसी वर्ष दर्ज की गई है। यह सभी खुश नसीब अगल-अलग धर्म-जाति से ताल्लुक रखते हैं, जिनका मकसद भेदभाव की खाई को मिटाकर आंखों से मोहब्बत और दुनिया की तमाम रंगतों को देखना है। साथ ही मरने के बाद दृष्टिहीन लोगों के जीवन को हमेशा के लिए अंधेरे के अभिशाप से बाहर निकालेंगे। विभागीय अधिकारियों ने शपथ पत्र भरवाकर उन्हें अन्य लोगों को भी प्रेरित करने का संकल्प दिलाया है।
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आई बैंक से बनेगा पंजीकृत कार्ड
मुजफ्फरनगर। मेरठ मेडिकल कालेज के आई बैंक में इनका फार्म पहुंचने के बाद जांच होगी। इसके बाद इन सभी लोगों को अलग से आईडेंटी (पंजीकरण) कार्ड बनाया जाएगा। इस कार्ड पर दानदात की मृत्यु के बाद तत्काल सूचना देनी होगी। इस कार्ड को दानदान अपने पास रखेगा, ताकि मेडिकल की टीम समय पर पहुंचकर आंखों का ऑप्रेशन कर उसे ले जा सके।
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आंखों की पुतली ले जाती है टीम
मुजफ्फरनगर। आंख दान करने वाले व्यक्ति के अलावा उसके परिवार में भ्रम होता है कि चिकित्सक मृतक की पूरी आंख ले जाते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। चिकित्सकों की टीम मृत्यु के दो घंटे के भीतर आकर केवल कार्निया (आंखों की पुतली) ले जाती है। यही ट्रांस्पलेट करने में काम आती है।
बोले अधिकारी...
जिन लोगों को एड्स, उच्च रक्तचाप, अस्थमा के साथ अन्य गंभीर बीमारी है। वह व्यक्ति नेत्रदान योग्य नहीं माने जाते हैं। नेत्रदान के लिए लोगों को प्रेरित करने की जरूरत है। इसके लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे।
-डॉ मनोज सैन, नेत्र सर्जन, जिला चिकित्सालय मुजफ्फरनगर।
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जनपद में छह लोगों ने नेत्रदान करने की इच्छा प्रकट की है, जिनके फार्म और शपथ भरवाकर मेडिकल कॉलेज भेजे गए हैं। जिले का आई बैंक वही है। यह एक अच्छी पहल है। देश में दृष्टिहीन लोगों की संख्या भी काफी है। ऐसा करने से वह भी दुनिया देख सकते हैं।
-डॉ पीएस मिश्रा, सीएमओ मुजफ्फरनगर।
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