{"_id":"59627ca94f1c1b8a178b46ec","slug":"101499626665-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धर्माराधना के लिए सुअवसर-चातुर्मास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धर्माराधना के लिए सुअवसर-चातुर्मास
Updated Mon, 10 Jul 2017 12:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आत्मा की शुद्धि का समय चातुर्मास
खतौली। मोहल्ला सराफान स्ट्रीट स्थित वर्णी जैन साधु भवन में क्षुल्लिका 105 अंतसमती माता और आमर्षमती माता का चातुर्मास हेतु मंगल कलश स्थापना समारोह आयोजित किया।
शुभारंभ माता जी को विराजमान कराके मंगलाचरण व णमोकार महामंत्र पाठ से कराया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चेयरमैन पारस जैन रहे। चित्र अनावरण का कार्य शशांक महलका परिवार ने किया। ज्ञान के दीपक का प्रज्ज्वलन अजय किरयाना परिवार ने किया। समारोह का मुख्य आचार्यमान सागर मंगल कलश स्थापना को सौभाग्य बल्लू जैन, संजय व प्रदीप सर्राफ परिवार मेरठ को प्राप्त हुआ। आयोजित धर्मसभा में पूज्य माताजी ने बताया भारतीय संस्कृति में चातुर्मास काल धर्म आराधना व आत्मा का शुद्धि का समय है। वर्षा ऋतु में मुनियों और साधुओं को जीव हिंसा से बचने के लिए चार माह तक एक ही स्थान पर रहकर धर्मध्यान करना होता है, जिसे वर्षा योग या चातुर्मास स्थापना कहते हैं। संचालन प्रवीण जैन व कुलदीप जैन ने किया। मौके पर सुशील जैन, शीलचंद, सुधीर, मीनू, मुकेश, सुरेंद्र, विपिन, एलएम जैन, नवनी, आशा, अनुपम आढ़ती, प्रमोद, पतेंद्र, अतुल, उपेंद्र, रवि, हंसकुमार, आदीश, ममता, मीनू, सुधा, नीरज प्रवक्ता आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
खतौली। मोहल्ला सराफान स्ट्रीट स्थित वर्णी जैन साधु भवन में क्षुल्लिका 105 अंतसमती माता और आमर्षमती माता का चातुर्मास हेतु मंगल कलश स्थापना समारोह आयोजित किया।
शुभारंभ माता जी को विराजमान कराके मंगलाचरण व णमोकार महामंत्र पाठ से कराया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चेयरमैन पारस जैन रहे। चित्र अनावरण का कार्य शशांक महलका परिवार ने किया। ज्ञान के दीपक का प्रज्ज्वलन अजय किरयाना परिवार ने किया। समारोह का मुख्य आचार्यमान सागर मंगल कलश स्थापना को सौभाग्य बल्लू जैन, संजय व प्रदीप सर्राफ परिवार मेरठ को प्राप्त हुआ। आयोजित धर्मसभा में पूज्य माताजी ने बताया भारतीय संस्कृति में चातुर्मास काल धर्म आराधना व आत्मा का शुद्धि का समय है। वर्षा ऋतु में मुनियों और साधुओं को जीव हिंसा से बचने के लिए चार माह तक एक ही स्थान पर रहकर धर्मध्यान करना होता है, जिसे वर्षा योग या चातुर्मास स्थापना कहते हैं। संचालन प्रवीण जैन व कुलदीप जैन ने किया। मौके पर सुशील जैन, शीलचंद, सुधीर, मीनू, मुकेश, सुरेंद्र, विपिन, एलएम जैन, नवनी, आशा, अनुपम आढ़ती, प्रमोद, पतेंद्र, अतुल, उपेंद्र, रवि, हंसकुमार, आदीश, ममता, मीनू, सुधा, नीरज प्रवक्ता आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन