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भाकियू के ट्रैक जाम से 10 ट्रेनें हुईं प्रभावित
Wed, 30 Jan 2019 12:06 AM IST
Deepak Kausik
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Published by: Deepak Kausik
Updated Wed, 30 Jan 2019 12:06 AM IST
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खतौली रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में बैठे यात्री।
- फोटो : अमर उजाला
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गन्ना भुगतान को लेकर भारतीय किसान यूनियन द्वारा रेलवे स्टेशन पर ट्रैक पर कब्जा किए जाने के कारण इस मार्ग से गुजरने वाली दस ट्रेन प्रभावित हुई, जिनमें से कई को अन्य ट्रैक से निकाला गया, जबकि जालंधर इंटरसिटी को रद्द कर दिया गया। भाकियू कार्यकर्ता और किसान मंगलवार दोपहर करीब एक बजे स्टेशन पर पहुंचे और ट्रैक पर कब्जा कर बैठ गए। जिसके बाद कंट्रोल रूम को सूचना देकर ट्रेनों को मुजफ्फरनगर न भेजने को कहा गया। किसानों के आंदोलन के कारण ट्रेनों को निकटवर्ती स्टेशनों पर रोक दिया गया।
आंदोलन के कारण शाम सात बजे तक रेल संचालन ठप रहा। छह घंटे तक दिल्ली-मेरठ-सहारनपुर मार्ग पर ट्रेनों के पहिये थमे रहे। इस अवधि में इस मार्ग से गुजरने वाले 10 ट्रेनें प्रभावित हुईं। दिल्ली से जालंधर जाने वाली इंटरसिटी (सुपर) को रद्द कर दिया गया। दिल्ली से जम्मूतवी जाने वाली शालीमार एक्सप्रेस को वाया शामली से, सहारनपुर से चलने वाले नौचंदी लिंक को वाया रुड़की से मुरादाबाद भेजा गया।
दिल्ली से देहरादून जाने वाली जनशताब्दी एक्सप्रेस का भी मार्ग बदल कर उसे वाया हापुड़, मुरादाबाद से निकाला गया। अन्य ट्रेन भी प्रभावित हुई। देहरादून-ब्रांदा एक्सप्रेस को देवबंद, हरिद्वार से अहमदाबाद जाने वाली योगा एक्सप्रेस को टपरी, कालका पैसेंजर को बामनहेड़ी, ऋषिकेश-दिल्ली पैसेंजर को देवबंद रोके रखा गया। दिल्ली-अंबाला पैसेंजर मंसूरपुर, दिल्ली-अंबाला इंटरसिटी पहले मंसूरपुर फिर जड़ौदा, दिल्ली-सहारनपुर पैसेंजर मेरठ में खड़ी रही।
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ट्रेन रद्द और रूट बदलने से यात्री परेशान
मुजफ्फरनगर। भाकियू के आंदोलन के कारण इस मार्ग पर चलने वाली मुख्य ट्रेन शालीमार एक्सप्रेस, नौचंदी लिंक के न आने और सुपर के रद्द होने के कारण यात्री परेशान रहे। जिनका आरक्षण था, उन्हें आरक्षण का धन वापस दिया गया। ट्रेनों का संचालन बंद रहने से दैनिक यात्री को भी परेशानी उठानी पड़ी। ऐसे में उन्होंने बस से यात्रा करना ही बेहतर समझा।
सैकड़ों यात्रियों को हुई परेशानी का जिम्मेदार कौन
रेलवे स्टेशन पर जिस तरह छह घंटे तक ट्रैक पर अराजकता का माहौल रहा और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा, इसके लिए कहीं न कहीं जिला प्रशासन जिम्मेदार है। प्रशासन ने किसानों की समस्या का निस्तारण न कर उन्हें मनमानी की खुली छूट दे दी। आला अफसर खुद बचने का प्रयास करते रहे। यात्री स्टेशन पर भटकने को मजबूर रहे।
चार दिन पहले भाकियू ने डीएम ऑफिस पर धरना दिया, लेकिन प्रशासन ने मामले पर कोई गौर नहीं किया। डीएम राजीव शर्मा ने भी गंभीरता नहीं बरती। मंगलवार को डीएम ने खुद मिल प्रबंधकों और किसानों की बैठक बुलाई थी। किसानों की भीड़ के सामने मिल प्रबंधकों को वह सुरक्षा का विश्वास ही नहीं दिला पाए, इससे वह बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके लिए प्रशासन किसानों का प्रतिनिधिमंडल भी निर्धारित कर सकता था। डर के कारण मिल प्रबंधकों का बैठक में नहीं आना प्रशासन की सबसे बड़ी विफलता रही।
चीनी मिलों के जीएम नहीं आए थे तो किसानों को आश्वासन दिया जाना चाहिए था। किसान उठकर रेलवे ट्रैक पर चले गए। अफसरों की नासमझी के कारण छह घंटे रेलवे ट्रैक जाम रहा और हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। डीएम और एसएसपी ने पांच घंटे के बाद प्रयास शुरू किया। हालांकि किसान उनके जाने के बाद मान भी गए। यात्री छह घंटे तक रेलवे स्टेशन पर भटकने को मजबूर रहे। जो ट्रेन रद्द हुई, जिनका मार्ग बदला, उनके यात्रियों को आनन-फानन में अपना रिजर्वेशन भी निरस्त कराना पड़ा।
ट्रेनों का इंतजार करती रही आंखें
मुजफ्फरनगर। स्थानीय कॉलेज में इंजीनियरिंग के छात्र विपुल कुमार का कहना है कि वह प्रतिदिन ट्रेन से खतौली जाता है। उन्होंने एमएसटी बनवाई हुई है, ट्रेनों के नहीं आने से उसके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई, उसे चार घंटे स्टेशन पर खड़ा होना पड़ा। अपने परिवार के साथ नौचंदी से लखनऊ जाने वाले हंसचरण का कहना है कि वह समय से आधा घंटा पहले स्टेशन पहुंचे, यहां का नजारा देख, वह तनाव में आ गए।
नौचंदी को यहां से निरस्त करने के कारण उन्हें मजबूरी में रिजर्वेशन केंसिल कराना पड़ा। ड्यूटी के बाद शाम को प्रतिदिन सहारनपुर जाने वाली प्रियंका का कहना है कि उन्हें दो घंटे परेशानी का सामना करना पड़ा। मेरठ जाने वाले राकेश, अशोक का कहना है कि उन्होंने एमएसटी बनवा रखी है। ट्रैक जाम होने से उनका पूरा शेड्यूल ही बिगड़ गया है।
आंदोलन के कारण शाम सात बजे तक रेल संचालन ठप रहा। छह घंटे तक दिल्ली-मेरठ-सहारनपुर मार्ग पर ट्रेनों के पहिये थमे रहे। इस अवधि में इस मार्ग से गुजरने वाले 10 ट्रेनें प्रभावित हुईं। दिल्ली से जालंधर जाने वाली इंटरसिटी (सुपर) को रद्द कर दिया गया। दिल्ली से जम्मूतवी जाने वाली शालीमार एक्सप्रेस को वाया शामली से, सहारनपुर से चलने वाले नौचंदी लिंक को वाया रुड़की से मुरादाबाद भेजा गया।
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दिल्ली से देहरादून जाने वाली जनशताब्दी एक्सप्रेस का भी मार्ग बदल कर उसे वाया हापुड़, मुरादाबाद से निकाला गया। अन्य ट्रेन भी प्रभावित हुई। देहरादून-ब्रांदा एक्सप्रेस को देवबंद, हरिद्वार से अहमदाबाद जाने वाली योगा एक्सप्रेस को टपरी, कालका पैसेंजर को बामनहेड़ी, ऋषिकेश-दिल्ली पैसेंजर को देवबंद रोके रखा गया। दिल्ली-अंबाला पैसेंजर मंसूरपुर, दिल्ली-अंबाला इंटरसिटी पहले मंसूरपुर फिर जड़ौदा, दिल्ली-सहारनपुर पैसेंजर मेरठ में खड़ी रही।
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ट्रेन रद्द और रूट बदलने से यात्री परेशान
मुजफ्फरनगर। भाकियू के आंदोलन के कारण इस मार्ग पर चलने वाली मुख्य ट्रेन शालीमार एक्सप्रेस, नौचंदी लिंक के न आने और सुपर के रद्द होने के कारण यात्री परेशान रहे। जिनका आरक्षण था, उन्हें आरक्षण का धन वापस दिया गया। ट्रेनों का संचालन बंद रहने से दैनिक यात्री को भी परेशानी उठानी पड़ी। ऐसे में उन्होंने बस से यात्रा करना ही बेहतर समझा।
सैकड़ों यात्रियों को हुई परेशानी का जिम्मेदार कौन
रेलवे स्टेशन पर जिस तरह छह घंटे तक ट्रैक पर अराजकता का माहौल रहा और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा, इसके लिए कहीं न कहीं जिला प्रशासन जिम्मेदार है। प्रशासन ने किसानों की समस्या का निस्तारण न कर उन्हें मनमानी की खुली छूट दे दी। आला अफसर खुद बचने का प्रयास करते रहे। यात्री स्टेशन पर भटकने को मजबूर रहे।
चार दिन पहले भाकियू ने डीएम ऑफिस पर धरना दिया, लेकिन प्रशासन ने मामले पर कोई गौर नहीं किया। डीएम राजीव शर्मा ने भी गंभीरता नहीं बरती। मंगलवार को डीएम ने खुद मिल प्रबंधकों और किसानों की बैठक बुलाई थी। किसानों की भीड़ के सामने मिल प्रबंधकों को वह सुरक्षा का विश्वास ही नहीं दिला पाए, इससे वह बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके लिए प्रशासन किसानों का प्रतिनिधिमंडल भी निर्धारित कर सकता था। डर के कारण मिल प्रबंधकों का बैठक में नहीं आना प्रशासन की सबसे बड़ी विफलता रही।
चीनी मिलों के जीएम नहीं आए थे तो किसानों को आश्वासन दिया जाना चाहिए था। किसान उठकर रेलवे ट्रैक पर चले गए। अफसरों की नासमझी के कारण छह घंटे रेलवे ट्रैक जाम रहा और हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। डीएम और एसएसपी ने पांच घंटे के बाद प्रयास शुरू किया। हालांकि किसान उनके जाने के बाद मान भी गए। यात्री छह घंटे तक रेलवे स्टेशन पर भटकने को मजबूर रहे। जो ट्रेन रद्द हुई, जिनका मार्ग बदला, उनके यात्रियों को आनन-फानन में अपना रिजर्वेशन भी निरस्त कराना पड़ा।
ट्रेनों का इंतजार करती रही आंखें
मुजफ्फरनगर। स्थानीय कॉलेज में इंजीनियरिंग के छात्र विपुल कुमार का कहना है कि वह प्रतिदिन ट्रेन से खतौली जाता है। उन्होंने एमएसटी बनवाई हुई है, ट्रेनों के नहीं आने से उसके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई, उसे चार घंटे स्टेशन पर खड़ा होना पड़ा। अपने परिवार के साथ नौचंदी से लखनऊ जाने वाले हंसचरण का कहना है कि वह समय से आधा घंटा पहले स्टेशन पहुंचे, यहां का नजारा देख, वह तनाव में आ गए।
नौचंदी को यहां से निरस्त करने के कारण उन्हें मजबूरी में रिजर्वेशन केंसिल कराना पड़ा। ड्यूटी के बाद शाम को प्रतिदिन सहारनपुर जाने वाली प्रियंका का कहना है कि उन्हें दो घंटे परेशानी का सामना करना पड़ा। मेरठ जाने वाले राकेश, अशोक का कहना है कि उन्होंने एमएसटी बनवा रखी है। ट्रैक जाम होने से उनका पूरा शेड्यूल ही बिगड़ गया है।