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जोशी सक्रिय हुए, तो बढ़ी भाजपा नेताओं की धड़कनें
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 03 Jul 2013 12:23 PM IST
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डॉ. मुरली मनोहर जोशी की कानपुर में सक्रियता ने भाजपा के कई नेताओं के दिलों की धड़कने बढ़ा दी हैं। इस सक्रियता से उन्हें अपने सपने में बाधा पड़ती दिख रही है। नतीजतन जोशी की सक्रियता के जवाब में इन नेताओं ने भी दौड़भाग तेज कर दी है। जोशी के बड़े नेता होने के कारण कोई खुलकर तो उनके बारे में कुछ बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन अंदरखाने जोशी का रास्ता रोकने के लिए तिकड़म भिड़ाने की कोशिश शुरू हो गई है।
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कानपुर से लड़ सकते हैं चुनाव
वैसे तो डा. जोशी इस समय वाराणसी से सांसद हैं। पर, उनके वाराणसी के अलावा अन्य स्थान से भी लड़ने की चर्चा है। शायद इसी वजह से उनकी कानपुर में सक्रियता ने उनके चुनाव लड़ने के कयासों को जन्म दे दिया है। पहले उनके वैकल्पिक चुनाव क्षेत्र के रूप में लखनऊ चर्चा में था लेकिन अब उनकी सक्रियता कानपुर में बढ़ गई है।
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पिछले एक सप्ताह के भीतर वह दो बार कानपुर जा चुके हैं। इसके चलते अब उनके कानपुर से चुनाव मैदान में उतरने के कयास लगाए जा रहे हैं।
'यह महज संयोग है'
हालांकि, पार्टी प्रवक्ता विजय पाठक कहते हैं कि डा. जोशी भाजपा के बड़े नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इसलिए स्वाभाविक रूप से कार्यकर्ताओं की इच्छा रहती है कि उनके कार्यक्रम में डा. जोशी भी रहें। इसके पीछे चुनाव लड़ने के निहितार्थ नहीं खोजने चाहिए। इसे संयोग माना जाना चाहिए कि जोशी को आमंत्रित करने वाले दो कार्यक्रम एक सप्ताह के भीतर ही आयोजित हो गए। कोई नेता या कार्यकर्ता पार्टी संगठन के कार्यक्रमों के मद्देनजर सभी जगह आता-जाता रहता है।
कोई न कोई वजह जरूर
पाठक को भले ही इसके पीछे कोई चुनावी संभावना न दिख रही हो लेकिन पार्टी के सूत्र और इस सीट से चुनाव लड़ने वालों के समर्थकों को यह तर्क हजम नहीं हो रहा। उनका कहना है कि डा. जोशी पहले अगर किसी कार्यक्रम में कानपुर आए तो उन्होंने खुद को सिर्फ कार्यक्रम तक ही सीमित रखा। पर, इधर दो दौरों में उन्होंने कार्यकर्ताओं से घुलने-मिलने का प्रयास किया। कई कार्यकर्ताओं के साथ फोटुएं खिंचवाई और कुछ के घर भी गए। इसके पीछे जरूर कोई न कोई वजह है।