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UP: मुलायम सिंह की भी नहीं सुनी जाती

Wed, 25 Jun 2014 09:14 PM IST
अतुल चंद्रा/बीबीसी, लखनऊ
अतुल चंद्रा/बीबीसी, लखनऊ Updated Wed, 25 Jun 2014 09:14 PM IST
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mulayam singh confirms for electricity but it didn't

सूरज की तपिश तो कम थी लेकिन उमस बहुत ज़्यादा। लखनऊ से 33 किलोमीटर दूर मोहनलालगंज ब्लॉक के करोरा गांव में लोगों के पास बहते हुए पसीने को पोंछते रहने के अलावा और कोई उपाय नहीं था। 16 जून को रात लगभग नौ बजे कहीं तार टूट गया था और उसके बाद से बिजली गुल हो गई थी।

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17 जून को लगभग 2 बजे तक तो बिजली का कहीं आता-पता नहीं था और गांव वालों के मुताबिक़ तार कब ठीक किया जाएगा कुछ कहा नहीं जा सकता।

दशकों से बिजली के अभाव में रहना अब उनकी आदत बन चुकी है। करोरा बाजार में दुकानों में अंधेरा है। लोग अपने धंधे में तो लगे हैं, साथ ही पसीना भी पोंछ रहे हैं।

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आज तक नहीं मिली समय पर बिजली

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गांव के बुज़ुर्ग सालिकराम त्रिवेदी को याद नहीं कि उनके जीवन काल में बिजली कभी सात-आठ घंटे भी लगातार आई हो।

बिजली विभाग के लोगों के अनुसार, करोरा गांव में सुबह 10 से शाम छह बजे तक आपूर्ति की व्यवस्था है। हालांकि सालिकराम और ग्राम प्रधान के प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे नीरज कुमार त्रिवेदी तथा गांव के अन्य लोग बताते हैं कि उनको याद नहीं कि कभी इस समय सारिणी के हिसाब से उनके घरों में बिजली आई हो।

गांव के ही पुष्पेंद्र सिंह बताते हैं कि गांव को बिजली देने के लिए 22 किलोमीटर दूरी से तार लाया गया है जबकि एक पावर स्टेशन यहां से केवल पांच किलोमीटर दूरी पर है।

इतनी दूर से तार खींच कर लाने पर कब और कहाँ से तार टूट जाएगा या लोग कहाँ कटिया लगाकर बिजली चोरी करने लगेंगे, कहना मुश्किल होता है। साथ ही खराबी को ढूंढने और ठीक करने में भी वक़्त लगता है।

मुलायम सिंह ने दिया था ट्रांसफर लगाने के आदेश

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नीरज बताते हैं कि अक्तूबर 2013 में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का जन्मदिन मनाने के लिए उनके साथ करोरा गांव आए थे।

उस वक़्त उनको एक ज्ञापन दिया गया था कि यहां 100 केवी क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मर के बदले 200 केवी का ट्रांसफॉर्मर लगवा दिया जाए।

मुलायम के सामने ही अधिशासी अभियंता ने यह काम करवाने का वादा किया था, लेकिन अभी तक कुछ हुआ नहीं है।

भारतीय जनता पार्टी के मोहनलालगंज से चुने गए सांसद कौशल किशोर यहां की बिजली की समस्या को लेकर 13 और 14 जून को अनशन पर भी बैठे थे। उन्हें भी आश्वासन दिया गया कि जल्द ही बिजली की समस्या दूर हो जाएगी।

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यहां खेती तो दूर प्यास भी नहीं बुझती

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लगभग 2000 बीघे की खेती वाले इस गांव में लोग हैंडपंप के पानी से काम चलाते हैं। यह हैंडपंप भी केवल 42 हैं जिनसे पूरे गांव की प्यास भी मुश्किल से बुझती है। सिंचाई के लिए अपनी बोरिंग और जेनरेटर की मदद से काम चलता है।

मोहनलालगंज सब-स्टेशन के सब-डिविज़नल अफ़सर रितेश बताते हैं कि यहां 200 केवी के ट्रांसफॉर्मर लगाने के लिए मूल्यांकन भेजा जा चुका है। जैसे ही ऊपर से पैसा मिलता है यह ट्रांसफॉर्मर बदल दिया जाएगा।

22 किलोमीटर दूर से बिजली आपूर्ति को वे तकनीकी मजबूरी बताते हैं, लेकिन कहते हैं कि इस समस्या के निदान की भी कोशिश हो रही है।

करोरा में पेड़ कम और पक्के मकान ज़्यादा हैं इसलिए गर्मी और उमस से बचने के लिए लखनऊ लौटना ही बेहतर था। प्रदेश की राजधानी में रहने के कुछ तो फायदे होते हैं।

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