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'सरकार' की इस तल्खी के आखिर कुछ तो मायने हैं!
प्रदीप अवस्थी/अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 27 Dec 2013 04:46 PM IST
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माहौल महोत्सव का था लेकिन लहजे में उत्तर प्रदेश सरकार की चाल-ढाल पर तिलमिलाने वाली तल्खी। सार्वजनिक मंच पर शीर्ष नेताओं की कड़वी सीख में ‘अंदर की बात’ जिस तरह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सामने उजागर हुई, पता चल गया कि इसके कई गहरे मायने हैं।
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सरकार का अफसरशाही और गुंडों पर नियंत्रण नहीं है। हताशा यहां तक टपक पड़ी कि यही हाल रहा तो लोकसभा चुनाव जीतना पार्टी के लिए पापड़ बेलने जैसा होगा।
सरकार की अपने ही घर में इस तल्खी से राजनीति के जानकार कई मायने निकाल रहे हैं। मायने निकालने की भी वजह है कि आखिर सरकार संदेश क्या देना चाहती है। समाजवादी पार्टी के चारों शीर्ष नेताओं ने महोत्सव के उद्घाटन के अवसर पर जो संबोधन किया उसमें हर नेता की बात का अपना अलग संदेश रहा।
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लोक निर्माण मंत्री शिवपाल यादव, प्रो. रामगोपाल यादव, स्वयं मुख्यमंत्री और मुलायम सिंह ने तल्ख लहजे में जो नसीहत भरी बातें कहीं, वे सरकार और पार्टी के भीतर चल रही कश्मकश की चुगली कर गईं।
लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह कहते हैं कि पार्टी में स्वार्थी और घुसपैठिए आ गए हैं। सवाल है कि वे घुसपैठिए आखिर हैं कौन? आलाकमान उन्हें बाहर का रास्ता क्यों नहीं दिखा पा रहा है। सरकार के प्रमुख स्तम्भ शिवपाल खुद क्यों उन पर लगाम नहीं लगा पा रहे।
शिवपाल के भाषण के ठीक बाद प्रो. रामगोपाल यादव कहते हैं कि गुंडई जब तक नहीं रुकेगी, विकास के कोई मायने नहीं। नेता लोगों की जमीन और मकान कब्जाना छोड़ दें। न्याय के रास्ते पर चलें। उन्होंने संदेश देने की कोशिश की कि गुंडई की तो अब खैर नहीं। सवाल फिर वही कि आखिर वे कौन लोग हैं जो गुंडई कर रहे हैं। क्या उन्हें चिह्नित कर पार्टी से बाहर का रास्ता नहीं दिखाया जा सकता। इस काम में कौन बाधक बन रहा है। क्या सरकार और पार्टी में लोग एक राय नहीं हैं।
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सपा में आखिर कौन, किस पर, क्या इशारे कर रहा है, इस बात के लोग अपने अपने ढंग से अर्थ निकाल रहे हैं। उधर, खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपील करने वाले अंदाज में कहा कि जिन्होंने सरकार बनाने में मदद की वे सरकार चलाने भी दें।
मुख्यमंत्री की ये बात संदेश देती है कि कुछ लोग सरकार के काम में बाधा बन रहे हैं। तो फिर वे सरकार में क्यों हैं? क्या ऐसे लोगों पर लगाम कसने का कोई उपाय समाजवादी पार्टी के आलाकमान के पास नहीं है। बात यहीं नहीं ठहरती।
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव आखिर पार्टी के किन लोगों को नरेंद्र मोदी का तरफदार मानते हुए चेतावनी भरे लहजे में आगाह कर गए। वह ये भी कह गए कि कार्यकर्ताओं और नेताओं को कुछ ‘नए शौक’ लग गए हैं। वे अब पुराने नेताओं जैसे नहीं रहे।
ऐसे लोगों को उन्होंने जमीन से जुड़ने की नसीहत दी। कुल मिलाकर एक के बाद एक चारों नेताओं के बयान से पार्टी और सरकार की कुछ खामियां और कमियां गिनाई गईं, तो उन्हें दूर करने के उपाय भी बताए गए।