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‘आधार’ की सुस्त रफ्तार, जनता को कैसे मिलेगा लाभ
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Fri, 01 Mar 2013 10:47 AM IST
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उत्तर प्रदेश में विशिष्ट पहचान पत्र ‘आधार’ जिस रफ्तार से बन रहा है उस हिसाब से यूपी में यह काम वित्तमंत्री पी. चिदंबरम के अनुसार पर पूरा होता नजर नहीं आता। यहां आधार बनने की रफ्तार बेहद सुस्त है और यूपी अपने से छोटे एक दर्जन राज्यों से भी पीछे है।
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अब जबकि चिदंबरम ने यूपीए का मौजूदा कार्यकाल पूरा होते-होते गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ ‘आपका पैसा-आपके हाथ’ स्कीम को आधार से जोड़ने का ऐलान कर दिया है, सवाल उठ रहा है कि क्या सूबे के 20 करोड़ लोगों को इतने कम समय में आधार मिल पाएगा?
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भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने वर्ष 2009 से आधार बनवाने की शुरुआत की थी। पहले चरण में जनवरी 2012 तक देश में 20 करोड़ लोगों का आधार बनाए जाने का लक्ष्य था। प्राधिकरण ने इसके लिए राज्य सरकारों को रजिस्ट्रार और केंद्र सरकार के उपक्रमों (जैसे बैंक, पोस्ट आफिस आदि) को नान स्टेट रजिस्ट्रार घोषित किया था और इन्हें अनुमोदित पंजीकरण एजेंसियों के जरिए अभियान चलाकर पहचान पत्र बनवाने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
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इसे सियासी वजह कहें या कुछ और, यहां प्रदेश सरकार ने इसमें रुचि नहीं दिखाई और प्राधिकरण को नान स्टेट रजिस्ट्रार के जरिए इस अभियान को चलाना पड़ा। नतीजा ये हुआ कि आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक जैसे राज्य काफी आगे निकल गए और यूपी सिर्फ 1.01 करोड़ लोगों का आधार बना सका और सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य होने के बावजूद फिसड्डी साबित हुआ। हालांकि प्राधिकरण ने राष्ट्रीय स्तर पर लक्ष्य हासिल कर लिया।
विशिष्ट पहचान पत्र को लेकर केंद्रीय स्तर पर तमाम नुक्ताचीनी के बाद सरकार ने दूसरे चरण के अभियान में बड़ा फेरबदल कर दिया है। अब प्राधिकरण और रजिस्ट्रार जनरल आफ इंडिया (आरजीआई) को देश के बाकी लोगों का आधार बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें यूपी का पूरा काम आरजीआई के पास है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि 2009 से 2012 के बीच प्रदेश में सिर्फ 1.01 करोड़ लोगों के आधार बन सका। अब जबकि यूपीए के कार्यकाल में लगभग एक साल से कुछ ही महीने बचा है, सवाल उठाया जा रहा है कि प्रदेश के बाकी 20 करोड़ लोगों का आधार इस अवधि में बन पाएगा? विशेषज्ञ बताते हैं कि आरजीआई के पंजीकरण और पहचान पत्र बनाने की प्रक्रिया जिस तरह है उससे यह काम बेहद मुश्किल माना जा रहा है।
इस तरह बने हैं आधार
आंध्र प्रदेश 5,30,94,133
महाराष्ट्र 4,75,77,112
केरल 2,23,68,271
कर्नाटक 1,87,56,486
मध्यप्रदेश 1,81,21,855
राजस्थान 1,45,05,487
पंजाब 1,31,06,833
झारखंड 1,30,34,900
दिल्ली 1,28,84,404
तमिलनाडु 1,25,08,175
पश्चिम बंगाल 1,24,05,780
उत्तर प्रदेश 1,01,01,267
भारतीय विशेष पहचान प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय यूपी/उत्तराखंड के सहायक महानिदेशक चंद्रशेखर मिश्र का कहना है कि पहले चरण में नान गवर्नमेंट रजिस्ट्रार के निर्देशन में प्रदेश में 1.01 करोड़ लोगों का विशिष्ट पहचान पत्र (आधार) बना था। यह चरण जनवरी 2012 तक पूरा हो गया। दूसरा चरण 2012 में शुरू हुआ। इसमें प्रदेश की आबादी के शेष लोगों को पहचान पत्र दिया जाना है। इस चरण की प्रदेश में आधार बनवाने की जिम्मेदारी अकेले रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को सौंपी गई है। यह काम 2014 में पूरा कर किया जाना है।
एक काम दोहरा खर्च
सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए एक ओर केंद्र सरकार एक-एक व्यक्ति का पहचान जुटाने के लिए आधार बनवा रही है दूसरी ओर प्रदेश सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आरटीओ और पासपोर्ट सिस्टम को डिजिटलाइज करने का काम कर रही है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि आधार का रिकार्ड तैयार हो जाए तो केंद्र की हो या प्रदेश सरकार की किसी भी योजना के सही लाभार्थी तक लाभ पहुंचाया जा सकता है। मगर केंद्र व राज्य स्तर पर तालमेल न होने की वजह से एक ही तरह की दोनों एजेंसियां अलग-अलग काम करवा रही हैं जिससे खर्च भी दोहरा हो रहा है।