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Moradabad News: याकूतपुर चौकी ध्वस्त, किसने कराया निर्माण... रहस्य बरकरार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jul 2025 01:19 AM IST
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Yakutpur Chowki demolished, who built it... the mystery remains
मुरादाबाद। मूंढापांडे थानाक्षेत्र में दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर जीरो प्वाइंट के पास याकूतपुर गांव में निर्माणाधीन पुलिस चौकी को मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने शुक्रवार को अवैध मानते हुए ध्वस्त कर दिया।
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यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई और विभागों की ओर से निर्माण कार्य से पल्ला झाड़ने के बाद की गई है। निर्माण ध्वस्त करने के बाद भी यह रहस्य बरकरार है कि बिना अनुमति और जिम्मेदार संस्था के यह निर्माण कौन करा रहा था।
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विवादित चौकी का निर्माण गाटा संख्या-112 पर किया जा रहा था जो लोक निर्माण विभाग के नाम दर्ज है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता सिराज मुस्तफा ने इसे अपने आवास के प्रवेश मार्ग के सामने बताया था जिससे आवाजाही में बाधा उत्पन्न हो रही थी। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के दौरान जब अदालत ने नगर निगम, एमडीए, लोक निर्माण विभाग और स्मार्ट सिटी से जानकारी मांगी तो सभी ने निर्माण में अपनी भूमिका से इन्कार कर दिया था।
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एसएसपी ने पहले हाईकोर्ट में बताया कि उन्हें इस याचिका से निर्माण की जानकारी मिली है। बाद में उन्होंने जांच कराई तो पता चला कि निर्माण स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कराया जा रहा है। लेकिन स्मार्ट सिटी के कंपनी सेक्रेटरी ने हलफनामे में स्पष्ट किया कि इस परियोजना के तहत कोई चौकी नहीं बनवाई जा रही। स्थिति तब और उलझ गई जब एमडीए और नगर निगम ने निर्माण के लिए किसी तरह की स्वीकृति देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन को जांच पूरी कर सभी दस्तावेजों सहित जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था।
शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई थी लेकिन उससे पहले ही एमडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण को अवैध घोषित किया और बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया।
अधिकारियों के मुताबिक न तो निर्माण की कोई स्वीकृति ली गई थी और न ही कोई नक्शा पास कराया गया था। इसके लिए डीएम से भी जानकारी मांगी गई थी लेकिन किसी भी विभाग ने इसपर अपना दावा नहीं पेश किया। इसके बाद सामान्य कार्रवाई के तहत इसे अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्त कर दिया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम में अब भी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के आखिर यह निर्माण किसके निर्देश पर शुरू किया गया था। हाईवे पर प्राधिकरण को ठेंगा दिखाते हुए आखिर किसने यह अवैध निर्माण किया। यह सवाल अभी भी बाकी है। एमडीए की इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में भी खलबली है लेकिन कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
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