चिंताजनक: मुरादाबाद में अचानक बढ़ गया वायु प्रदूषण, कांशीराम नगर ज्यादा प्रदूषित.. वायु गुणवत्ता सूचकांक 142
दिवाली से एक सप्ताह पहले ही मुरादाबाद में वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है, कांशीराम नगर में एक्यूआई 215 तक पहुंच गया। शहर का औसत एक्यूआई 142 रहा, जिसमें पीएम 2.5 का स्तर काफी ऊंचा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी प्रदूषण की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
विस्तार
अभी दिवाली का त्योहार आने में एक सप्ताह का समय शेष है और मुरादाबाद की हवा पहले से ही प्रदूषित होने लगी है। पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर तीन सौ के ऊपर पहुंच गया है। शहर में सबसे ज्यादा प्रदूषित हवा कांशीराम नगर की है। रात नौ बजे के आंकड़ों के अनुसार यहां का एक्यूआई 215 था। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्तर खराब होता है।
बुधवार को शहर का वायु प्रदूषण यलो जोन में दर्ज किया गया। मुरादाबाद में छह स्थानों पर वायु प्रदूषण का स्तर मापा जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से समीर एप पर जारी होने वाले आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 142 रहा।
कांशीराम नगर का एक्यूआई 215 (ऑरेंज जोन), बुद्धि विहार का एक्यूआई 156, रोजगार कार्यालय का 123, हर्बल पार्क का 121, ट्रांसपोर्ट नगर का 119 और जिगर कॉलोनी का एक्यूआई 118 दर्ज किया गया। कांशीराम नगर में पीएम (पर्टिकुलैट मैटर) 2.5 का अधिकतम स्तर 367 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 10 का अधिकतम स्तर 266 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रहा।
बुद्धि विहार में पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 244 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 10 का अधिकतम स्तर 170 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रहा। वहीं हर्बल पार्क में पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 239 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 10 का अधिकतम स्तर 133 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।
क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, आशुतोष चौहान ने बताया की समीर एप के अलावा हम अपने स्तर से भी प्रदूषण की जांच करते हैं। स्थानीय आंकड़ों का आकलन करेंगे।
23 दिन में सबसे ज्यादा प्रदूषण
कांशीराम नगर में अक्तूबर के 23 दिनों के आंकड़ों में से एक और आठ अक्तूबर को एक्यूआई सौ से नीचे दर्ज किया गया। 19 दिन एक्यूआई सौ से दो सौ के बीच यलो जोन में रहा है। दो दिन ऑरेंज जोन में एक्यूआई दर्ज किया गया है। इसमें भी 23 अक्तूबर को सबसे ज्यादा 215 रहा।
घातक बीमारियों का बनता है कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण में गैस की अपेक्षा पर्टिकुलैट मैटर (भारी कण) ज्यादा हैं। यह इतने घातक होते हैं कि सांसों के जरिये खून में घुल जाता है। खून के साथ पूरे शरीर में प्रवाहित होता है। यह सांस, दमा के अलावा कैंसर का भी कारण बन सकता है।