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जिम्मेदार कौन? दस लाख रुपये महीने खर्च, फिर भी मौत बनकर घूम रहे छुट्टा जानवर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2020 01:06 AM IST
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Who is responsible Ten million rupees a month spent, yet the animals are turning into death
मंडी समिति के पास खडा जानवर के सामने से पार होते लोग। - फोटो : CITY
मुरादाबाद। नगर निगम की लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य सड़कों पर आवारा पशु यमराज बनकर घूम रहे हैं। रामगंगा विहार में मंगलवार रात सांड़ ने जिंस कारोबारी अपार शुक्ला के पेट में सींग घुसाकर उसे मार डाला। दर्दनाक हादसे ने व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम प्रशासन आवारा गोवंशी पशुओं की धरपकड़ के लिए हर महीने करीब दस लाख रुपये खर्च करता है। आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए करीब 30 कर्मचारियों की फौज भी है। इसके बाद भी पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। इससे न केवल दुर्घटनाएं हो हैं बल्कि वाहन चालकों को जाम से भी जूझना पड़ता है। निगम के अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों को सांप सूंघ गया है।
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गोवंशी पशुओं का संवर्धन योगी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। मुख्यमंत्री इसको लेकर गंभीर भी हैं। हर जिले में गोशाला बनाई जा रही हैं, ताकि सड़कों पर घूमने वाले गोवंशी पशुओं को वहां रखा जा सके। मुख्यमंत्री अपने हर दौरे में गोशाला और पशुओं को लेकर अफसरों को दिशा निर्देश भी देते हैं। इसके बाद भी निगम के अफसरों और नेताओं की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। सड़कों पर घूमने वाले पशु लोगों की जान लेने लगे हैं। मोहल्लों से लेकर मुख्य सड़कों पर जहां तहां पशु बैठे और घूमते नजर आते हैं। सांड़ सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों को सींग मारकर नुकसान पहुंचाते हैं।
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पुराने शहर की सड़कों पर सबसे अधिक पशु नजर आते हैं। मंडी समिति और लाइनपार की सड़कों पर लोगों को सींग मारने के साथ फड़, ठेली और वाहनों को नुकसान पहुंचाते हैं। सड़कों पर खाना नहीं मिलने पर पशु कालोनियों में घुस आते हैं। बुद्धि विहार निवासी दीपक गुप्ता और प्रवीण शर्मा बताते हैं, निगम को किसी की जानमाल की परवाह नहीं है। वार्ड पार्षद प्रदीप शर्मा ने बताया कि कुछ महीने पहले एक सांड़ ने युवक को घायल कर दिया था। उसे पकड़वाकर गोशाला पहुंचाया। लाइनपार निवासी राज किशोर और प्रेम चंद ने बताया कि मंडी बंद होते ही कई आवारा पशु सड़कों पर आ जाते हैं। पशु मंडी में सड़ी गली सब्जियां खाते हैं। यहां सबसे अधिक सांड़ हैं। भगाने पर सांड़ लोगों को दौड़ा देते हैं। कई बार तो सांड़ गुस्सा निकालने के लिए सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों और फड़ एवं ठेली को तोड़ देते हैं। चाऊ की बस्ती में भी गोवंश पशुओं का झुंड घूमता रहता है। निगम की टीम आज तक वहां नहीं पहुंची है।
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गोवंशी पशु कहां ले जाते हैं पता नहीं: शर्मा
मुरादाबाद। वार्ड 53 की पार्षद भावना शर्मा के प्रतिनिधि विनोद शर्मा ने निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि चाऊ की बस्ती में एक सांड़ ने दहशत फैलाई थी। उसे पकड़वाकर, लेकिन निगम कर्मचारी कहां ले गए किसी को नहीं पता।
- नगर निगम की गोशाला है। निगम की टीम आवारा घूमने वाले गोवंशी पशुओं को पकड़कर गोशाला में रखती है। वहीं उनकी देखरेख होती है। पशुओं को पकड़ने से लेकर गोशाला में उनकी देखभाल के लिए स्टाफ है। गोशाला में करीब 165 गोवंशीय पशु हैं।
- गंभीर सिंह, सहायक नगर आयुक्त
नगर निगम की जिम्मेदारी होती है शहर की किसी भी कालोनी में लावारिस पशु नहीं घूमने चाहिए। अगर सांड़ के हमले से अपार शुक्ला की मौत हुई है तो इसके लिए नगर निगम जिम्मेदार है।

- आनंद मोहन गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व महासचिव दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी
नगर निगम की लापरवाही से मेरे भाई की जान चली गई। जिस जगह सांड़ ने मेरे भाई पर हमला किया। वहां अंधेरा था। एक साइड की सड़क भी टूटी हुई थी। नगर निगम ने अपनी जिम्मेदारी समझी होती और वहां पहले से रोशनी की व्यवस्था होती और सड़क ठीक होती तो मेरा भाई दूर से ही सांड़ को देखकर अपनी बाइक बचा सकता था। शायद उनकी बाइक सांड के पास तक न पहुंचती और वो आज हमारे बीच होते।
- अक्षय उर्फ लखन शुक्ला, अपार शुक्ला का भाई।
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