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UP: होर्मुज में तनाव से महंगा हुआ विदेशों तक कंटेनर पहुंचाना, पीतलनगरी के निर्यातकों की चिंता फिर बढ़ी

Thu, 23 Apr 2026 12:30 PM IST
Vimal Sharma अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: Vimal Sharma Updated Thu, 23 Apr 2026 12:30 PM IST
सार

पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज से सीधी आवाजाही बाधित होने से मुरादाबाद के निर्यातक संकट में हैं। जहाजों के लंबा रास्ता लेने से डिलीवरी समय 8-10 दिन से बढ़कर 25 दिन हो गया है। इससे प्रति कंटेनर करीब 1.40 लाख रुपये किराया बढ़ गया। 

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UP: Rising Tensions Strait Hormuz Drive Up Cost of Shipping Containers Abroad; Exporters Face Renewed Concerns
मुरादाबाद में कंटेनर डिपो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पश्चिम एशिया पूरी तरह शांत होने और होर्मुज से सहज आवाजाही के रास्ते न बनने से पीतलनगरी के उद्यमियों की चिंता फिर बढ़ गई। निर्यात और आयात में इस्तेमाल होने वाले जहाजों के घूमकर जाने से समय ज्यादा लगने की समस्या है। साथ ही सीधा रास्ता न होने से प्रति कंटेनर (40 फीट) के किराये में 1.40 लाख रुपये की बढ़ोतरी हो गई है।

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इससे पुराने आर्डरों के आधार पर भेजे जाने वाले माल की कीमत बढ़ जा रही है, जबकि खरीदार पूर्व की डील के समय की दरों पर ही टिके हैं। निर्यातकों ने बताया कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य से माल की आवाजाही में दो तरफा मार पड़ रही है। अमेरिका और यूरोप आठ से 10 दिन में पहुंचने वाले उत्पादों को जहाजों के घूमकर जाने से 25 दिन लग रहे हैं।
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रास्ता बदलने के कारण यूरोप का किराया 1500 डॉलर प्रति कंटेनर (40 फीट) अधिक बढ़ गया। यानी मुरादाबाद के निर्यातकों को प्रति कंटेनर 1.40 लाख रुपये अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों के कारण कच्चा माल आयात करने और हस्तशिल्प निर्यात करने की चेन टूट रही है। 
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दि हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर एसोसिएशन के सचिव सतपाल ने बताया कि जहाजों के साउथ अफ्रीका होते हुए यूरोप और अमेरिका जाने की वजह से खर्चा 50 प्रतिशत बढ़ गया है। यूरोप तक का किराया 3500 डॉलर प्रति कंटेनर (40 फीट) था। अब 4500 डॉलर प्रति कंटेनर हो गया है। 
वहीं, अमेरिका के लिए किराया प्रति कंटेनर (40 फीट) बढ़कर छह हजार डॉलर हो गया है।

वह बताते हैं कि जिले के बड़े निर्यातक हर महीने सीआईएफ (कॉस्ट, इंश्योरेंस एंड फ्रेट) की नीति से आठ से 10 कंटेनर यूरोप व अमेरिका भेजते हैं। बढ़े हुए खर्च के हिसाब से एक-एक निर्यातक को 10 से 14 लाख रुपये प्रति माह का अधिक भार उठाना पड़ेगा। एमएचईए के अध्यक्ष नावेद उर रहमान ने भी यही बात दोहराई। कहा कि शिपमेंट के खर्च और समय की अधिकता निर्यातक वर्ग की बड़ी चिंता है। ताजे हालात से जल्द उबरने के संकेत भी नहीं हैं।

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जहाज दक्षिण अफ्रीका होते हुए यूरोप जा रहे हैं। इसकी वजह से अब हर कंटेनर पर 1.40 लाख रुपये अधिक किराया देना पड़ रहा है। होर्मुज में तनाव की वजह से समस्या अधिक बढ़ गई हैं। मैं हर महीने करीब 10 कंटेनर सीआईएफ के जरिए भेजता हूं। - सतपाल, निर्यातक 

होर्मुज में तनाव की वजह से यूरोप उत्पाद भेजने के लिए कम से कम 12 दिन अधिक समय लगना तय है। प्रति कंटेनर यूरोप के लिए 1500 डॉलर अधिक किराया हो गया। काम और नए आर्डर के बीच निर्यात के खर्च में यह बढ़ोतरी काफी है।  - सुरेश कुमार गुप्ता, निर्यातक 

होर्मुज में तनाव ने सभी निर्यातकों के लिए परेशानी बढ़ा दी है। जिनका माल एफओबी के जरिए जाएगा, उनके माल के पहुंचने में समय अधिक लगेगा। जिनका सीआईएफ के जरिए जाएगा वहां किराया भी अधिक देना पड़ेगा। - विशाल अग्रवाल, निर्यातक

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