दो झोलाछापों को उम्रकैद: गलत ऑपरेशन से गर्भवती की मौत, अमरोहा में पहली बार ऐसी सजा
अमरोहा में प्रसव के दौरान गलत तरीके से ऑपरेशन करने से गर्भवती रूबी की मौत के नौ साल पुराने मामले में अदालत ने दो झोलाछापों विल्सन और मुस्तफा को उम्रकैद की सजा सुनाई। दोनों पर 11-11 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया। जिले में झोलाछापों के खिलाफ उम्रकैद की यह पहली सजा है।
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अमरोहा में प्रसव के दौरान गलत तरीके से ऑपरेशन करने पर गर्भवती की मौत के नौ साल पुराने मामले में न्यायालय ने दो झोलाछापों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों पर 11-11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सजा सुनाए जाने के बाद जमानत पर चल रहे दोनों दोषियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
खास बात यह है कि जिले में झोलाछापों के खिलाफ उम्रकैद की यह पहली सजा है। मामला आदमपुर थाना क्षेत्र के रहरा स्थित युग मेडिकल सेंटर का है। गुरैठा गांव निवासी किसान नेम सिंह की पत्नी रूबी को तीन अक्तूबर 2017 की रात करीब आठ बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी।
नेम सिंह गांव के रहने वाले सत्यवीर, मुन्ने खां और धर्म सिंह के साथ रूबी को लेकर रहरा स्थित युग मेडिकल सेंटर पहुंचे। यहां माैजूद झोलाछाप विल्सन और उसकी पत्नी ने रूबी को देखने के बाद सामान्य प्रसव होने की बात कहते हुए उसे सेंटर में भर्ती कर लिया था।
इस दौरान रूबी की मौत हो गई। घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने हंगामा किया था। सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और युग मेडिकल सेंटर को सील कर दिया। मामले में विल्सन और मुस्तफा के खिलाफ गैर इरादतन हत्या समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
पुलिस ने दोनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। बाद में दोनों जमानत पर जेल से बाहर आ गए थे। मामले की सुनवाई अपर जिला जज स्पेशल (एमपी-एमएलए कोर्ट) तृतीय की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने पैरवी की।
शनिवार को अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर झोलाछाप विल्सन और मुस्तफा को दोषी करार दिया। साथ ही दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 11-11 हजार का जुर्माना भी लगाया है।
कार्रवाई नहीं करने के आरोप में तत्कालीन डीएम और सीएमओ को अवमानना नोटिस जारी
झोलाछाप विल्सन और मुस्तफा को उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ ही कोर्ट ने अमरोहा के तत्कालीन डीएम और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव चौधरी के मुताबिक दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में जिले में झोलाछापों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई जबकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे।
अदालत ने निर्देशों के अनुपालन में बरती गई लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए दोनों तत्कालीन अधिकारियों से जवाब तलब किया है। साथ ही मुख्य सचिव को नोटिस भेजकर दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
झोलाछाप विल्सन की पत्नी को भी बनाया था आरोपी
पीड़ित नेम सिंह ने घटना के बाद दी गई तहरीर में झोलाछाप विल्सन की पत्नी को भी आरोपी बनाया था। पुलिस ने मामले की विवेचना की तो उसके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसके बाद विवेचना के दौरान उसका नाम निकाल दिया गया। पुलिस ने विल्सन और मुस्तफा के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था।