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Moradabad News: दो ड्रोन दीदी, एक को काम के लाले, दूसरी की बैटरी खराब
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मुरादाबाद। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी दो महिलाओं को ड्रोन दीदी का खिताब और ड्रोन तो पांच महीने पहले मिल गया, लेकिन काम के लाले हैं। भारत सरकार की ओर से समूह की आय बढ़ाने तथा महिलाओं को खेती-किसानी से जोड़ने के उद्देश्य से यह ड्रोन उन्हें मुफ्त में दिए गए हैं, लेकिन इनमें से एक ड्रोन दीदी को जहां काम के लाले हैं वहीं दूसरी ड्रोन दीदी के ड्रोन की एक बैटरी खराब होने के कारण आर्डर के बावजूद काम नहीं कर पा रहीं हैं।
जिले के ग्राम रत्तूपुरा स्थित कुंज स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष गार्गी व ग्राम बंदेवाली मड़इया की अध्यक्ष हिमानी विश्नोई का चयन शासन की ओर से ड्रोन दीदी के रूप में किया गया है। दोनों महिलाओं को हैदराबाद में 15 दिन, प्रयागराज में 10 दिन ट्रेनिंग देने के बाद बिहार के पूर्वी चंपारन में ड्रोन भी उड़वाया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसका लाइव देखा था। इसके बाद पांच माह पहले ड्रोन दीदीयों के घर मुफ्त में ड्रोन पहुंच गए। दोनों महिलाओं को पांच माह पहले यह ड्रोन मिल गए, लेकिन इसके बाद भी दोनों दीदी पांच माह में पांच हजार रुपये भी इस ड्रोन से नहीं कमा सकीं हैं। इससे भारत सरकार की इस योजना पर शुरुआती दौैर में ही सवालिया निशान लगने लगा है। इनमें से एक ड्रोन दीदी का कहना है कि यहां के किसानों को ड्रोन कल्चर नहीं भा रहा है। वहीं दूसरी ड्रोन दीदी का कहना है कि उनके पास पड़ोसी जिले तक से काम का ऑफर आया है, लेकिन उनके ड्रोन की एक बैटरी खराब होने के कारण वह चाह कर भी काम नहीं कर पा रही हैं। यह हाल तब है जब ड्रोन का किराया 400 रुपये प्रति एकड़ रखा गया है।
- पांच महीने पहले मुझे ड्रोन मिला था। करीब तीन एकड़ में नैनो यूरिया ड्रोन से छिड़का है। इसकी बैटरी सिर्फ 20 से 25 मिनट ही चलती है। अतिरिक्त कोई बैटरी नहीं दी गई है। खेतों में बैटरी चार्ज करने सुविधा भी नहीं होती हैं। कीटनाशक में बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है जबकि ड्रोन में सिर्फ दस लीटर पानी आता है। इसलिए भी किसान ड्रोन से छिड़काव से कतरा रहे हैं। जिसकी वजह से काम के लाले पड़े हैं। - हिमानी विश्नोई, ड्रोन दीदी
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- मैंने पांच माह में करीब छह एकड़ गन्ने की फसल में नैनो यूरिया व कीटनाशकों का छिड़काव 400 रुपये प्रति एकड़ की दर से किया है। पहले एक एकड़ में छिड़काव के बाद से ही ड्रोन के छह सेलों (बैट्री) में से एक सेल की बैटरी डाउन हो गई थी, जो दुबारा चार्ज नहीं हुई। कुछ काम हिमानी से उसके ड्रोन की बैटरी मांग पर पूरा किया। खेतों में ले जाने और बैटरी में चार्जिंग की भी समस्या है। जब तक दूसरी बैटरी नहीं मिलती काम प्रभावित रहेगा। -गार्गी, ड्रोन दीदी
दीदियों ने यह भी बताई समस्या
- बैटरी कुल 20-25 मिनट काम करती है।
- करीब 10 किलो वजन वाले इस ड्रोन को किसानों के खेतों में लाने और काम के बाद वापस ले जाने की समस्या।
- ड्रोन में सिर्फ 10 लीटर पानी का टैंक होना।
- कीटनाशक दवाओं के उपयोग के लिए अधिक पानी की जरूरत पड़ना। आदि
- प्रचार-प्रसार के अभाव में अधिकांश किसानों का ड्रोन कल्चर से खेती का न करना आदि।
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जिले के ग्राम रत्तूपुरा स्थित कुंज स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष गार्गी व ग्राम बंदेवाली मड़इया की अध्यक्ष हिमानी विश्नोई का चयन शासन की ओर से ड्रोन दीदी के रूप में किया गया है। दोनों महिलाओं को हैदराबाद में 15 दिन, प्रयागराज में 10 दिन ट्रेनिंग देने के बाद बिहार के पूर्वी चंपारन में ड्रोन भी उड़वाया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसका लाइव देखा था। इसके बाद पांच माह पहले ड्रोन दीदीयों के घर मुफ्त में ड्रोन पहुंच गए। दोनों महिलाओं को पांच माह पहले यह ड्रोन मिल गए, लेकिन इसके बाद भी दोनों दीदी पांच माह में पांच हजार रुपये भी इस ड्रोन से नहीं कमा सकीं हैं। इससे भारत सरकार की इस योजना पर शुरुआती दौैर में ही सवालिया निशान लगने लगा है। इनमें से एक ड्रोन दीदी का कहना है कि यहां के किसानों को ड्रोन कल्चर नहीं भा रहा है। वहीं दूसरी ड्रोन दीदी का कहना है कि उनके पास पड़ोसी जिले तक से काम का ऑफर आया है, लेकिन उनके ड्रोन की एक बैटरी खराब होने के कारण वह चाह कर भी काम नहीं कर पा रही हैं। यह हाल तब है जब ड्रोन का किराया 400 रुपये प्रति एकड़ रखा गया है।
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- पांच महीने पहले मुझे ड्रोन मिला था। करीब तीन एकड़ में नैनो यूरिया ड्रोन से छिड़का है। इसकी बैटरी सिर्फ 20 से 25 मिनट ही चलती है। अतिरिक्त कोई बैटरी नहीं दी गई है। खेतों में बैटरी चार्ज करने सुविधा भी नहीं होती हैं। कीटनाशक में बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है जबकि ड्रोन में सिर्फ दस लीटर पानी आता है। इसलिए भी किसान ड्रोन से छिड़काव से कतरा रहे हैं। जिसकी वजह से काम के लाले पड़े हैं। - हिमानी विश्नोई, ड्रोन दीदी
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- मैंने पांच माह में करीब छह एकड़ गन्ने की फसल में नैनो यूरिया व कीटनाशकों का छिड़काव 400 रुपये प्रति एकड़ की दर से किया है। पहले एक एकड़ में छिड़काव के बाद से ही ड्रोन के छह सेलों (बैट्री) में से एक सेल की बैटरी डाउन हो गई थी, जो दुबारा चार्ज नहीं हुई। कुछ काम हिमानी से उसके ड्रोन की बैटरी मांग पर पूरा किया। खेतों में ले जाने और बैटरी में चार्जिंग की भी समस्या है। जब तक दूसरी बैटरी नहीं मिलती काम प्रभावित रहेगा। -गार्गी, ड्रोन दीदी
दीदियों ने यह भी बताई समस्या
- बैटरी कुल 20-25 मिनट काम करती है।
- करीब 10 किलो वजन वाले इस ड्रोन को किसानों के खेतों में लाने और काम के बाद वापस ले जाने की समस्या।
- ड्रोन में सिर्फ 10 लीटर पानी का टैंक होना।
- कीटनाशक दवाओं के उपयोग के लिए अधिक पानी की जरूरत पड़ना। आदि
- प्रचार-प्रसार के अभाव में अधिकांश किसानों का ड्रोन कल्चर से खेती का न करना आदि।